ओबीसी और दलित कार्ड के जरिये पंजाब में वैतरणी पार करने की रणनीति पर चल रहे हैं नायब सैनी

Edited By Manisha rana, Updated: 11 May, 2026 07:39 PM

nayab saini is working on a strategy to cross the vaitarani in punjab

बंगाल में फतह के बाद पंजाब में भी कमल खिलने में हरियाणा के सी एम नायब सिंह सैनी अब पंजाब में कमल खिलाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे न ही आगे छोड़ेंगे।

चंडीगढ़ (धरणी) : बंगाल में फतह के बाद पंजाब में भी कमल खिलने में हरियाणा के सी एम नायब सिंह सैनी अब पंजाब में कमल खिलाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे न ही आगे छोड़ेंगे।पंजाब में भी ओबीसी कार्ड और दलितों को साथ में लेकर वहां चले आ रहे जट्ट सिख सियासत को चुनौती देने की तैयारी है, इसके लिए भाजपा के सियासी दिग्गज रणनीति बनाकर फील्ड में निचले स्तर तक अभी से कार्यकर्ताओं को अलर्ट करने में जुटे हुए हैं।

सूत्रों का कहना है कि भारतीय जनता पार्टी पंजाब में 2027 विधानसभा चुनावों के लिए 'हरियाणा मॉडल' लागू करने की तैयारी में है। रणनीति के तहत जट्ट सिख वर्चस्व वाली पारंपरिक राजनीति को चुनौती देने के लिए पार्टी ओबीसी और दलित मतदाताओं को रिझाने के साथ ही निचले स्तर से लेकर ऊपर तक सोशल इंजीनियरिंग में जुटी हुई है। रविवार को सूबे के सीएम नायब सिंह सैनी ने कुछ पत्ते खोलते हुए ओबीसी समाज से एकजुट हो जाने की अपील की। अहम बात यह है कि पंजाब में  फतेह पाने के लिए फ्रंटलाइन पर हरियाणा के  मुख्यमंत्री नायब सैनी को जिम्मेदारी देकर फील्ड में उतारा गया है। सीएम  लगातार पंजाब में विजिट कर रहे हैं, कभी धार्मिक डेरों, मंदिरों और पुराने स्थलों पर जाते हैं, तो कभी धर्मगुरुओं से मुलाकात करना भी नहीं भूलते।

भाजपा 'हरियाणा मॉडल' रणनीति

पंजाब में सत्ता हासिल करने की चाबी हाथ में लेने के लिए भाजपा के सियासी दिग्गजों ने रणनीति में बड़ा बदलाव कर लिया है। गैर-जट्ट सिख और ओबीसी कार्ड के सहारे वैतरणी पार करने में  पंजाब प्रदेश के अंदर दलित वर्ग का भी बड़ी संख्या में वोट बैंक है, उसको साथ लेकर आगे बढ़ने और लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में काम शुरु हो गया है। पंजाब में वैसे भी सियासत जट्ट सिख नेताओं के इर्द-गिर्द पूरा सियासी घटनाक्रम घूमता है। लेकिन हरियाणा में कमल खिलाने और तीसरी बार सरकार बनाने के बाद में भाजपा नेताओं के हौसले बुलंद हैं । सूबे में करीब 30% से 38% हिस्सेदारी रखने वाले ओबीसी और दलित मतदाताओं को एकजुट करने का काम शुरु हो गया है। ओबीसी वर्ग से आने वाले मुख्यमंत्री सैनी को पंजाब के चुनावी प्रचार में सबसे आगे  रखकर शुरुआत की गई है।

हरियाणा के सीएम नायब सिंह सैनी दोनों प्रदेशों के रिश्तों और अपने रिश्तों के बारे में भी बताना नहीं भूलते  इसके साथ ही पंजाब में जाते समय उनकी 'पगड़ी डिप्लोमेसी' भी अच्छी खासी कारगर हो रही है। सैनी पंजाब दौरों के दौरान केसरी पगड़ी और पंजाबी भाषा में संवाद कर भावनात्मक जुड़ाव बनाने की सफल कोशिश कर रहे हैं। भाजपा के दिग्गजों ने साफ कर दिया है कि 2027 के पंजाब विधानसभा चुनाव में किसी भी पार्टी से गठबंधन नहीं होगा। भाजपा सभी 117 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ेगी। 

