जीवन बीमा में अंतर को कम करना : जागरुकता को कार्रवाई में बदलकर ग्राहकों को सशक्‍त बनाना ; अमित झिंगरान एंड पराग राजा

Edited By Gaurav Tiwari, Updated: 30 Aug, 2025 05:51 PM

bridging the life insurance gap empowering consumers by turning awareness

अमित झिंगरान एंड पराग राजा, मेंबर, इंश्योरेंस अवेयरनेस कमिटी (IAC-Life) के मुताबिक  2024 में किए गए एक राष्ट्रव्यापी सर्वेक्षण से पता चला कि 57% उपभोक्ताओं के लिए जीवन बीमा सबसे महत्वपूर्ण वित्तीय साधन है।

 गुड़गांव ब्यूरो : अमित झिंगरान एंड पराग राजा, मेंबर, इंश्योरेंस अवेयरनेस कमिटी (IAC-Life) के मुताबिक  2024 में किए गए एक राष्ट्रव्यापी सर्वेक्षण से पता चला कि 57% उपभोक्ताओं के लिए जीवन बीमा सबसे महत्वपूर्ण वित्तीय साधन है। सर्वे में यह भी सामने आया कि वित्तीय उत्पाद चुनते समय 72% लोगों ने जीवन बीमा को प्राथमिकता दी, इसके बाद फिक्स्ड डिपॉजिट (45%) और स्वास्थ्य बीमा (32%) रहे। यह आंकड़े जीवन बीमा के प्रति बढ़ती जागरूकता को दर्शाते हैं। इसके बावजूद, स्विस रे (2023) की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में विश्व का सबसे बड़ा सुरक्षा अंतर 17 ट्रिलियन डॉलर का है, जिसमें 83% लोग पर्याप्त जीवन बीमा कवरेज से वंचित हैं। यानी लोग मानते तो हैं कि जीवन बीमा जरूरी है, लेकिन इसे खरीदने को प्राथमिकता नहीं देते। साफ है कि जागरूकता और कार्रवाई के बीच एक बड़ा अंतर मौजूद है।

 

धारणा और सुरक्षा का अंतर

इस स्थिति के कई कारण हैं। सबसे पहले, बहुत से लोग जीवन बीमा को तत्काल जरूरी नहीं मानते और निर्णय को टालते रहते हैं। लेकिन किसी अप्रत्याशित घटना की स्थिति में पर्याप्त कवर न होना परिवार को आर्थिक रूप से असुरक्षित कर सकता है। इसके अलावा, यह भी गलत धारणा है कि जीवन बीमा केवल मृत्यु के बाद भुगतान के लिए एक सीमित उद्देश्य वाला उत्पाद है। आज के डिजिटल दौर में एक और बड़ी चुनौती है सूचनाओं की अधिकता, जिससे उपभोक्ताओं में निर्णय लेने की थकान होती है। उत्पादों के प्रचार, आंकड़ों और ढेर सारी जानकारी की बौछार उपभोक्ताओं को अक्सर उलझन और हिचकिचाहट में डाल देती है। लागत भी उपभोक्ताओं की प्रमुख चिंता है। हालांकि हकीकत यह है कि उम्र बढ़ने के साथ प्रीमियम बढ़ता है और जल्दी बीमा लेने पर प्रीमियम काफी कम रहता है। देर से बीमा लेने पर न सिर्फ प्रीमियम ज्यादा देना पड़ता है, बल्कि जोखिम भी बढ़ जाता है। आज उद्योग द्वारा लगातार नवाचार किए जा रहे हैं और उत्पादों को सरल बनाया जा रहा है, जिससे अलग-अलग कीमतों पर अनुकूलित समाधान उपलब्ध हो रहे हैं।

 

