Edited By Pawan Kumar Sethi, Updated: 19 Jan, 2026 03:59 PM

पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के 26 नवंबर के आदेश के अनुपालन में आज टाउन एंड कंट्री प्लानिंग (डीटीपी) एनफोर्समेंट कार्यालय में डीएलएफ फेज-1 से फेज-5 के निवासियों द्वारा उठाए गए अधिकार-क्षेत्र के मुद्दे पर सुनवाई आयोजित की गई।
गुड़गांव, (ब्यूरो): पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के 26 नवंबर के आदेश के अनुपालन में आज टाउन एंड कंट्री प्लानिंग (डीटीपी) एनफोर्समेंट कार्यालय में डीएलएफ फेज-1 से फेज-5 के निवासियों द्वारा उठाए गए अधिकार-क्षेत्र के मुद्दे पर सुनवाई आयोजित की गई। इस सुनवाई में करीब 100 से अधिक लोग उपस्थित रहे।
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सुनवाई के दौरान निवासियों ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि डीएलएफ का पूरा इलाका नगर निगम गुरुग्राम के अधीन आता है, इसलिए यहां टाउन एंड कंट्री प्लानिंग एक्ट, 1963 लागू नहीं होता। उनका कहना था कि जब क्षेत्र नगर निगम के अंतर्गत है, तो टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग को किसी भी प्रकार की कार्रवाई करने का अधिकार नहीं है। निवासियों ने यह भी तर्क दिया कि भवनों के नक्शे और ऑक्युपेंसी सर्टिफिकेट (ओसी) 1963 एक्ट के अंतर्गत जारी किए जाते हैं, इसलिए विभाग का अधिकार-क्षेत्र नहीं बनता।
इन तर्कों पर डीटीपी एनफोर्समेंट अधिकारियों ने विस्तार से जवाब दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग हरियाणा डेवलपमेंट एंड रेगुलेशन ऑफ अर्बन एरियाज एक्ट, 1975 के तहत कार्य करता है। इसी अधिनियम की धारा 3 के अंतर्गत विभाग किसी भी भूमि को रेजिडेंशियल प्लॉट्स में विकसित करने का लाइसेंस जारी करता है। यह लाइसेंस केवल रिहायशी उपयोग के लिए होता है। इसके बाद विभाग द्वारा एक जोनिंग लेआउट प्लान स्वीकृत किया जाता है, जिसमें प्रत्येक प्लॉट का उपयोग स्पष्ट रूप से निर्धारित किया जाता है।
डीटीपी ने बताया कि डीएलएफ क्षेत्र में जो भी उल्लंघन सामने आए हैं, वे सभी लाइसेंस की शर्तों, जोनिंग प्लान तथा 1975 एक्ट के प्रावधानों के उल्लंघन से जुड़े हुए हैं। अधिकारियों ने आगे स्पष्ट किया कि स्वतंत्र मकानों के नक्शे हरियाणा बिल्डिंग कोड, 2017 के तहत सेल्फ-सर्टिफिकेशन पॉलिसी में पास किए जाते हैं। इस प्रक्रिया में नक्शा आर्किटेक्ट द्वारा स्वीकृत किया जाता है और इसी पॉलिसी के तहत ऑक्युपेंसी सर्टिफिकेट (ओसी) भी आर्किटेक्ट द्वारा जारी किया जाता है।
डीटीपी ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि नक्शे या ओसी में किसी भी प्रकार का नियम उल्लंघन पाया जाता है, तो वह सीधे तौर पर 1975 एक्ट के प्रावधानों का उल्लंघन माना जाएगा। ऐसे मामलों में धारा 3-बी के तहत कार्रवाई करने का अधिकार केवल डायरेक्टर, टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग या उनके द्वारा अधिकृत अधिकारी को प्राप्त है।
अपने अधिकार-क्षेत्र को स्पष्ट करने के लिए डीटीपी एनफोर्समेंट ने न्यायालयों के महत्वपूर्ण फैसलों का हवाला दिया। शिवा आइस फैक्ट्री बनाम हरियाणा सरकार मामले में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया था कि 1975 एक्ट के उल्लंघन पर निगम के अंतर्गत आने वाली लाइसेंस स्वीकृत कालोनियों में टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग को कार्रवाई का पूर्ण अधिकार है। इस निर्णय के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में दायर अपील भी खारिज कर दी गई थी। इसी तरह एक्सोटिका कंडोमिनियम ओनर्स एसोसिएशन बनाम आर.एस. बिजनेस सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड मामले में भी हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट ने सही ठहराया था।
डीटीपी ने रजत कुच्चल बनाम हरियाणा सरकार मामले को लेकर फैली गलतफहमी को भी स्पष्ट किया। अधिकारियों ने बताया कि इस मामले में अदालत ने कहा था कि नगर निगम क्षेत्र के भीतर 1963 एक्ट लागू होगा, लेकिन यह आदेश लाइसेंस स्वीकृत कॉलोनियों पर लागू नहीं होता, जो कि 1975 एक्ट के अधीन आती हैं। 1975 का अधिनियम लाइसेंस प्राप्त क्षेत्रों पर लागू होता है, चाहे वह क्षेत्र नगर निगम के अधीन ही क्यों न आता हो।
अंत में डीटीपी एनफोर्समेंट ने स्पष्ट किया कि डीएलएफ फेज-1 से फेज-5 एक लाइसेंस एरिया है। यहां पाए गए सभी उल्लंघन 1975 एक्ट एवं लाइसेंस शर्तों से संबंधित हैं। इसलिए इस क्षेत्र में टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग का अधिकार क्षेत्र पूरी तरह बनता है और विभाग द्वारा की जाने वाली कार्रवाई कानून के अनुसार पूर्णतः वैध है।
डीटीपी अमित मधोलिया ने कहा कि इस मुद्दे पर सोमवार को लोगों को सुनवाई का अवसर दिया गया। इस दौरान लोगों ने अपनी आपत्तियां दाखिल की और उनकी भ्रांतियों को दूर किया गया। सुनवाई के बाद इस मुद्दे पर एक कॉमन स्पीकिंग ऑर्डर पारित किया जाएगा। यह आदेश अधिकार क्षेत्र से संबंधित आपत्ति उठाने वाले सभी लोगों को भेजा जाएगा तथा इसकी एक प्रति उच्च न्यायालय में स्टेटस रिपोर्ट के रूप में दाखिल की जाएगी।