फूड प्वाइजनिंग से 13 भैंसें मरीं, 20 बीमार

Edited By Isha, Updated: 11 Aug, 2019 06:07 PM

13 buffaloes killed 20 sick due to food poisoning

साहा रोड पर स्थित गांव रामनगर में फूड प्वाइजनिंग से 2-3 दिनों में 13 भैंसों की मौत हो चुकी है, जबकि 20 बीमार हैं। इनमें से 3 की हालत ङ्क्षचताजनक है। राज्यमंत्री कृष्ण बेदी ने गांव का दौरा कर पीड़ित

शाहाबाद मारकंडा (रणजीत): साहा रोड पर स्थित गांव रामनगर में फूड प्वाइजनिंग से 2-3 दिनों में 13 भैंसों की मौत हो चुकी है, जबकि 20 बीमार हैं। इनमें से 3 की हालत ङ्क्षचताजनक है। राज्यमंत्री कृष्ण बेदी ने गांव का दौरा कर पीड़ित परिवारों से बातचीत की व आश्वासन दिया कि वह इस बारे मुख्यमंत्री व उपायुक्त से बात कर हरसम्भव सहायता दिलवाई जाएगी।  उन्होंने चिकित्सकों से भी बातचीत की व दिशा-निर्देश दिए कि बीमार पशुओं को अच्छा उपचार दिया जाए।

पीड़िता बलजिंद्र व बिमला देवी ने बताया कि वह गांव के नजदीक से चारा लाई थीं। अन्य ग्रामीण भी वहीं से चारा लाए थे जिसे खाने से हीरा लाल व प्रेम की 3-3 भैंसें, शिंगारा व रामकुमार की 2-2 भैंसें, रोहताश व रूलदा राम की 1-1 भैंस तथा सुरजीत का 1 कटड़ा काल का ग्रास बन गए। सरकार द्वारा पशुधन बीमा योजना के अंतर्गत आम व्यक्ति के लिए 100 रुपए प्रति पशु तथा अनुसूचित जाति के लिए नि:शुल्क बीमा किया जाता है लेकिन ग्रामीण इस योजना से अनभिज्ञ थे। 

जब इस बारे में ग्रामीणों से बातचीत की तो उन्होंने इसका सारा ठीकरा विभाग के सिर फोड़ा। मामले की गम्भीरता को देखते हुए पशुपालन विभाग हरकत में आया और 4 डाक्टरों की टीम गांव में डेरा जमाए है और बीमार पशुओं की देखभाल कर रही है। पशुपालन विभाग के एस.डी.ओ. डा. जसबीर पंवार ने बताया कि मृत पशुओं की जांच करने व जहां से घास लाया गया था, उसका सैम्पल लेने पर पता चला है कि घास जहरीला था और पशुओं की मौत फूड प्वाइजङ्क्षनग से हुई है। डाक्टरों की टीम ने जहां से घास लाया गया था, वहां का दौरा किया और पाया कि यह खेत खाली और गहरा है जिस कारण बरसात के दिनों में आसपास के खेतों का सारा पानी इस जगह इकट्ठा हो गया। 


किसानों ने खेतों में कीटनाशक डाले हुए थे जिस कारण यहां उगा चारा जहरीला हो गया। इसी चारे को खाने के कारण पशुओं की मौत हुई है। उन्होंने सरपंच व ग्रामीणों से अपील की कि कोई भी व्यक्ति उक्त जगह से घास न लाए। सरपंच को कहा कि इस जगह कंटीली तार लगाए ताकि आवारा पशु भी इसे चर न सकें व गांव में मुनियादी करवाएं।

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