“माटी की खुशबू म्हारे गांव की…” चार दिवसीय ‘रागिनी उत्सव-26’ का दूसरा दिन, कलाग्राम में उमड़े रागिनी प्रेमी

Edited By Krishan Rana, Updated: 13 Mar, 2026 08:53 PM

the fragrance of the soil of my village  on the second day of the four day ra

संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार के अधीन नॉर्थ ज़ोन कल्चरल सेंटर (एनज़ेडसीसी) द्वारा आयोजित चार

चंडीगढ़ (चन्द्र शेखर धरणी): संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार के अधीन नॉर्थ ज़ोन कल्चरल सेंटर (एनज़ेडसीसी) द्वारा आयोजित चार दिवसीय ‘रागिनी उत्सव-26’ के दूसरे दिन कलाग्राम का ओपन-एयर थिएटर कार्यक्रम शुरू होने से पहले ही दर्शकों से खचाखच भर गया।

कार्यक्रम में चंडीगढ़ नगर निगम की डिप्टी मेयर सुमन शर्मा मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं, जबकि पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के संयुक्त निदेशक और संस्कार भारती (उत्तर भारत) के प्रमुख नवीन शर्मा विशिष्ट अतिथि रहे। कार्यक्रम की शुरुआत मंथन आर्ट एंड थिएटर सोसायटी, चंडीगढ़ द्वारा प्रस्तुत नुक्कड़ नाटक “प्लास्टिक हटाओ, पर्यावरण बचाओ” से हुई। इस नाटक के माध्यम से लोगों को स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करने का संदेश दिया गया।

इसके बाद कार्यक्रम संगीतमय हो गया, जब प्रसिद्ध रागिनी गायक ओम प्रकाश बाली शर्मा और उनकी टीम ने मंच संभाला। उन्होंने अपनी लोकप्रिय रागिनी “धरती हरियाणा की वीरों की, यो धरम-करम की थाती से…” जैसी प्रस्तुतियों से दर्शकों की खूब सराहना बटोरी। इसके बाद रागिनी गायक सतवीर (कैप्टन बिशनिया) और उनकी पार्टी ने एक के बाद एक शानदार प्रस्तुतियां देकर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। उनकी रचनाओं में बेटा-बेटी को समान मानने का सामाजिक संदेश भी प्रमुखता से दिखाई दिया।

शाम के मुख्य आकर्षण सोमवीर और उनकी टीम रहे, जिन्होंने एक घंटे से अधिक समय तक अपनी दमदार प्रस्तुतियों से माहौल को जीवंत बनाए रखा। उन्होंने हरियाणवी परंपरा और सामाजिक मूल्यों पर आधारित रागिनी “माटी की खुशबू म्हारे गांव की…” प्रस्तुत कर दर्शकों का दिल जीत लिया। उनकी रागिनी “बेटा-बेटी एक समान, यो संदेश जगाना से…” पर दर्शकों ने खूब तालियां बजाईं।

कल (14 मार्च) रागिनी कलाकार इंदरजीत (कुंडियां), सोनू भगना और नरेंद्र डांगी अपनी प्रस्तुतियां देंगे। उत्सव प्रतिदिन शाम 5 बजे से शुरू होता है और इसमें दर्शकों के लिए प्रवेश निःशुल्क रखा गया है। एनज़ेडसीसी के निदेशक मोहम्मद फुरकान खान ने कहा कि इस उत्सव का मुख्य उद्देश्य हरियाणवी लोककला और संस्कृति को बढ़ावा देना तथा नई पीढ़ी को अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से जोड़ना है। 

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