हरियाणा में नहीं आएगा गंदा पानी, राजस्थान के साथ बनी सहमति, 450 करोड़ रुपए खर्च होंगे

Edited By Yakeen Kumar, Updated: 07 Jan, 2026 02:20 PM

agreement reached on sending contaminated water from rajasthan to haryana

हरियाणा और राजस्थान के बीच वर्षों से चले आ रहे गंदे पानी के विवाद के समाधान की दिशा में बड़ी पहल हुई है।

चंडीगढ़ : हरियाणा और राजस्थान के बीच वर्षों से चले आ रहे गंदे पानी के विवाद के समाधान की दिशा में बड़ी पहल हुई है। रेवाड़ी जिले के धारूहेड़ा में भिवाड़ी से आने वाले औद्योगिक अपशिष्ट और दूषित जल की समस्या को लेकर दिल्ली में उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई, जिसमें करीब 450 करोड़ रुपये की संयुक्त परियोजना को मंजूरी दी गई। बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने की।

बैठक में दोनों राज्यों के बीच जलभराव और प्रदूषण की समस्या का स्थायी समाधान निकालने पर सहमति बनी। जिसमें मसानी बैराज में छोड़े जा रहे प्रदूषित पानी के प्रवाह को नियंत्रित करने के लिए विशेष व्यवस्था विकसित करने का निर्णय लिया गया। बैठक में राजस्थान के मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा, केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह और भूपेंद्र यादव भी मौजूद रहे।

6 किलोमीटर लंबी नाली बनेगी

निर्णय के अनुसार मानसून के दौरान भिवाड़ी क्षेत्र से बारिश के पानी की निकासी के लिए दिल्ली-जयपुर राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-48) के किनारे करीब 6 किलोमीटर लंबी नाली का निर्माण किया जाएगा। इस परियोजना की लागत हरियाणा और राजस्थान बराबर-बराबर वहन करेंगे, जबकि बाकि राशि सड़क परिवहन मंत्रालय देगा। कुल मिलाकर दोनों योजनाओं पर लगभग 450 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।

केंद्रीय पर्यावरण मंत्री का आश्वासन

केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने आश्वासन दिया कि भिवाड़ी में 40 एमएलडी क्षमता वाला ‘कंबाइंड एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट’ मार्च तक चालू कर दिया जाएगा, जिससे औद्योगिक अपशिष्ट जल का उपचार संभव होगा। इससे दूषित पानी को शोधित कर दोबारा उद्योग और कृषि कार्यों में उपयोग किया जा सकेगा।

राजस्थान के सीएम ने दिलाया भरोसा

बैठक में नितिन गडकरी ने स्पष्ट किया कि भविष्य में समस्या और गंभीर हो सकती है, इसलिए केवल वर्षा जल की निकासी ही नहीं, बल्कि केमिकल युक्त पानी के प्रबंधन पर भी सख्ती जरूरी है। वहीं राव इंद्रजीत सिंह ने धारूहेड़ा में लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ रहे दुष्प्रभावों पर चिंता जताते हुए कहा कि अब राजस्थान से आने वाला प्रदूषित पानी हरियाणा के लिए स्वीकार्य नहीं होगा। राजस्थान के सीएम ने मार्च तक ट्रीटमेंट प्लांट पूरा करने का भरोसा दिया, जबकि हरियाणा सरकार मसानी बैराज पर विशेष प्रणाली विकसित करेगी। 

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