परम पूज्य जगद्गुरु साई माँ की ऐतिहासिक आध्यात्मिक यात्रा, दुनिया भर से पहुंचे साधक, संत और आध्यात्मिक नेता

Edited By Gaurav Tiwari, Updated: 05 May, 2026 07:23 PM

the historic spiritual journey of his holiness jagadguru sai maa

बुद्ध पूर्णिमा के पावन अवसर पर जगद्गुरु साई माँ, जो विश्व प्रसिद्ध जीवित संत, आध्यात्मिक उपचारक, मानवतावादी तथा 2,700 वर्ष पुरानी विष्णुस्वामी परंपरा की पहली महिला जगद्गुरु हैं, ने बोधगया में छह दिनों तक चलने वाले विशेष आध्यात्मिक कार्यक्रमों और...

गुड़गांव ब्यूरो  : बुद्ध पूर्णिमा के पावन अवसर पर जगद्गुरु साई माँ, जो विश्व प्रसिद्ध जीवित संत, आध्यात्मिक उपचारक, मानवतावादी तथा 2,700 वर्ष पुरानी विष्णुस्वामी परंपरा की पहली महिला जगद्गुरु हैं, ने बोधगया में छह दिनों तक चलने वाले विशेष आध्यात्मिक कार्यक्रमों और पवित्र यात्रा का नेतृत्व किया। इस अवसर पर 40 से अधिक देशों से आए साधकों, संतों, गुरुओं, महामंडलेश्वरों, आध्यात्मिक नेताओं और श्रद्धालुओं ने भाग लिया। यह सभी कार्यक्रम उस पवित्र भूमि पर आयोजित किए गए, जहां गौतम बुद्ध ने ज्ञान प्राप्त किया था। साई माँ ने बोधगया को चुनने के पीछे विशेष कारण बताते हुए कहा कि यह केवल एक स्थान नहीं, बल्कि आत्मज्ञान, सत्य और चेतना की अनुभूति का केंद्र है। इस अवसर पर साई माँ ने अपने संदेश में कहा बोधगया हमारी मूल अवस्था है, हमारा वास्तविक स्वरूप है, हमारी मूल अनुभूति है। साधना का उद्देश्य कुछ बनना नहीं है। बोधि वृक्ष के नीचे भगवान बुद्ध कुछ बने नहीं थे, बल्कि उन्होंने हर भ्रम के पार सत्य को देखा था। वहां कोई अलग अस्तित्व नहीं है। पूरे कार्यक्रम के दौरान साई माँ के शिष्य प्रतिदिन सुबह और शाम महाबोधि मंदिर में स्थित पवित्र बोधि वृक्ष के नीचे मौन साधना और गहन ध्यान में शामिल हुए। बुद्ध पूर्णिमा की रात्रि में भी विशेष ध्यान साधना आयोजित की गई।

 

अंतरराष्ट्रीय आंतरिक शांति सम्मेलन

बोधगया स्थित वाट थाई मगध बौद्ध विपश्यना मठ में अंतरराष्ट्रीय आंतरिक शांति सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस सम्मेलन में भारत और दुनिया भर से संत, आध्यात्मिक गुरु, भिक्षु, साधक और विभिन्न धर्मों के प्रतिनिधि शामिल हुए। इस अवसर पर वाट थाई मगध के प्रमुख लामा ने साई माँ को मानवता और सनातन धर्म के लिए उनके आजीवन योगदान के सम्मान में “अंतरराष्ट्रीय आंतरिक शांति सम्मेलन सम्मान” प्रदान किया। सम्मेलन के दौरान साई माँ ने कहा शांति कभी अनुपस्थित नहीं थी। शांति कभी बाहर नहीं थी। शांति कोई मंजिल भी नहीं है। शांति वही है, जो हम वास्तव में हैं, जब असत्य पूरी तरह समाप्त हो जाता है। हम सभी बुद्ध हैं, हम सभी दिव्य चेतना हैं। क्या हम अपने भीतर जाकर अपने वास्तविक स्वरूप को पहचानने का साहस रखते हैं?” सम्मेलन के बाद सभी उपस्थित लोगों और आम नागरिकों के लिए सामूहिक प्रसाद एवं भंडारे का आयोजन किया गया।

 

बोधगया आत्मज्ञान यज्ञ

श्रीजगन्नाथ मंदिर में काशी के 21 विद्वान पंडितों द्वारा विशेष वैदिक अग्नि यज्ञ आयोजित किया गया। यह यज्ञ भगवान विष्णु, भगवान जगन्नाथ, महालक्ष्मी और सप्तऋषियों को समर्पित था। यज्ञ के दौरान विष्णु सूक्त, श्री सूक्त और सप्तऋषि गायत्री मंत्र का सामूहिक जाप किया गया। इस यज्ञ का संकल्प आत्मज्ञान, समृद्धि, सभी प्राणियों के कल्याण और मोक्ष के लिए लिया गया। दुनिया भर के श्रद्धालुओं ने इस कार्यक्रम में सजीव प्रसारण के माध्यम से भी भाग लिया। यज्ञ के बाद साई माँ ने 500 से अधिक श्रद्धालुओं को दर्शन और आशीर्वाद प्रदान किया। इस दौरान सामूहिक मंत्रोच्चार, आध्यात्मिक संदेश और भंडारे का आयोजन किया गया।

 

पितृ पूजा और समापन समारोह

विष्णुपद मंदिर में पितृ पूजा और पिंडदान के साथ इस पवित्र यात्रा का समापन हुआ। शाम को महाबोधि मंदिर में अंतिम प्रार्थना और ध्यान के साथ यह आयोजन पूर्ण हुआ। बोधगया में संपन्न यह आध्यात्मिक यात्रा इस संदेश के साथ समाप्त हुई कि आंतरिक शांति कोई दूर का लक्ष्य नहीं, बल्कि हर व्यक्ति के भीतर मौजूद एक जीवंत सत्य है। भगवान बुद्ध की ज्ञानभूमि से दिया गया यह संदेश अब पूरी दुनिया में शांति, प्रेम, जागरूकता और आत्मबोध का प्रकाश फैलाएगा। जगद्गुरु साई माँ विश्व प्रसिद्ध आध्यात्मिक गुरु, मानवतावादी और अनेक लोकप्रिय पुस्तकों की लेखिका हैं। वह 2,700 वर्ष पुरानी विष्णुस्वामी परंपरा में जगद्गुरु की उपाधि प्राप्त करने वाली पहली महिला हैं। पूर्वी आध्यात्मिक ज्ञान और पाश्चात्य उपचार पद्धतियों के समन्वय के माध्यम से साई माँ लोगों को उपचार, जागरण और सजग जीवन की दिशा में मार्गदर्शन देती हैं।

 

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