Edited By Krishan Rana, Updated: 30 Mar, 2026 07:46 PM

पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा की अध्यक्षता में हुई कांग्रेस विधायक दल की बैठक में प्रदेश के तमाम मुद्दों
चंडीगढ़ (चन्द्र शेखर धरणी) : पूर्व मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा की अध्यक्षता में आज कांग्रेस विधायक दल की महत्वपूर्ण बैठक हुई। बैठक में प्रदेश के तमाम मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। इसमें फैसला लिया गया है कि गेहूं और सरसों की खरीद में किसानों को पेश आ रही दिक्कतों को जानने के लिए तमाम विधायक प्रदेशभर की मंडियों का दौरा करेंगे और किसानों की आवाज को उठाएंगे। क्योंकि बीजेपी सरकार हर बार फसल खरीद के नाम पर सिर्फ घोटाला करती है।
साथ ही फैसला लिया गया है कि मई महीने में पार्टी पूरे प्रदेश में जिला स्तरीय बैठकें करेगी। इसके अलावा मीटिंग में नवनिर्वाचित राज्यसभा उम्मीदवार कर्मवीर बौद्ध ने समर्थन के लिए सभी विधायकों का धन्यवाद किया। साथ ही पार्टी ने निर्वाचन अधिकारी के खिलाफ चुनाव आयोग को लिखित शिकायत देने का फैसला लिया है। क्योंकि उन्होंने गलत तरीके से कांग्रेस विधायकों की वोट को कैंसिल की थी। साथ ही वोट कैंसिल के मामले को हाईकोर्ट में भी लेकर जाया जाएगा। प्रदेश अध्यक्ष रॉव नरेंद्र सिंह ने बताया कि क्रॉस वोटिंग को लेकर अनुशासन समिति की बैठक 3 अप्रैल को होगी ।
तमाम मुद्दो पर बोलते हुए भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कहा है कि बीजेपी की रीति-नीति बन गई है कि वो हर बार किसानों को परेशान करने का नया तरीका ढूंढ़ लाती है, इसबार भी उसने ऐसा किया है। इसबार गेहूं खरीद के लिए नया नियम बनाया गया है कि ट्रैक्टर की नंबर-प्लेट की फोटो समेत किसानों का बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन भी होगा। इतना ही नहीं, किसान को वैरिफाई करने के लिए 3-3 गारंटर भी चाहिए होंगे। मानो ये अनाज मंडी नहीं बल्कि कोई हाई सिक्युरिटी जोन या जेल हो।
हुड्डा ने कहा कि जल्द से जल्द और गेहूं की पूरी खरीद सुनिश्चित करने की बजाए, सरकार हमेशा खरीद में अड़ंगा लगाने की तरकीब निकालती रहती है। किसानों के लिए बायोमेट्रिक और गेट पर ही गेट पास काटने का नियम ऐसा है, जो प्रैक्टिकल रूप से लागू करना असंभव है। क्योंकि जमींदार एक मेहनतकश वर्ग है, जिस वजह से बहुत से किसानों की उंगलियों के निशान तक घिस जाते हैं। कई बार बैंकों तक में उनकी उंगलियों के निशान मैच नहीं होते या फिर मैच करने में उनका समय लगता है।
ऐसे में अगर यही काम मंडी के गेट पर होगा तो ट्रैक्टरों की लंबी लाइन लग जाएगी, जो जाम का कारण बनेगी। ज्यादातर जमीदार किराए के ट्रैक्टर लेकर मंडी आते हैं। अगर जाम की वजह से या वैरिफिकेशन में देरी की वजह से खरीद में देरी हुई तो ट्रैक्टर का किराया कौन देगा? जाहिर तौर पर ये बोझ किसान पर पड़ेगा और पहले से कर्ज में डूबे किसान को और आर्थिक नुकसान होगा।
हुड्डा ने कहा कि सरकार के इस बेवजह अड़चनों की पोल भी खुल चुकी है। क्योंकि मंडियों में सरकारी खरीद पहले ही दिन ठप हो गई। कारण ये कि सरकार द्वारा लागू किए गए नए नियम और ई-खरीद पोर्टल दोनों फेल हो गए। मंडियों में किसान अपनी फसल लेकर पहुंचे, लेकिन ई-पोर्टल अपडेट न होने के कारण गेट पास तक जारी नहीं हो सके। नए नियमों के तहत किसानों को गेट पास के लिए बायोमेट्रिक सत्यापन, ट्रैक्टर नंबर और फसल की फोटो अपलोड करनी थी, लेकिन पहले ही दिन सिस्टम ठप हो गया। नतीजा यह रहा कि किसान मंडियों में घंटों इंतजार करते रहे, लेकिन उनकी फसल की खरीद नहीं हो सकी।
आढ़ती एसोसिएशन ने भी बताया है कि एक गेट पास बनाने में 10 से 15 मिनट का समय लग रहा है, जिससे एक दिन में सीमित संख्या में ही किसानों की प्रक्रिया पूरी हो सकती है। इससे आने वाले दिनों में और बड़ी अव्यवस्था की आशंका है।
इतना ही नहीं, भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने मंडियों की व्यवस्था की ओर भी सरकार का ध्यान दिलाया। उन्होंने बताया कि वो लगातार किसानों से बात कर रहे हैं। मंडियों में आज ना बारदाना है, ना तिरपाल. ना लेबर, ना किसानों के लिये कोई सहूलियत और ना ही अबतक ट्रांसपोर्ट के टेंडर हुए हैं। ऐसे में जो फसल आएगी वो मंडियों में ही पड़ी रहेगी और उसका उठान नहीं होगा। और जबतक उठान नहीं होगा, तबतक किसानों की पेमेंट नहीं होगी। कुल मिलाकर ये सरकार ऐसे हालात पैदा कर रही है कि किसान मंडी आना ही छोड़ दें। मंडी क्या, ये सरकार तो चाहती है कि किसान खेती ही छोड़ और इस सेक्टर को भी पूरी तरह पूंजीपतियों के हाथों में सौंप दे।
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