Women Day Special: 'द गर्ल्स रिवेंज' डॉक्यूमेंटरी में सुनील जागलान की क्रांतिकारी लड़ाई दिखी वैश्विक पटल पर

Edited By Isha, Updated: 07 Mar, 2026 09:14 PM

sunil jaglan s revolutionary fight on the global stage in the documentary

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर वैश्विक मंच पर फ्रांसीसी चैनल आरते फ्रांस द्वारा रिलीज की गई डॉक्यूमेंटरी "द गर्ल्स रिवेंज" ने दुनिया का ध्यान खींच लिया है। यह फिल्म भारत और चीन में लिंग अनुपात

जींद: अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर वैश्विक मंच पर फ्रांसीसी चैनल आरते फ्रांस द्वारा रिलीज की गई डॉक्यूमेंटरी "द गर्ल्स रिवेंज" ने दुनिया का ध्यान खींच लिया है। यह फिल्म भारत और चीन में लिंग अनुपात की विकृति, कन्या भ्रूण हत्या और लड़कियों के प्रति सदियों पुरानी संकीर्ण सोच को बेनकाब करती है। लेकिन सबसे खास बात यह है कि इसमें एक ऐसे व्यक्ति की कहानी है, जिसने अकेले दम पर इस अंधकार को चुनौती दी और वैश्विक स्तर पर बदलाव की लहर पैदा की—वह हैं हरियाणा के बीबीपुर गांव के पूर्व सरपंच और अब वैश्विक सामाजिक सुधारक सुनील जगलान।

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डॉक्यूमेंटरी में दिखाया गया है कि कैसे सुनील जगलान ने ग्रामीण भारत की पितृसत्तात्मक व्यवस्था को झकझोरते हुए लड़कियों को सशक्त बनाने का अभूतपूर्व अभियान चलाया। उन्होंने गांव-गांव में बालिका पंचायतें गठित कीं, जिनके माध्यम से लड़कियां न केवल नेतृत्व सीख रही हैं, बल्कि अपने गांव में कन्या भ्रूण हत्या को रोकने की जिम्मेदारी भी ले रही हैं। इन बालिका पंचायतों ने न सिर्फ लड़कियों की आवाज को मजबूत किया, बल्कि पूरे समाज की सोच में क्रांतिकारी बदलाव लाया।

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फिल्म में जगलान के सबसे चर्चित अभियान "सेल्फी विद डॉटर" को भारत के सबसे प्रभावशाली सामाजिक आंदोलनों में से एक के रूप में चित्रित किया गया है। 2015 में बीबीपुर से शुरू हुआ यह अभियान आज 70 से अधिक देशों में फैल चुका है। इसमें माता-पिता अपनी बेटियों के साथ सेल्फी लेकर सोशल मीडिया पर साझा करते हैं, जिससे बेटियों के प्रति सकारात्मक नजरिया मजबूत होता है। डॉक्यूमेंटरी में विशेष रूप से दिखाया गया है कि चीन में भी यह अभियान जोर-शोर से अपनाया जा रहा है, जहां लोग लंबे समय से बेटियों के प्रति प्रेम और सम्मान व्यक्त करने के लिए सेल्फी साझा कर रहे हैं।

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फिल्म में सुनील जगलान की बेटियां नंदिनी जगलान और याचिका जगलान को भी प्रमुखता से दिखाया गया है। दोनों अब खुद सामाजिक कार्यकर्ता बन चुकी हैं और पिता के दिखाए रास्ते पर चलकर समाज में बदलाव ला रही हैं। यह दृश्य दर्शाता है कि जगलान का संघर्ष केवल व्यक्तिगत नहीं, बल्कि पारिवारिक और पीढ़ीगत स्तर पर भी फैल रहा है।

यह डॉक्यूमेंटरी तीन महीने पहले फ्रांस की पूरी टीम द्वारा भारत और चीन के विभिन्न स्थानों पर फिल्माई गई थी। इसमें भारत-चीन की समान सामाजिक चुनौतियों को एक साथ रखकर दिखाया गया है और जागलान के प्रयासों को दोनों देशों के लिए प्रेरणा स्रोत बताया गया है। इससे पहले भी जगलान पर "सन राइज" डॉक्यूमेंटरी बनी थी, जिसे भारत के राष्ट्रपति द्वारा राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार से सम्मानित किया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी "मन की बात" में कई बार "सेल्फी विद डॉटर" की सराहना की और इसे बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान का मजबूत हिस्सा बताया।

"द गर्ल्स रिवेंज" जागलान को एक सच्चे वैश्विक सुधारक के रूप में स्थापित करती है—एक ऐसा योद्धा जो छोटे से गांव से निकलकर दुनिया की सोच बदल रहा है। यह फिल्म न केवल समस्या दिखाती है, बल्कि समाधान का रास्ता भी बताती है। जगलान की यह जीत अब सिर्फ भारत की नहीं, बल्कि पूरी दुनिया की बेटियों की जीत बन चुकी है। दुनिया भर में इस डॉक्यूमेंटरी की तारीफ हो रही है, और सुनील जगलान का नाम अब एक प्रेरणा बनकर उभर रहा है—जो साबित करता है कि एक व्यक्ति की दृढ़ इच्छाशक्ति से समाज और दुनिया बदल सकती है।
 
 

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