Edited By Krishan Rana, Updated: 07 Oct, 2026 04:13 PM

आज हरियाणा कांग्रेस के एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने चंडीगढ़ के लोक भवन में राज्यपाल प्रोफेसर असीम कुमार घोष से
चंडीगढ़ : आज हरियाणा कांग्रेस के एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने चंडीगढ़ के लोक भवन में राज्यपाल प्रोफेसर असीम कुमार घोष से मुलाकात की। इस मौके पर हरियाणा कांग्रेस प्रभारी संजय दत्त, अध्यक्ष राव नरेन्द्र सिंह, पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा, OBC अध्यक्ष चन्द्र प्रकाश जांगड़ा एवं अन्य कई विधायक लोकभवन चंडीगढ़ में राज्यपाल से मिले और उन्हें ज्ञापन सौंपा।
इस मौके पर ज्ञापन में लिखा गया कि हम आने वाली जनगणना में जाति की गिनती के तरीके से जुड़े एक बहुत बड़े राष्ट्रीय महत्व के मुद्दे पर आपका ध्यान खींचने के लिए यह मेमोरेंडम पेश कर रहे हैं। एक जाति जनगणना सामाजिक न्याय के लिए एक ऐतिहासिक ज़रिया तभी बन सकती है जब हर जाति और समुदाय की गिनती सही, साइंटिफिक तरीके से और लगातार की जाए।

किसी नागरिक से सिर्फ़ उसकी जाति पूछना काफ़ी नहीं है। तरीके में यह पक्का करना चाहिए कि एक ही वैलिडेट जाति/समुदाय के अलग-अलग नाम, मिलते-जुलते नाम, क्षेत्रीय बदलाव और स्पेलिंग में बदलाव को अलग-अलग समुदायों के तौर पर न गिना जाए।


सही गिनती से सही डेटा मिलता है; सही डेटा से अच्छी पब्लिक पॉलिसी, बराबर रिप्रेजेंटेशन और सोशल जस्टिस बनता है।समस्या: एक जाति कई नामों से दर्ज हो सकती है। पूरे भारत में, एक ही जाति या समुदाय को अलग-अलग नामों, सब-नेम, काम के टाइटल, क्षेत्रीय मिलते-जुलते शब्दों और स्पेलिंग या उच्चारण के अलग-अलग तरीकों से जाना जा सकता है।
अगर जाति के नाम बिना साइंटिफिक तरीके से तैयार स्टैंडर्ड क्लासिफिकेशन और कोडिंग सिस्टम के सिर्फ़ शब्दशः दर्ज किए जाते हैं, तो एक समुदाय की आबादी कई अलग-अलग एंट्री में बंट सकती है। उदाहरण के लिए, आसान स्पेलिंग या भाषा में बदलाव से भी अलग-अलग एंट्री हो सकती हैं, जो सही वैलिडेशन के बाद एक ही चीज़ को दिखा सकती हैं।
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