घुटने के दर्द के आधुनिक उपचार में नई उम्मीद: COOC-2026 में डॉ. प्रदीप अग्रवाल ने साझा किया स्टेम सेल थेरेपी का अनुभव

Edited By Krishan Rana, Updated: 02 Aug, 2026 06:56 PM

new hope in modern knee pain treatment dr pradeep agarwal shares stem cell the

देश के जाने-माने नी एवं हिप रिप्लेसमेंट विशेषज्ञ डॉ. प्रदीप अग्रवाल ने पुणे में आयोजित सीओओसी  2026 में राष्ट्रीय संकाय सदस्य

चंडीगढ़ (चन्द्र शेखर धरणी): देश के जाने-माने नी एवं हिप रिप्लेसमेंट विशेषज्ञ डॉ. प्रदीप अग्रवाल ने पुणे में आयोजित सीओओसी  2026 में राष्ट्रीय संकाय सदस्य (नेशनल फैकल्टी) के रूप में भाग लेते हुए ऑस्टियोआर्थराइटिस के उपचार में स्टेम सेल एवं ऑर्थोबायोलॉजिकल उपचारों पर अपने नैदानिक अनुभव प्रस्तुत किए। उन्होंने बताया कि आधुनिक पुनर्योजी (रीजेनेरेटिव) चिकित्सा तकनीकें घुटनों के शुरुआती और मध्यम स्तर के ऑस्टियोआर्थराइटिस के मरीजों के लिए नई संभावनाएं लेकर आई हैं।

ऑस्टियोआर्थराइटिस बना घुटने के दर्द का सबसे बड़ा कारण
डॉ. प्रदीप अग्रवाल ने अपने व्याख्यान में कहा कि आज के समय में घुटनों के दर्द का सबसे प्रमुख कारण ऑस्टियोआर्थराइटिस है, जिसमें उम्र बढ़ने के साथ जोड़ों की गद्दी (कार्टिलाज) धीरे-धीरे घिसने लगती है। इसके अलावा खेलकूद, दुर्घटनाओं या अन्य कारणों से लिगामेंट एवं मेनिस्कस की चोट तथा बढ़ता मोटापा भी घुटनों की समस्या को गंभीर बना रहा है।
उन्होंने बताया कि मोटापे के कारण घुटनों पर लगातार अतिरिक्त भार पड़ता है, जिससे जोड़ों का क्षरण तेज हो जाता है और मरीजों को चलने-फिरने में कठिनाई होने लगती है।

स्टेम सेल थेरेपी पर साझा किए नैदानिक अनुभव
सम्मेलन में डॉ. अग्रवाल ने स्टेम सेल एवं ऑर्थोबायोलॉजिकल उपचारों के अपने क्लीनिकल अनुभव प्रस्तुत करते हुए बताया कि इन आधुनिक तकनीकों का उद्देश्य क्षतिग्रस्त ऊतकों के उपचार को बढ़ावा देना, सूजन कम करना तथा जोड़ों की कार्यक्षमता को बेहतर बनाए रखना है।
उन्होंने कहा कि स्टेम सेल आधारित उपचार शरीर की प्राकृतिक उपचार क्षमता को सक्रिय करने का प्रयास करते हैं। यह तकनीक विशेष रूप से उन मरीजों में लाभकारी साबित हो सकती है, जिनमें ऑस्टियोआर्थराइटिस शुरुआती या मध्यम अवस्था (ग्रेड-2 और ग्रेड-3) में है।

ग्रेड-2 और ग्रेड-3 मरीजों में बेहतर परिणामों की उम्मीद
डॉ. प्रदीप अग्रवाल के अनुसार, वर्तमान में स्टेम सेल थेरेपी पर लगातार वैज्ञानिक अध्ययन चल रहे हैं। उपलब्ध नैदानिक अनुभवों से यह संकेत मिलता है कि ग्रेड-2 एवं ग्रेड-3 ऑस्टियोआर्थराइटिस के मरीजों में इससे दर्द कम करने, सूजन नियंत्रित करने और जीवन की गुणवत्ता बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि इस क्षेत्र में अभी भी व्यापक शोध जारी है और उपचार का चयन प्रत्येक मरीज की स्थिति के अनुसार किया जाना चाहिए।

गंभीर अवस्था में घुटना प्रत्यारोपण ही सर्वोत्तम विकल्प
डॉ. अग्रवाल ने कहा कि जिन मरीजों में घुटने की हड्डियां पूरी तरह आपस में रगड़ने लगती हैं और कार्टिलाज लगभग समाप्त हो जाता है, जिसे सामान्य भाषा में 'बोन-ऑन-बोन' स्थिति कहा जाता है, वहां स्टेम सेल थेरेपी प्रभावी नहीं होती। ऐसे मामलों में नी रिप्लेसमेंट सर्जरी ही सबसे सुरक्षित और प्रभावी उपचार विकल्प माना जाता है।

समय पर जांच और सही उपचार है सबसे महत्वपूर्ण
उन्होंने लोगों से अपील की कि घुटनों के दर्द को सामान्य उम्र संबंधी समस्या समझकर नजरअंदाज न करें। शुरुआती लक्षण दिखाई देने पर विशेषज्ञ ऑर्थोपेडिक चिकित्सक से परामर्श लेकर समय पर उपचार शुरू किया जाए तो बीमारी की प्रगति को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।

डॉ. प्रदीप अग्रवाल ने कहा कि आधुनिक चिकित्सा में स्टेम सेल, ऑर्थोबायोलॉजिक्स और उन्नत सर्जिकल तकनीकों के संयोजन से मरीजों को बेहतर परिणाम देने की दिशा में लगातार कार्य किया जा रहा है, जिससे भविष्य में घुटनों की बीमारियों के उपचार के और भी प्रभावी विकल्प उपलब्ध होने की उम्मीद है।

 

Related Story

Trending Topics

img title
img title

Be on the top of everything happening around the world.

Try Premium Service.

Subscribe Now!