गए थे गैंगस्टर की प्रॉपर्टी मिट्टी में मिलाने, स्टे ऑर्डर देख निकाला रास्ता, फिर सील कर लौटी टीम

Edited By Pawan Kumar Sethi, Updated: 05 Jan, 2026 07:10 PM

police and administration sealed gangster property

गैंगस्टर की प्रॉपर्टी को मिट्टी में मिलाने गई पुलिस और प्रशासनिक टीम को नगर निगम अधिकारियों की लापरवाही के कारण मुंह की खानी पड़ी। जिस प्रॉपर्टी को धवस्त किए जाने की आज कार्रवाई की जानी थी उस प्रॉपर्टी पर गैंगस्टर के भाई ने कोर्ट से स्टे ले लिया...

गुड़गांव, (ब्यूरो): गैंगस्टर की प्रॉपर्टी को मिट्टी में मिलाने गई पुलिस और प्रशासनिक टीम को नगर निगम अधिकारियों की लापरवाही के कारण मुंह की खानी पड़ी। जिस प्रॉपर्टी को धवस्त किए जाने की आज कार्रवाई की जानी थी उस प्रॉपर्टी पर गैंगस्टर के भाई ने कोर्ट से स्टे ले लिया जिसकी जानकारी नगर निगम के अधिकारियों ने न तो पुलिस को दी और न ही प्रशासनिक अधिकारियों को दी। जब प्रशासनिक टीम ने अपनी फजीहत होते देखा तो करीब एक घंटे तक कोर्ट के स्टे ऑर्डर के साथ मंथन करने के बाद नगर निगम के प्रॉपर्टी टैक्स बकाया होने की बात कहकर संपत्ति को सील कर दिया। इसके साथ ही अधिकारियों ने यह भी कहा कि इस प्रॉपर्टी का कमर्शियल उपयोग भी हो रहा है जबकि यह प्रॉपर्टी रिहायशी प्रॉपर्टी है। 

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एसीपी अभिलक्ष जोशी ने बताया कि गैंगस्टर सुनील उर्फ तोता पर हत्या, हत्या के प्रयास सहित अन्य कई संगीन धाराओं के तहत 35 मुकदमें दर्ज हैं। वह फिलहाल भोंडसी जेल में बंद है। ऐसे अपराधियों की आर्थिक रूप से कमर तोड़ने के लिए पुलिस की तरफ से कार्रवाई की जा रही है। सुनील उर्फ तोता की गांव धनवापुर, सूरत नगर और बजघेड़ा में प्रॉपर्टी को पुलिस ने चिन्हित किया है। यह प्रॉपर्टी अपराध से अर्जित आय से बनाई गई है। ऐसे में इस प्रॉपर्टी को पुलिस और प्रशासन ने मिलकर ध्वस्त करने की कार्रवाई करनी थी। इस कार्रवाई के लिए ड्यूटी मजिस्ट्रेट के तौर पर जीएमडीए के नोडल अधिकारी आर एस बाठ को लगाया गया। जब टीम 100 से ज्यादा पुलिसकर्मियों सहित जेसीबी मशीन को लेकर यहां पहुंची तो सुनील उर्फ तोता का भाई व पूर्व पार्षद नवीन दहिया मौके पर मिला। 

 

पुलिस और प्रशासनिक दस्ता अभी तोड़फोड़ कार्रवाई शुरू कर पाता उससे पहले ही नवीन दहिया ने कोर्ट का स्टे ऑर्डर टीम को दिखा दिया। नवीन दहिया ने प्रशासनिक अधिकारियों को बताया कि इस प्रॉपर्टी पर कोर्ट में केस विचाराधीन है जिस पर कोर्ट ने ध्वस्त करने पर रोक लगाई हुई है। मामले में अगली सुनवाई 15 जनवरी को बताई जा रही है। वहीं, मामले में ड्यूटी मजिस्ट्रेट ने पहले कोर्ट के आदेशों की सत्यता की जांच की और नगर निगम के अधिकारियों से भी इस बारे में पूछा। करीब एक घंटे की जांच के दौरान पाया गया कि कोर्ट आदेश के कारण इस प्रॉपर्टी को ध्वस्त नहीं कर सकते। टीम को बैरंग लौटते देख अधिकारियों ने अपनी फजीहत होते देखा और कुछ न कुछ एक्शन लेने के लिए रास्ता निकालने लगे।

 

काफी प्रयास के बाद पता लगा कि नगर निगम का टैक्स व अन्य बकाया इस प्रॉपर्टी पर है। जब यह प्रॉपर्टी वह ध्वस्त नहीं कर सकते, लेकिन बकाया वसूलने के लिए वह प्रॉपर्टी को सील कर सकते हैं। ऐसे में नगर निगम एक्ट के तहत इस प्रॉपर्टी को सील कर दिया गया। अधिकारियों ने बताया कि यहां ग्राउंड फ्लोर पर ऑनलाइन ग्रोसरी डिलीवरी कंपनी को रेंट पर दिया गया था जबकि पहली मंजिल पर कमरे बनाकर किराए पर दिए गए थे। इस पर टीम ने पहली मंजिल को खाली करा दिया जबकि ग्राउंड फ्लोर को ग्रोसरी सामान के साथ ही सील कर दिया। अधिकारियों की मानें तो यह भी जांचा जा रहा है कि क्या इस प्रॉपर्टी में कमर्शियल एक्टिविटी करने के लिए सीएलयू कराया गया था या नहीं। इसके अलावा अन्य कमियों पर भी एक्शन लिया जा रहा है।

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