हरियाणा सरस्वती नदी बोर्ड उत्तराखंड सरकार से मिलकर सरस्वती नदी पुनरुद्धार पर कार्य कर रहा है : धूमन सिंह किरमच

Edited By Krishan Rana, Updated: 09 Apr, 2026 08:30 PM

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उत्तराखंड में हरियाणा सरस्वती नदी बोर्ड उत्तराखंड सरकार से मिलकर सरस्वती नदी पुनरुद्धार पर कार्य कर र

चंडीगढ़ (चन्द्र शेखर धरणी) : उत्तराखंड में हरियाणा सरस्वती नदी बोर्ड उत्तराखंड सरकार से मिलकर सरस्वती नदी पुनरुद्धार पर कार्य कर रहा है जिसके निमित सरस्वती बोर्ड के डिप्टी चेयरमैन धूमन सिंह किरमच ने उत्तराखंड मुख्यमंत्री के सलाहकार मन्नू गौड़ से हरिद्वार में मुलाक़ात कर खाका तैयार कर लिया है दोनों सरकारें हरियाणा व उत्तराखंड सरकार मिलकर इस प्रोजेक्ट पर काम कर रही हैं । 

इस प्रोजेक्ट की जानकारी देते हुए धूमन सिंह किरमच ने बताया कि सरस्वती नदी का प्राचीनतम इतिहास उत्तराखंड से जुड़ा हुआ है, इसरो व जीएसआई के वैज्ञानिकों के अनुसार सरस्वती नदी भी उत्तराखंड के बंदरपूंछ ग्लेशियर से निकलती है और वही से ही जिस तरह से गंगा यमुना निकलती है उसी तर्ज़ पर सरस्वती का पवित्र जल किस तरह से हरियाणा के लोगों को प्राप्त हो सके उस पर यह कार्य किया जा रहा है। 

धूमन किरमच ने बताया कि इस प्रोजेक्ट के तहत पहले से ही मुख्यमंत्री हरियाणा नायब सैनी जी ने एक चिठ्ठी उत्तराखंड मुख्यमंत्री को भेजी थी और उत्तराखंड सरकार ने इस परियोजना को आगे बढ़ाने का फ़ैसला लिया है और जल्द ही इस परियोजना के माध्यम से जितना पानी उत्तराखंड में उपलब्ध सरस्वती की मुख्यधारा टोन्स नदी व अन्य छोटी नदियों में मिल सके उसको लेकर हरियाणा तक लाया जा सके।

 उन्होंने बताया कि आज भी जिन नदियों में बारह महीने पानी ह वह नदी गंगा के बाद टौंस नदी में है और यही नदी वैदिक प्राचीन सरस्वती नदी है जिनका यमुना नदी के पोंटा में संगम के बाद हरियाणा की ओर बढ़ती है और अब टौंस नदी व इसकी सहायक नदियों के पानी को लेकर हरियाणा तक सरस्वती नदी स्वरूप में लाने में लगे हुए हैं और इस के साथ की जितनी भी ट्रिब्यूटरीज़ हैं उनको भी हरियाणा से जोड़ने के ऊपर सरस्वती बोर्ड कार्य कर रहा है।

किरमच ने बताया सरस्वती नदी बंदर पूछ ग्लेशियर से निकलती थी और माना जाता है जहाँ से इस वक़्त टौंस  नदी निकलती है इसका इतिहास भी सरस्वती नदी जैसा क्योंकि दोनों नादिया शापित बताई जाती है इसे नदी के बारे में माना जाता है की जब पांडवों ने महाभारत के युद्ध के बाद स्वर्ग जाने का रास्ता ढूंढा तो इसी रास्ते से वे गए थे और टॉस नदी के ऊपरी हिस्से में जो लोग रखते हैं आज भी पांडवों की पूजा रचना करते हैं यही वो नदी है जो प्राचीन वैदिक सरस्वती नदी है इसको सरस्वती बोर्ड उत्तराखंड सरकार से मिलकर आगे बढ़ाएगा। 

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