Edited By Isha, Updated: 02 Jun, 2026 09:07 AM

आईडीएफसी फर्स्ट बैंक से जुड़े 645 करोड़ के घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने रियल एस्टेट कारोबारी विक्रम वाधवा को गिरफ्तार कर लिया है। ईडी के चंडीगढ़ जोनल अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के कार्यालय ने धन शोधन निवारण तहत यह कार्रवाई की।
चंडीगढ़: आईडीएफसी फर्स्ट बैंक से जुड़े 645 करोड़ के घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने रियल एस्टेट कारोबारी विक्रम वाधवा को गिरफ्तार कर लिया है। ईडी के चंडीगढ़ जोनल अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के कार्यालय ने धन शोधन निवारण तहत यह कार्रवाई की।
जांच एजेंसी के अनुसार विक्रम वाधवा इस पूरे नेटवर्क का अहम हिस्सा था और उसने सरकारी धन के गबन से जुड़ी रकम को छिपाने, खर्च करने और निवेश करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। ईडी ने विक्रम वाधवा को पीएमएलए की धारा-19 के तहत गिरफ्तार कर विशेष पीएमएलए अदालत में पेश किया। अदालत ने उसे दो जून तक ईडी रिमांड पर भेज दिया है।
ईडी की जांच में सामने आया कि हरियाणा सरकार, चंडीगढ़ प्रशासन और चंडीगढ़ व पंचकूला स्थित दो निजी स्कूलों के बैंक खातों से करीब 645 करोड़ रुपये की हेराफेरी की गई। ये सभी खाते आईडीएफसी फर्स्ट बैंक से संचालित किए जा रहे थे। आरोप है कि इस पूरे नेटवर्क को रिभव ऋषि, अभय कुमार, कुछ बैंक अधिकारियों और सरकारी कर्मचारियों की कथित मिलीभगत से संचालित किया गया।
जांच एजेंसी का दावा है कि विक्रम वाधवा के निजी बैंक खातों में 70 करोड़ से अधिक की राशि पहुंची थी। बड़ी मात्रा में नकदी भी पहुंचाई गई जो कथित तौर पर गबन की गई रकम से तैयार की गई थी। ईडी अब इस पूरे मनी ट्रेल को खंगाल रही है और यह पता लगाने में जुटी है कि धनराशि किन-किन माध्यमों से आगे भेजी गई।