हरियाणा विस चुनावः बगावत के बाद बाजी जितवाना शैलजा के लिए बन गया साख का सवाल

Edited By Shivam, Updated: 05 Oct, 2019 11:30 AM

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हरियाणा में अब सियासी पारा चढ़ता जा रहा। टिकटों के वितरण के बाद पार्टियों में हलचल तेज हो गई। बड़े नेता अपनी साख बचाने में जुट गए हैं।अपने खास नेताओं को टिकट दिलवाने के लिए कुमारी शैलजा की जिद से कांग्रेस में बगावत शुरू हुई

डेस्क: हरियाणा में अब सियासी पारा चढ़ता जा रहा। टिकटों के वितरण के बाद पार्टियों में हलचल तेज हो गई। बड़े नेता अपनी साख बचाने में जुट गए हैं। अपने खास नेताओं को टिकट दिलवाने के लिए कुमारी शैलजा की जिद से कांग्रेस में बगावत शुरू हुई है, जिसके बाद उनके लिए चुनाव जितवाना नाक का सवाल बन गया है। 

हरियाणा में मौजूदा राजनीतिक समीकरणों को देखते हुए भले ही धुर विरोधी रहे पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा और राज्यसभा सदस्य कुमारी शैलजा इस वक्त एक होकर प्रदेश में कांग्रेस का झंडा उठाए हुए हैं, लेकिन सूबे में अंबाला संसदीय क्षेत्र ऐसा हैं, जहां सैलजा और हुड्डा की विचारधारा आज भी आमने-सामने हैं। शैलजा ने यहां टिकट वितरण के दौरान पूर्व सीएम हुड्डा की नहीं चलने दी।

हुड्डा अंबाला संसदीय क्षेत्र की नौ विधानसभा सीटों में से सिर्फ दो सीटों मुलाना और अंबाला कैंट पर अपने पसंदीदा उम्मीदवारों को उतरवाना चाहते थे। मुलाना सीट से शैलजा की सहमति के चलते हुड्डा पूर्व मंत्री फूलचंद के बेटे वरुण को टिकट दिलवाने में कामयाब भी रहे, लेकिन अंबाला कैंट सीट पर हुड्डा चहेते पूर्व मंत्री चौधरी निर्मल सिंह की बेटी चित्रा सरवारा को टिकट नहीं दिलवा पाए। हुड्डा ने चित्रा की टिकट के लिए एड़ी चोटी का जोर लगा दिया था। मगर शैलजा की जिद के आगे हुड्डा की एक नहीं चली।

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