हरियाणा के पहले आईएएस व पूर्व मंत्री डॉ. के. आर. पूनिया को पहली बरसी पर श्रद्धांजलि

Edited By Deepak Kumar, Updated: 18 Jan, 2026 01:36 PM

tributes paid to haryana s first ias officer and former minister dr k r poon

हरियाणा के प्रशासनिक, राजनीतिक और सामाजिक इतिहास में डॉ. कृपाराम पूनिया का नाम विशेष सम्मान के सा

हरियाणा डेस्क : हरियाणा के प्रशासनिक, राजनीतिक और सामाजिक इतिहास में डॉ. कृपाराम पूनिया का नाम विशेष सम्मान के साथ स्मरण किया जाता है। वे न केवल हरियाणा के पहले आईएएस अधिकारी थे, बल्कि ऐसे विरल व्यक्तित्व भी थे जिन्होंने सामाजिक, प्रशासनिक, सहकारिता और राजनीतिक क्षेत्रों में अपने कार्यों से स्थायी छाप छोड़ी। 

डॉ. कृपाराम पूनिया का जीवन सादगी, अनुशासन और कर्तव्यनिष्ठा का अनुपम उदाहरण रहा। उच्चतम प्रशासनिक पदों पर पहुंचने के बाद भी उनका रहन-सहन अत्यंत सामान्य रहा। वे मानते थे कि अधिकारी का सम्मान उसके पद से नहीं, बल्कि उसके आचरण, निर्णयों की निष्पक्षता और समाज के प्रति उसकी प्रतिबद्धता से तय होता है। यही कारण है कि प्रशासनिक सेवा में रहते हुए उन्होंने कभी दबाव या प्रभाव को अपने कर्तव्यों पर हावी नहीं होने दिया।

डॉ. पूनिया का निधन पिछले वर्ष 2025 में आज ही के दिन 89 वर्ष की आयु में हुआ। उनके जाने से न केवल राजनीति बल्कि समाज ने एक ऐसे मार्गदर्शक को खो दिया, जिसकी भरपाई करना कठिन है। वे कृषक और कमेरा समाज के सशक्त पैरोकार थे। उनका जन्म 1 जनवरी 1936 को तत्कालीन रोहतक जिले के साल्हावास गांव में श्री पूर्णचंद पूनिया के घर हुआ। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा गांव के विद्यालय से प्राप्त की और आगे चलकर कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय से पीएचडी की उपाधि हासिल की। इसके साथ साथ उन्होंने रूसी भाषा और भूमि प्रबंधन में डिप्लोमा तथा एलएलबी की पढ़ाई भी की।

कठिन संघर्षों और प्रतिकूल परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने 1963 में यूपीएससी परीक्षा पास कर आईपीएस रैंक प्राप्त किया ।लेकिन उनका लक्ष्य आईएएस बनकर जनसेवा करना था। उन्होंने पुनः यूपीएससी परीक्षा उत्तीर्ण की और 1964 बैच के आईएएस अधिकारी बने। यद्यपि उस समय उनका चयन आईएफएस में था, फिर भी उन्होंने आईएएस को प्राथमिकता देते हुए अपना होम कैडर पंजाब चुना और फिर 1966 में हरियाणा बनने पर अपने प्रदेश हरियाणा में सेवाएं देने की प्राथमिकता तय की। इस प्रकार से वे हरियाणा में ही जन्मे प्रदेश के पहले आईएएस अधिकारी बने।

प्रशासनिक सेवा के दौरान उन्होंने सीमांत किसानों, गरीबों और दलित वर्गों के लिए अनेक कल्याणकारी योजनाएं तैयार कीं। उन्हें हरियाणा में सहकारिता आंदोलन का जनक माना जाता है। रजिस्ट्रार कोऑपरेटिव सोसायटी के रूप में उन्होंने प्राथमिक कृषि सहकारी समितियों का गठन कर छोटे और गरीब किसानों के लिए बैंकों से ऋण के रास्ते खोले। इसका परिणाम यह हुआ कि हरियाणा के किसानों ने हरित क्रांति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

डॉ. पूनिया में कुशल प्रशासक, दूरदर्शी राजनेता और प्रभावी सामाजिक संगठक तीनों गुण समाहित थे। इन्हीं क्षमताओं से प्रभावित होकर किसान मसीहा और पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी देवीलाल उन्हें 1986 में राजनीति में लेकर आए और अपनी पार्टी जनता दल में शामिल किया। इसके बाद डॉ. पूनिया ने बड़ौदा (सोनीपत) विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ा और उस समय हरियाणा में सर्वाधिक मतों से विजयी होकर विधानसभा पहुँचे। देवीलाल मंत्रिमंडल में वे उद्योग मंत्री बने। उनके कार्यकाल में लागू औद्योगिक नीतियों और प्रोत्साहन कार्यक्रमों के कारण हरियाणा का औद्योगिक विकास नई ऊँचाइयों पर पहुंचा, जिसकी बदौलत आज राज्य ऑटोमोबाइल उत्पादन के क्षेत्र में देश में अग्रणी है।

चौधरी देवीलाल डॉ. कृपाराम पूनिया को अपार सम्मान और स्नेह देते थे। वे नीतियों और निर्णयों में उनकी सूझबूझ पर पूर्ण विश्वास रखते थे। इसका उदाहरण 1989 की खेड़ी मसानिया (जींद) गांव की घटना है, जब कुछ लोगों द्वारा खेड़ी मसानिया जाने का विरोध किए जाने पर डॉ. पूनिया ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। बाद में चौधरी देवीलाल ने उन्हें मनाया और स्वयं गांव पहुंचकर रविदास भवन का उद्घाटन और रविदास मंदिर का शिलान्यास किया।

इसी तरह तत्कालीन कुरुक्षेत्र जिले के गांव गुहना (अब कैथल) में डेरा भूमि को लेकर उपजे विवाद में चौधरी देवीलाल और डॉ. पूनिया की समझदारी से दलित परिवारों को वैकल्पिक भूमि देकर बरवाला के पास एक नया गांव बसाया गया, जिसका नाम “देवीगढ़-पूनिया” रखा गया। इससे सामाजिक समरसता को मजबूती मिली और प्रदेश में एक सकारात्मक संदेश गया।

डॉ. कृपाराम पूनिया मैं भारतीय प्रशासनिक सेवा में आने के बाद अपने परिवार, रिश्तेदारों और अन्य युवाओं को भी शिक्षा के लिए प्रेरित किया। उनके भाई डॉ. पी.एल. पूनिया उत्तर प्रदेश कैडर के आईएएस अधिकारी बने और आज राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय हैं। अन्य परिजनों ने भी प्रशासनिक सेवाओं में स्थान पाया। वे युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत बने और उनके बाद ही हरियाणा में आईएएस बनने की ललक व्यापक रूप से देखने को मिली। प्रशासक और राजनेता के रूप में डॉ. केआर पूनिया ने जिस निष्ठा से प्रदेश और समाज की जिम्मेदारियों का निर्वहन किया, वही उन्हें एक अनथक योद्धा बनाता है। आज हरियाणा का कृषक, गरीब और दलित समाज उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित कर रहा है।
 

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