तीन दशक से अधिक की प्रशासनिक यात्रा का विराम: सेवानिवृत्त हुए वरिष्ठ आईएएस डॉ. वी. राजा शेखर वुंड्रू

Edited By Isha, Updated: 31 Jul, 2026 07:55 PM

culmination of an administrative journey spanning over three decades

हरियाणा सरकार के अतिरिक्त मुख्य सचिव (परिवहन) एवं 1990 बैच के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी डॉ. वी. राजा शेखर वुंड्रू शुक्रवार को सरकारी सेवा से सेवानिवृत्त हो गए। तीन दशक से अधिक लंबे प्रशासनिक जीवन

चंडीगढ़(चन्द्र शेखर धरणी):  हरियाणा सरकार के अतिरिक्त मुख्य सचिव (परिवहन) एवं 1990 बैच के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी डॉ. वी. राजा शेखर वुंड्रू शुक्रवार को सरकारी सेवा से सेवानिवृत्त हो गए। तीन दशक से अधिक लंबे प्रशासनिक जीवन में उन्होंने राज्य और केंद्र सरकार के कई महत्वपूर्ण विभागों का नेतृत्व करते हुए सुशासन, पारदर्शिता और परिणाम आधारित प्रशासन की मजबूत पहचान बनाई। प्रशासनिक जिम्मेदारियों के साथ-साथ उन्होंने लेखन और बौद्धिक विमर्श के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय योगदान दिया।

प्रशासनिक सेवा में तीन दशक से अधिक का अनुभव
आंध्र प्रदेश में 18 जुलाई 1966 को जन्मे डॉ. वुंड्रू ने उच्च शिक्षा के बाद संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की परीक्षा उत्तीर्ण कर 1990 बैच के आईएएस अधिकारी के रूप में हरियाणा कैडर जॉइन किया। अपने लंबे सेवाकाल में उन्होंने जिला प्रशासन से लेकर राज्य और केंद्र सरकार के अनेक महत्वपूर्ण पदों पर प्रभावी भूमिका निभाई।

कई अहम विभागों की संभाली जिम्मेदारी
डॉ. वुंड्रू ने हरियाणा सरकार में अतिरिक्त मुख्य सचिव (परिवहन), श्रम एवं रोजगार, आवास एवं हाउसिंग फॉर ऑल जैसे विभागों का नेतृत्व किया। इसके अलावा वे महिला एवं बाल विकास, सैनिक एवं अर्द्धसैनिक कल्याण, तकनीकी शिक्षा, कौशल विकास, पशुपालन, डेयरी तथा खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभागों में भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभा चुके हैं।फतेहाबाद और महेंद्रगढ़ के उपायुक्त के रूप में भी उन्होंने प्रशासनिक दक्षता का परिचय दिया। वहीं केंद्र सरकार में यूआईडीएआई (आधार), सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय, रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय तथा पशुपालन विभाग में भी उन्होंने महत्वपूर्ण दायित्व निभाए।

प्रशासन के साथ लेखन में भी बनाई पहचान
डॉ. वुंड्रू केवल एक सफल प्रशासक ही नहीं, बल्कि गंभीर लेखक और चिंतक भी रहे हैं। लोकतंत्र, सुशासन, नेतृत्व, सामाजिक न्याय और सार्वजनिक नीति जैसे विषयों पर उनके लेख और पुस्तकें व्यापक रूप से चर्चित रही हैं। उनका मानना रहा कि प्रभावी प्रशासन केवल योजनाएं बनाने तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि उसका लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचना चाहिए।

शिक्षा और शोध में भी उत्कृष्ट उपलब्धियां
उन्होंने स्नातकोत्तर अध्ययन के बाद एम.फिल. किया तथा नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी (बेंगलुरु) से पीएच.डी. की उपाधि प्राप्त की। उनका शोध डॉ. भीमराव आंबेडकर के निर्वाचन तंत्र और लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व से जुड़ा रहा, जो उनके सामाजिक और संवैधानिक चिंतन को भी दर्शाता है।

चार भाषाओं पर समान अधिकार
डॉ. वुंड्रू अंग्रेज़ी, हिंदी, तेलुगु और तमिल भाषाओं में दक्ष हैं। इसी कारण वे प्रशासनिक कार्यों के साथ-साथ विभिन्न मंचों पर प्रभावी वक्ता और लेखक के रूप में भी अपनी अलग पहचान स्थापित कर सके।

सुशासन और नवाचार के पक्षधर अधिकारी
अपने पूरे सेवाकाल में उन्होंने तकनीक आधारित प्रशासन, पारदर्शिता, जवाबदेही और नवाचार को बढ़ावा दिया। शिक्षा, महिला एवं बाल विकास, कौशल विकास, परिवहन और सामाजिक कल्याण जैसे क्षेत्रों में उनकी कई पहलें प्रशासनिक सुधारों के रूप में याद की जाएंगी। उन्हें उनके योगदान के लिए डॉ. आंबेडकर रत्न पुरस्कार सहित विभिन्न सम्मानों से भी सम्मानित किया जा चुका है।
सेवानिवृत्ति के साथ एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक अध्याय का समापन
डॉ. वी. राजा शेखर वुंड्रू की सेवानिवृत्ति के साथ हरियाणा प्रशासन का एक महत्वपूर्ण अध्याय समाप्त हुआ है। एक संवेदनशील प्रशासक, दूरदर्शी नीति-निर्माता और गंभीर लेखक के रूप में उनका योगदान लंबे समय तक याद किया जाएगा। उन्होंने यह स्थापित किया कि प्रभावी प्रशासन केवल शासन चलाने का माध्यम नहीं, बल्कि समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने का सशक्त साधन भी हो सकता है।
 

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