Edited By Isha, Updated: 14 Feb, 2026 08:22 PM

केंद्रीय ऊर्जा एवं शहरी विकास मंत्री मनोहर लाल खट्टर जब 2014 में पहली बार प्रदेश के मुख्यमंत्री बने थे तो उस समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें सरकार चलाने के लिए चार महत्वपूर्ण टिप्स बताए थे।
नई दिल्ली (संजय अरोड़ा): केंद्रीय ऊर्जा एवं शहरी विकास मंत्री मनोहर लाल खट्टर जब 2014 में पहली बार प्रदेश के मुख्यमंत्री बने थे तो उस समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें सरकार चलाने के लिए चार महत्वपूर्ण टिप्स बताए थे। इस बात का खुलासा करते हुए स्वयं मनोहर लाल ने बताया कि 2014 में उन्हें हरियाणा का मुख्यमंत्री बनाया गया तो वे उस समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने पहुंचे। उस समय उन्हें मुख्यमंत्री बने हुए एक माह का समय हुआ था। मनोहर लाल के अनुसार उन्होंने प्रधानमंत्री से कहा कि जो दायित्व उन्हें दिया गया है, वे उस पर अवश्य काम करेंगे। मुख्यमंत्री क्या सोच कर बनाया गया है, इस बारे में तो स्पष्ट नहीं कह सकता हूं, लेकिन उनका इसमें कोई अनुभव नहीं है।
मनोहर लाल ने बताया कि उन्होंने तब प्रधानमंत्री से काम करने के बारे में पूछा। सरकार चलाने में कठिनाई न आए, इसके बार में भी बात की। तब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें कहा कि ‘आप तो विधायक बनकर के मुख्यमंत्री बने हैं और मैं जब गुजरात का मुख्यमंत्री बना था तो उस समय मैं विधायक भी नहीं था। मनोहर लाल के अनुसार तब प्रधानमंत्री मोदी ने उन्हें मूल मंत्र दिया था कि एक ही संकल्प, जो करना है लोकहित में करना है, जनहित में करना है, प्रदेश के हित में करना है, अपने आप सरकार चलानी आ जाएगी।’

ऐसे में तब प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में मैंने मुख्यमंत्री के रूप में काम किया। इस रोचक प्रसंग का जिक्र केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने शनिवार को नई दिल्ली में किया। केंद्रीय ऊर्जा एवं शहरी विकास मंत्री मनोहर लाल शनिवार को नई दिल्ली में नैशनल अर्बन एंड रियल एस्टेट डेवलपमैंट कॉनक्लेव-2026 को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने इस प्रसंग का जिक्र करने के पीछे बताया कि आज यहां प्रबुद्ध लोग बैठे हैं और इस फील्ड का अनुभव भी उन्हें ज्यादा है। ऐसे में आज का यह सम्मेलन उनके लिए किसी ट्यूशन क्लास से कम नहीं है।
मनोहर लाल खट्टर ने बताया कि जब वे मुख्यमंत्री बनने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिले थे तो उन्होंने सरकार चलाने के चार तरीके और अवसर बताए थे। मोदी ने उन्हें बताया कि पहला अवसर आता है, जब अच्छे व काबिल अधिकारी भी आपको प्रशासनिक कार्यों के संचालन में मदद करते हैं। दूसरे अवसर में जब आप जनता के बीच जाएंगे तो वहां से भी फीडबैक मिल जाएगा कि सरकार कैसे चलाई जाती है। ऐसे ही जब आप विधानसभा के सत्र में बैठेंगे तो वहां आपको विपक्ष के लोगों से भी मालूम होगा कि सरकार कैसे चलती है। चौथे अवसर में आपको मीडिया के लोग भी बता देंगे कि कहां कमी है, कहां नहीं है। केंद्रीय ऊर्जा मंत्री ने कहा कि सीखने की प्रवृत्ति आपको आगे बढ़ाती है। आज केंद्रीय मंत्री के रूप में उन्हें काम करते हुए करीब पौने दो साल हो गए हैं और अभी आगे काफी कुछ करना है।
शहरी चुनौती कोष को 1 लाख करोड़ की सहायता देने का हुआ फैसला
इसी प्रकार से केंद्रीय ऊर्जा एवं शहरी विकास मंत्री मनोहर लाल ने शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आयोजित केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में शिरकत की। बैठक में प्रधानमंत्री मोदी ने शहरी चुनौती कोष को अनुमोदन प्रदान किया। इसके तहत कुल एक लाख करोड़ रुपए की केंद्रीय सहायता दी जाएगी। परियोजना लागत का 25 प्रतिशत हिस्सा केंद्रीय सहायता के रूप में दिया जाएगा, बशर्ते परियोजना लागत का न्यूनतम 50 प्रतिशत हिस्सा बाजार से जुटाया जाए। इससे अगले पांच वर्षों में शहरी क्षेत्र में कुल चार लाख करोड़ रुपए का निवेश होगा, जो अनुदान आधारित वित्तपोषण से हटकर बाजार से जुड़े, सुधार-उन्मुख और परिणाम-उन्मुख अवसंरचना निर्माण की ओर भारत के शहरी विकास दृष्टिकोण में एक महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत है।