योजनाओं का प्रचार

हरियाणा के मुख्यमंत्री सैनी  पंजाब में प्रचार के दौरान  हरियाणा के 'सुशासन मॉडल' का जोर-शोर से प्रचार में जुटे हुए हैं।  किसानों के लिए कल्याणकारी योजनाएं और 24 फसलों पर एमएसपी देने का उदाहरण देकर पंजाब के किसानों को पंजाब में कमल खिलाने में सहयोग की अपील की जा रही है।  पंजाब के चुनावों के अब कुछ महीनों का वक्त ही बचा  होने के कारण भाजपा नेताओं ने सीमा से जुड़े राज्य में राजनीतिक पहुँच बढ़ा दी है।

सात माह में 70 से ज्यादा कार्यक्रमों में सैनी 

सात माह के अंदर सैनी को पंजाब में लगभग 70 कार्यक्रमों में हिस्सेदारी की है। जिसे एक रणनीति के हिस्से के तौर पर देखा जा रहा है। इस वक्त पार्टी के पास 117 सदस्यीय विधानसभा में केवल दो सीटें हैं। पार्टी का ध्यान पंजाब की लगभग 31% OBC आबादी को मुख्य हिस्सा बनाने वाली समुदायों के बीच समर्थन को मजबूत करने का प्रयास भी माना जा रहा है। इसमें सैनी और रामगढ़िया जैसे समूह शामिल हैं, जिनमें से कई सिख हैं। सैनी स्वयं ओबीसी समुदाय से हैं और पार्टी के शिरोमणि अकाली दल से अलग होने के बाद से पंजाब में भाजपा के सबसे प्रमुख चेहरों में से एक के रूप में उभरे हैं। अर्थात  'हरियाणा मॉडल' लागू करने के तहत ही सारी कवायद हो रही है। 

पंजाब में 117 सीटों को तीन प्रमुख श्रेणियों में बांटा 

शहरी और हिंदू बाहुल सीटें (40-45 सीटें)
यह भाजपा का पारंपरिक वोट बैंक रहा है। 
इन सीटों पर पार्टी का सीधा मुकाबला कांग्रेस और आम आदमी पार्टी (AAP) से है।
मुख्य क्षेत्र: लुधियाना, जालंधर, अमृतसर (शहरी), पटियाला, पठानकोट और अबोहर।
शहरी व्यापारियों, प्रवासी मतदाताओं (विशेष रूप से लुधियाना और जालंधर में पूर्वांचल समुदाय) और मध्यम वर्ग को साधने के लिए सीधे संपर्क अभियान चलाए जा रहे हैं। 
दलित और ओबीसी बहुल सीटें (34 आरक्षित + अन्य सीटें)
पंजाब में देश की सबसे अधिक (~32-38%) दलित आबादी है। 
दोआबा क्षेत्र (जालंधर, होशियारपुर, नवांशहर) को इसका केंद्र बनाया गया है।
पार्टी ने बसपा पारंपरिक वोट बैंक और रविदासिया/वाल्मीकि समुदाय में पैठ बनाने के लिए स्थानीय चेहरों को आगे बढ़ाया है।
ग्रामीण और पंथिक सीटें (35-40 सीटें)
हमेशा से भाजपा के लिए सबसे कमजोर रहा है। 
जट्ट सिख और किसान आंदोलन के प्रभाव को कम करने के लिए "पंथिक और सिख चेहरों" को आगे बढ़ाना।
मालवा क्षेत्र (बठिंडा, मानसा, संगरूर) और माझा के ग्रामीण इलाके।
हाल ही में दूसरी पार्टियों (AAP, कांग्रेस, अकाली दल) से भाजपा में आए बड़े सिख और ग्रामीण चेहरों को इन सीटों पर फ्रंटलाइन में रखा जाएगा। 
गृहमंत्री अमित शाह के हालिया दौरों और पार्टी अध्यक्ष नितिन नवीन की बैठकों के बाद पंजाब भाजपा में संगठनात्मक आत्मनिर्भरता पर काम हो रहा है।
माइक्रो-मैनेजमेंट और पन्ना प्रमुख: भाजपा हर विधानसभा सीट पर बूथ स्तर की कमेटियां और 'पन्ना प्रमुख' तैनात कर रही है। 
सिख चेहरों को प्राथमिकता: ग्रामीण सीटों पर पार्टी ने साफ किया है कि बाहरी नेताओं पर निर्भर रहने के बजाय जमीन से जुड़े और बेदाग छवि वाले सिख चेहरों को टिकट में प्राथमिकता दी जाएगी। 

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