गुड़गांव में आई बाढ़, प्रशासन के इमरजेंसी अलार्म के बाद राहत बचाव कार्य शुरू, लोगाें की जान बचाई

Edited By Pawan Kumar Sethi, Updated: 14 May, 2026 09:52 PM

district administration sucessfully complete flood mockdrill

जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अध्यक्ष एवं डीसी उत्तम सिंह के मार्गदर्शन में गुरुवार सुबह 9 बजे गुरुग्राम में बाढ़ आपदा को लेकर मॉक एक्सरसाइज आयोजित की गई।

गुड़गांव, (ब्यूरो): जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अध्यक्ष एवं डीसी उत्तम सिंह के मार्गदर्शन में गुरुवार सुबह 9 बजे गुरुग्राम में बाढ़ आपदा को लेकर मॉक एक्सरसाइज आयोजित की गई। लघु सचिवालय परिसर में सायरन बजते ही प्रशासनिक तंत्र तुरंत अलर्ट मोड में आ गया। सूचना मिलते ही इमरजेंसी ऑपरेशन सेंटर सक्रिय किया गया और राहत एवं बचाव टीमों ने तय स्थानों पर पहुंचकर मोर्चा संभाल लिया। कंट्रोल रूम से विभिन्न विभागों की गतिविधियों की निगरानी शुरू हुई। आपदा प्रबंधन को लेकर आयोजित इस अभ्यास का उद्देश्य संभावित बाढ़ जैसी स्थिति में विभिन्न एजेंसियों की तैयारी, समन्वय और त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता को परखना था।

गुरुग्राम की ताजा खबरों के लिए लिंक  https://www.facebook.com/KesariGurugram  पर क्लिक करें।

 

मॉक एक्सरसाइज के दौरान इमरजेंसी ऑपरेशन सिस्टम (ईओसी) से सीटीएम ज्योति नागपाल और डीआरओ, विजय यादव और जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण से पूनम ने पूरे अभियान की मॉनिटरिंग की। अभ्यास की लाइव स्ट्रीमिंग भी की गई, जबकि सेना की टीम ने संपूर्ण गतिविधियों का सुपरविजन किया। जिला प्रशासन, राजस्व एवं प्रबंधन विभाग, स्वास्थ्य विभाग, सिविल डिफेंस, एनडीआरएफ, पुलिस, फायर ब्रिगेड, लोक निर्माण विभाग और अन्य एजेंसियों ने संयुक्त रूप से राहत एवं बचाव कार्यों का प्रदर्शन किया।

 

बसई पोंड क्षेत्र में हुआ लाइव रेस्क्यू अभ्यास

अभ्यास के तहत भारी बारिश और जलभराव की काल्पनिक स्थिति तैयार की गई। डीएलएफ फेज-1 अंडरपास और सिग्नेचर टावर अंडरपास को संभावित प्रभावित स्थल के रूप में शामिल किया गया, जबकि वास्तविक रेस्क्यू और राहत गतिविधियों का संचालन बसई पोंड क्षेत्र में किया गया। जलभराव की स्थिति को प्रभावी ढंग से दर्शाने और राहत एजेंसियों की कार्यप्रणाली का व्यावहारिक परीक्षण करने के उद्देश्य से विभिन्न रेस्क्यू गतिविधियां वहां आयोजित की गईं। राहत एजेंसियों ने तुरंत प्रभावित क्षेत्रों में पहुंचकर रेस्क्यू अभियान शुरू किया। स्टेजिंग एरिया में एसडीएम बादशाहपुर संजीव सिंगला राहत टीम के साथ मौजूद रहे। राहत टीमों ने जलभराव वाले क्षेत्रों से लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला और घायलों को प्राथमिक उपचार उपलब्ध करवाया।

 

मॉक सीनारियो में 23 घायलों का किया गया रेस्क्यू

मॉक सीनारियो के अनुसार कुल 23 घायलों को रेस्क्यू किया गया। जलमग्न अंडरपासों में वाहन फंसने से डूबने की घटनाओं में 8 लोगों की मृत्यु दर्शाई गई, जबकि बाढ़ के पानी में फैले करंट और खुले बिजली के तारों की चपेट में आने से 7 लोगों की मौत दिखाई गई। इसके अतिरिक्त सड़क दुर्घटनाओं और अन्य आघात संबंधी घटनाओं में भी कई लोग घायल हुए। सांप के काटने सहित विभिन्न आपात चिकित्सा स्थितियों को भी अभ्यास में शामिल किया गया, ताकि मेडिकल टीमों की तत्परता का परीक्षण किया जा सके।

 

संयुक्त समन्वय के साथ चला राहत एवं बचाव अभियान

घायलों को तुरंत पॉली क्लिनिक सेक्टर-31 पहुंचाया गया, जहां गंभीर रूप से घायल लोगों का उपचार किया गया, जबकि अन्य को प्राथमिक उपचार के बाद राहत केंद्र भेजा गया। मॉक ड्रिल के दौरान प्रशासन की ओर से यह भी सुनिश्चित किया गया कि विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय बना रहे। पुलिस विभाग ने यातायात और सुरक्षा व्यवस्था संभाली, फायर विभाग ने रेस्क्यू सहायता प्रदान की, जबकि स्वास्थ्य विभाग ने घायलों के उपचार और मेडिकल रिस्पॉन्स की जिम्मेदारी निभाई। लोक निर्माण विभाग और बिजली विभाग की टीमों ने भी मौके पर पहुंचकर जरूरी व्यवस्थाएं संभालीं।

डीसी उत्तम सिंह ने कहा कि किसी भी आपदा की स्थिति में शुरुआती समय सबसे महत्वपूर्ण होता है। ऐसे समय में घायलों को सुरक्षित निकालना, समय पर अस्पताल पहुंचाना और चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध करवाना सबसे बड़ी प्राथमिकता रहती है। इसी को ध्यान में रखते हुए अस्पतालों में एंबुलेंस, दवाइयों, उपकरणों और मानव संसाधन की उपलब्धता की भी समीक्षा की गई। उन्होंने कहा कि आपदा की स्थिति में सही और प्रमाणित जानकारी समय पर लोगों तक पहुंचाना जरूरी होता है, ताकि अफवाहों को रोका जा सके और लोगों में भ्रम की स्थिति न बने। इसके लिए प्रशासन और मीडिया के बीच प्रभावी सूचना तंत्र बनाए रखने पर भी बल दिया गया।

 

एनएसएस और एनसीसी कैडेट्स की भागीदारी की सराहना

डीसी उत्तम सिंह ने कहा कि इस तरह की मॉक ड्रिल केवल औपचारिक अभ्यास नहीं बल्कि वास्तविक परिस्थितियों में विभिन्न विभागों की तैयारियों को जांचने का माध्यम है। भविष्य में किसी भी प्राकृतिक आपदा से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए सभी विभागों को हमेशा सतर्क और समन्वित रहना होगा। उन्होंने एनएसएस और एनसीसी कैडेट्स की भागीदारी की भी सराहना करते हुए कहा कि आपदा प्रबंधन में सामुदायिक सहयोग और युवाओं की सहभागिता अत्यंत आवश्यक है।

Related Story

Trending Topics

img title
img title

Be on the top of everything happening around the world.

Try Premium Service.

Subscribe Now!