Mahashivratri Special: जहाँ भोलेनाथ के 11 रूपों के एक साथ होते हैं दर्शन, जानें कैथल के इस मंदिर की कहानी

Edited By Isha, Updated: 11 Aug, 2026 12:27 PM

mahashivratri special where 11 forms of bholenath are seen together

कैथल के गयारह रुद्री शिव मंदिर में शिवरात्रि के अवसर पर सुबह से ही भक्तों की भीड़ लगी हुई है। इस मंदिर में भोलेनाथ के गयारह रुद्रों रूपों पर भक्त जलाभिषेक करके पूण्य कर्मों की प्राप्ति करते हैं। शिवरात्री पर

कैथल (जयपाल): कैथल के गयारह रुद्री शिव मंदिर में शिवरात्रि के अवसर पर सुबह से ही भक्तों की भीड़ लगी हुई है। इस मंदिर में भोलेनाथ के गयारह रुद्रों रूपों पर भक्त जलाभिषेक करके पूण्य कर्मों की प्राप्ति करते हैं। शिवरात्री पर यहाँ पूजा अर्चना का है विशेष महत्व. पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल यहाँ महारूद्र यज्ञ करवा चुके हैं। मुख्यमंत्री नायाब सैनी व कांग्रेस के रणदीप सुरजेवाला भी यहाँ आकर भोलेनाथ की पूजा अर्चना करते हैं।

पूरे भारत में एकमात्र गयारह रुद्री मंदिर जिसमे भगवान भोलेनाथ के गयारह रुद्रो के दर्शन होते हैं. महाभारत कालीन इस मंदिर को युद्ध पश्चात स्वयं भगवान कृष्ण ने पित्रों की शान्ति के लिए स्थापित किया था. अर्जुन ने भी भगवान भोलेनाथ की आराधना कर यहीं पर पाशुपत अस्त्र प्राप्त किया था।

पुजारी मुनीन्द्र मिश्रा ने कहा कि दूर दूर से भक्त यहां पूजा अर्चना के लिए आते हैं। सिर्फ कैथल में ही भगवान भोलेनाथ के ग्यारह रुद्रों के भक्त दर्शन कर पाते हैं इसके अलावा भारत मे कहीं भी ग्यारह रुद्र रूप नही है। शिवरात्रि पर भगवान भोलेनाथ के इन ग्यारह रुद्रों पर जलाभिषेक करने से विशेष पूण्य कर्मों की प्राप्ति होती है।

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