Edited By Krishan Rana, Updated: 04 Apr, 2026 08:48 PM

हरियाणा के नागरिक अस्पताल में गंभीर लापरवाही का मामला सामने
रेवाड़ी (महेंद्र भारती) : हरियाणा की स्वास्थ्य मंत्री के गृह क्षेत्र रेवाड़ी के नागरिक अस्पताल में गंभीर लापरवाही का मामला सामने आया है। अस्पताल की छत पर रखी कुछ पानी की टंकियों के ढक्कन गायब मिले, जिससे मरीजों और उनके परिजनों को पेयजल सप्लाई किया जाता है। टंकी के भीतर गंदे पानी में कीड़े चलते हुए दिखाई दिए, जिससे मरीजों के स्वास्थ्य पर बड़ा खतरा मंडराने लगा।
मामला तब उजागर हुआ जब मीडिया टीम अस्पताल की छत पर पहुंची। वहां देखा गया कि मुख्य टंकी बिना ढक्कन के खुली पड़ी थी और उसके पानी में गंदगी के साथ कीड़े साफ नजर आ रहे थे। जैसे ही मीडिया ने कवरेज शुरू की, अस्पताल प्रशासन में हड़कंप मच गया। आनन-फानन में सुपरवाइजर और प्लंबर मौके पर पहुंचे और टंकी पर ढक्कन लगाए गए। हालांकि अस्पताल की पुरानी बिल्डिंग पर रखी अन्य टंकियां अब भी बिना ढक्कन के नजर आईं। जब उन्हें दिखाने के लिए कहा गया तो संबंधित कर्मचारियों ने वहां की चाबी उपलब्ध न होने की बात कहकर मामला टालने की कोशिश की।
मौके पर मौजूद कर्मचारियों से जब टंकी के ढक्कन गायब होने का कारण पूछा गया तो उन्होंने आंधी में ढक्कन उड़ जाने की बात कही। वहीं पानी में गंदगी और कीड़े मिलने पर वाटर सप्लाई के साथ मिट्टी और कीचड़ आने का तर्क दिया गया। यह जवाब अस्पताल प्रबंधन की लापरवाही को और उजागर करता है। गौरतलब है कि हाल ही में हरियाणा के नल्हड़ मेडिकल कॉलेज की पानी की टंकी में मृत बंदर मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह अलर्ट मोड पर है।
स्वास्थ्य विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. सुमिता मिश्रा ने राज्यभर के सभी अस्पतालों और स्वास्थ्य संस्थानों में पानी की टंकियों की तुरंत जांच और सफाई के सख्त निर्देश जारी किए थे। इसके बावजूद रेवाड़ी के नागरिक अस्पताल में इस तरह की अनदेखी सामने आना कई सवाल खड़े करता है। सबसे गंभीर बात यह है कि अस्पताल में इलाज और दवा लेने पहुंच रहे मरीज इस बात से पूरी तरह अनजान हैं कि उन्हें जो पानी पिलाया जा रहा है, वही उनकी सेहत को और खराब कर सकता है। एक ओर अस्पताल मरीजों के इलाज का केंद्र है, वहीं दूसरी ओर ऐसी लापरवाही संक्रमण और जलजनित बीमारियों को न्योता दे सकती है।

जब इस मामले में सिविल अस्पताल के क्वालिटी सेल इंचार्ज डॉ. सुभाष यादव से बात करने का प्रयास किया गया तो उन्होंने मीडिया से बातचीत के लिए अधिकृत न होने की बात कहकर पल्ला झाड़ लिया। अब बड़ा सवाल यह है कि स्वास्थ्य विभाग के सख्त आदेशों की जमीनी स्तर पर पालना कब तक सुनिश्चित होगी। क्या जिम्मेदार अधिकारी और कर्मचारी इसी तरह अपनी जिम्मेदारियों से बचते रहेंगे, या फिर मरीजों की सेहत से जुड़े इस गंभीर मुद्दे पर ठोस कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल यह मामला अस्पताल प्रशासन की कार्यशैली और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
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