मैरिंगो एशिया हॉस्पिटल्स, गुरूग्राम ने प्रीवेंटिव हेल्थकेयर पर चर्चा कर मनाया विश्व स्वास्थ्य दिवस

Edited By Gaurav Tiwari, Updated: 10 Apr, 2026 04:38 PM

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विशेषज्ञों ने शुरुआती पहचान, जीवनशैली में बदलाव और सामुदायिक जागरूकता पर ज़ोर दिया

गुड़गांव ब्यूरो: सामुदायिक भलाई और प्रीवेंटिव हेल्थकेयर के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को मज़बूत करते हुए, मैरिंगो हॉस्पिटल्स, गुरूग्राम ने एक मल्टी-स्पेशियल्टी पैनल संग विश्व स्वास्थ्य दिवस मनाया। कार्यक्रम की खास बात यह थी कि इस पैनल में आस-पास के आरडब्लूए के 70 से ज़्यादा निवासी शामिल हुए। इसका मुख्य उद्देश्य प्रीवेंटिव हेल्थ पर जानकारी साझा करने, शुरुआती पहचान के बारे में जागरूकता फैलाने और हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स एवम् समुदाय के बीच मज़बूत संबंध बनाते हुए एक गतिशील मंच तैयार करना था। चर्चा में वरिष्ठ चिकित्सकों का एक प्रतिष्ठित पैनल, जिनमें डॉ. हेमंत शर्मा (ऑर्थोपेडिक्स और रोबोटिक जॉइंट केयर), डॉ. प्रवीण गुप्ता (न्यूरो और स्पाइन), डॉ. संजीव चौधरी (कार्डियोलॉजी), डॉ. मीत कुमार (हेमेटोलॉजी ऑन्कोलॉजी), डॉ. राजीव सूद (यूरोलॉजी और रीनल ट्रांसप्लांट), डॉ. पल्लवी वसल (प्रसूति एवं स्त्री रोग) और डॉ. पारस अग्रवाल (मधुमेह, मोटापा और मेटाबॉलिक विकार) आदि शामिल थे। पैनल का संचालन डॉ. पारुल यादव ने किया।

 

चर्चा का मुख्य विषय ‘‘प्रीवेंटिव एंड इंटेग्रेटेड हेल्थकेयर इन अर्बन इंडिया’’ यानि “शहरी भारत में निवारक और एकीकृत स्वास्थ्य सेवा“ था, जिसमें प्रतिक्रियात्मक से सक्रिय स्वास्थ्य सेवा पद्धतियों की ओर बढ़ने की तत्काल आवश्यकता पर ज़ोर दिया गया। इस अवसर पर, सभी मेहमानों का स्वागत करते हुए, मैरिंगो एशिया हॉस्पिटल्स, गुरुग्राम के फ़ैसिलिटी डायरेक्टर, हरप्रीत सिंह ने आपातकालीन देखभाल प्रबंधन को आसान बनाने के लिए शुरू की गई मरीज़-हितैषी पहलों के बारे में बात की। उन्होंने आगे कहा कि अस्पताल में बिलिंग प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए एक किफायती और एकीकृत दृष्टिकोण के साथ प्रयास किए जा रहे हैं। कार्यक्रम में स्वास्थ्य से जुड़ी कई तरह की चिंताओं पर बात हुई, जैसे लाइफस्टाइल से जुड़ी बीमारियाँ, दिल की बीमारियों का खतरा, कैंसर के बारे में जागरूकता और दिमाग से जुड़ी सेहत। विशेषज्ञों ने इस बात पर ज़ोर दिया कि अगर नियमित जांच (स्क्रीनिंग) और लाइफस्टाइल में बदलाव करके गंभीर बीमारियों का पता समय रहते चल जाए, तो उन्हें रोका जा सकता है या उनका असरदार तरीके से इलाज किया जा सकता है।

 

हॉस्पिटल के न्यूरो और स्पाइन विभाग के चेयरमैन डॉ. प्रवीण गुप्ता ने बीमारी से बचाव की सोच रखने के महत्व पर ज़ोर दिया। उन्होंने कहा, “हर बीमारी के सामने आने से पहले एक लंबा, खामोश दौर होता है। अगर हम शुरुआती लक्षणों पर ध्यान दें और बचाव के तरीके अपनाएँ, तो हम बीमारियों का बोझ काफी हद तक कम कर सकते हैं।” विशेषज्ञों ने सर्वाइकल कैंसर से जल्दी बचाव के लिए ‘पैप स्मीयर’ के ज़रिए नियमित जाँच और एचपीवी का टीका लगवाने की अहमियत पर ज़ोर दिया। साथ ही, उन्होंने ऑनलाइन उपलब्ध मेडिकल जानकारी के बढ़ते गलत इस्तेमाल और खुद ही अपनी बीमारी का अंदाज़ा लगाने की बढ़ती प्रवृत्ति पर भी चिंता जताई।  हृदय रोग विशेषज्ञ ने बताया कि दिल के दौरे के लक्षण, खासकर महिलाओं में अक्सर सामान्य लक्षणों से अलग हो सकते हैं, और उन्होंने 30 साल की उम्र के बाद भी समय पर जाँच करवाने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया। मूत्र रोग विशेषज्ञ ने गुर्दे की पथरी और मूत्र मार्ग के संक्रमण के शुरुआती चेतावनी भरे लक्षणों के बारे में बताया, और लंबे समय तक चलने वाली जटिलताओं से बचने के लिए ज़्यादा पानी पीने और समय पर इलाज करवाने की अहमियत पर ज़ोर दिया। कैंसर विशेषज्ञ ने कैंसर से जुड़ी कई आम भ्रांतियों को दूर करते हुए बताया कि अब रक्त कैंसर के काफी मामलों का इलाज संभव है, बशर्ते बीमारी का पता शुरुआती चरण में ही चल जाए। 

 

मेटाबॉलिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ ने वज़न घटाने वाली दवाओं के बिना किसी की देखरेख के इस्तेमाल के प्रति आगाह किया; साथ ही, उन्होंने यह भी कहा कि अगर मोटापे से जुड़ी बीमारियों के इलाज के लिए ये दवाएँ सही तरीके से लिखी जाएँ, तो इनसे काफी फ़ायदा भी होता है। चर्चाओं के साथ-साथ व्यावहारिक सुझाव, असल ज़िंदगी के उदाहरण और गलतफहमियों को दूर करने वाली बातों के चलते लोगों को अपनी सेहत की ज़िम्मेदारी खुद लेने की हिम्मत मिली। चर्चा में एक व्यावहारिक पहलू जोड़ते हुए, ऑर्थोपेडिक्स और रोबोटिक जॉइंट केयर के चेयरमैन डॉ. हेमंत शर्मा ने घर पर ही अपनी शारीरिक फिटनेस जाँचने के कुछ आसान तरीके बताए। यह पहल मैरिंगो एशिया हॉस्पिटल्स के उस बड़े विज़न के अनुरूप है, जिसमें क्लिनिकल उत्कृष्टता को सामुदायिक पहुंच के साथ जोड़ा जाता है। विशेषज्ञों के नेतृत्व में होने वाली बातचीत को रिहायशी इलाकों के लोगों तक सीधे पहुंचाकर, अस्पताल का लक्ष्य जागरूकता, विश्वास और निवारक देखभाल की संस्कृति को बढ़ावा देना है।

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