लोग अक्सर यह समझ नहीं पाते कि जीवन बीमा सिर्फ सुरक्षा का साधन नहीं बल्कि एक बहुआयामी वित्तीय उपकरण है। यह रिटायरमेंट की योजना बनाने, बचत की सुरक्षा करने, संपत्ति को सुरक्षित रखने और बच्चों की शिक्षा या घर खरीदने जैसे बड़े लक्ष्यों को पूरा करने में मदद करता है। जीवन बीमा पॉलिसीधारक के जीवन के हर चरण में उसके साथ विकसित होता है और सुरक्षा, स्थिरता व समर्थन प्रदान करता है। जीवन बीमा की पहुंच सामाजिक-आर्थिक असमानता को भी कम करने में मदद कर सकती है। यह घरों को वित्तीय सुरक्षा प्रदान कर उन्हें एक सुरक्षित आधार देता है, जिससे वे अपने वित्तीय लक्ष्यों को पूरा कर सकें और सामाजिक असमानता घटे। सच यह है कि जीवन बीमा सिर्फ वित्तीय सुरक्षा ही नहीं देता, बल्कि यह बचत, धन निर्माण, बच्चों की योजनाओं और रिटायरमेंट पॉलिसी जैसे निवेश विकल्प भी प्रदान करता है। जागरूकता और कार्रवाई के बीच की दूरी को कम करने के लिए उत्पाद संचार को सरल बनाना, वित्तीय साक्षरता को बढ़ाना और ऐसा डिजिटल ढांचा तैयार करना जरूरी है, जिससे जीवन बीमा खरीदना सहज और आसान हो। साथ ही, सभी चैनलों और उपभोक्ता वर्गों में यह संदेश बार-बार दोहराना होगा कि जीवन बीमा आपके और आपके प्रियजनों के सपनों, आकांक्षाओं और भविष्य की रक्षा करता है।

 

उद्योग की मजबूत साख

जीवन बीमा क्षेत्र की स्थिरता, लचीलापन और भारत की वित्तीय व्यवस्था में इसके योगदान पर जोर देना भी आवश्यक है। आईआरडीएआई के 2023-24 के बीमा सांख्यिकी हैंडबुक के अनुसार, 30 दिनों के भीतर दावों के निपटान का अनुपात 96.82% रहा। पर्सिस्टेंसी दर—जो यह मापती है कि कितने पॉलिसीधारक अपनी योजनाओं को जारी रखते हैं—लगातार सुधर रही है। वित्त वर्ष 2024 तक जीवन बीमा कंपनियों द्वारा एकत्र किए गए प्रीमियम का लगभग 45% केंद्रीय सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश किया गया, जिसकी कुल राशि 24.37 लाख करोड़ रुपये रही। यह तथ्य भारत के फाइनेंशियल इकोसिस्टम में जीवन बीमा उद्योग की महत्वपूर्ण भूमिका को स्पष्ट करता है। जीवन बीमा क्षेत्र की स्थिरता इस बात से भी साबित होती है कि कोविड-19 महामारी के दौरान वैध दावों का तुरंत निपटान किया गया। जिम्मेदारी और भरोसे के प्रति यह प्रतिबद्धता इस उद्योग के मूल्यों और क्षमताओं को उजागर करती है। स्पष्ट है कि जीवन बीमा वित्तीय नियोजन की आधारशिला है। यह हमारी कमाई को सुरक्षित करता है, भविष्य के लिए सुरक्षा कवच प्रदान करता है और परिवारों को आश्वस्त करता है। इसलिए यह विचार कि जीवन बीमा निवेश की दिशा में पहला कदम होना चाहिए, समाज में व्यापक रूप से स्वीकार और प्रचारित किया जाना आवश्यक है। इसमें कोई संदेह नहीं है कि जीवन बीमा के प्रति जागरूकता में लगातार वृद्धि हो रही है और वित्तीय सुरक्षा की इच्छा भी मजबूत हो रही है। सामूहिक और सजग प्रयास भारतीयों को इस जागरूकता को समय पर और समझदारी से कार्रवाई में बदलने के लिए प्रेरित कर सकते हैं, ताकि उनका वित्तीय भविष्य सुरक्षित हो सके।

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