शहरी चुनौती कोष उच्च गुणवत्ता वाले शहरी बुनियादी ढांचे के निर्माण के लिए बाजार वित्त, निजी भागीदारी और नागरिक-केंद्रित सुधारों का लाभ उठाएगा। इस कोष का उद्देश्य लचीले, उत्पादक, समावेशी और जलवायु-अनुकूल शहरों का निर्माण करना है ताकि ये शहर देश के आर्थिक विकास के अगले चरण के प्रमुख चालक बन सकें। यह कोष वित्त वर्ष 2025-26 से वित्त वर्ष 2030-31 तक परिचालन में रहेगा, जिसकी कार्यान्वयन अवधि वित्त वर्ष 2033-34 तक बढ़ाई जा सकती है। यह बजट 2025-26 में घोषित सरकार के उस दृष्टिकोण को साकार करती है जिसके तहत शहरों को विकास केंद्र, शहरों के रचनात्मक पुनर्विकास और जल एवं स्वच्छता से संबंधित प्रस्तावों को लागू किया जाना है।
केंद्रीय मंत्री ने अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में की शिरकत
इससे पहले शुक्रवार को ही नैशनल हाऊसिंग बैंक और एशिया पैसिफिक यूनियन फॉर हाउसिंग फाइनैंस द्वारा नई दिल्ली के भारत मंडपम में दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया गया। भारत मंडपम में आयोजित आवास वित्त के बदलते परिदृश्य पर अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन के दूसरे दिन आवास और शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित हुए। सम्मेलन का मुख्य विषय समावेशिता, स्थिरता और सतत विकास था। अपने संबोधन में केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने आवास वित्त को प्रत्येक नागरिक के लिए अधिक सुलभ, किफायती और समावेशी बनाने के लिए सभी हितधारकों को एक साथ लाने के महत्व पर जोर दिया।
उन्होंने परिवहन से जुड़े आवास विकास और दूरदर्शी नीतिगत नवाचारों सहित एकीकृत शहरी नियोजन की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने विभिन्न स्थानों पर उपलब्ध आवासों के व्यापक आंकड़ों द्वारा समर्थित राष्ट्रीय आवास विनिमय जैसी व्यवस्था जैसे अभिनव समाधानों का पता लगाने का भी प्रस्ताव रखा, ताकि नागरिकों को उनके कार्यस्थलों के करीब उपयुक्त घरों की पहचान करने में मदद मिल सके और आवागमन के समय को कम करने के लिए पारस्परिक रूप से लाभकारी संपत्ति विनिमय को सुविधाजनक बनाया जा सके। उन्होंने नीति आयोग और गृह मंत्रालय द्वारा किए गए एक संयुक्त अध्ययन के निष्कर्षों पर प्रकाश डाला, जिसमें अनुमान लगाया गया था कि 2021 में भारत की शहरी आबादी 50 करोड़ थी और 2050 तक इसके 85 करोड़ से अधिक हो जाने का अनुमान है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इस जनसांख्यिकीय परिवर्तन से पूरे देश में किफायती आवास की मांग में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
केंद्रीय मंत्री ने मजबूत शहरी बुनियादी ढांचे के विकास का किया आह्वान
अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल ने आवास के लिए पारगमन-उन्मुख विकास मॉडल के माध्यम से मजबूत शहरी बुनियादी ढांचे के विकास का आह्वान किया, जिससे आवास अधिक सुलभ और टिकाऊ बन सके। इसके अलावा, उन्होंने बैंकों, आवास वित्त कंपनियों और राष्ट्रीय आवास बैंक सहित वित्तीय संस्थानों से देश भर में आवास भंडार का विस्तार करने के लिए सहयोग करने और अधिक ऋण सहायता प्रदान करने का आग्रह किया। अपने संबोधन के समापन में, उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दृष्टिकोण को दोहराते हुए कहा कि ‘यह सुनिश्चित करना कि प्रत्येक पात्र नागरिक को एक सम्मानजनक घर तक पहुंच प्राप्त हो, जो सभी के लिए आवास के प्रति सरकार की अटूट प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
इस कार्यक्रम में भारत सरकार, बहुपक्षीय संस्थानों, विश्व भर के संस्थानों, निजी इक्विटी कंपनियों और आवास वित्त कंपनियों के प्रतिष्ठित पेशेवरों और संसाधनों ने भाग लिया। यह सम्मेलन संवाद, ज्ञान के आदान-प्रदान और रणनीतिक सहयोग के लिए एक मंच के रूप में कार्य करता है, जो किफायती आवास और शहरी विकास में चुनौतियों और अवसरों का निर्माण करने के लिए भारत की प्रतिबद्धता की पुष्टि करता है।