ब्रह्माकुमारीज़ ने चंडीगढ़ में मनाया संगम त्रिवेणी उत्सव  , सौ वरिष्ठ नागरिकों का हुआ अभिनंदन

Edited By Isha, Updated: 22 Feb, 2026 05:45 PM

brahma kumaris celebrated sangam triveni festival in chandigarh

ब्रह्माकुमारीज़ संस्था ने आज यहाँ सेक्टर पंद्रह स्थित ग्लोबल पीस हाउस में शिवरात्रि उत्सव के उपलक्ष्य में 'संगम त्रिवेणी' कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया। इस विशेष अवसर पर वरिष्ठ नागरिकों का सम्मान

चंडीगढ़(चन्द्र शेखर धरणी):  ब्रह्माकुमारीज़ संस्था ने आज यहाँ सेक्टर पंद्रह स्थित ग्लोबल पीस हाउस में शिवरात्रि उत्सव के उपलक्ष्य में 'संगम त्रिवेणी' कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया। इस विशेष अवसर पर वरिष्ठ नागरिकों का सम्मान, 'अलविदा तनाव' विषय पर विचार-विमर्श और उत्कृष्ट छात्रों को पुरस्कार वितरण — तीनों का अनूठा संगम देखने को मिला। 

कार्यक्रम में चंडीगढ़ और पंचकूला के लगभग 400  सौ वरिष्ठ नागरिक, न्यायविद, पुलिस अधिकारी, चिकित्सक, प्राध्यापक और विभिन्न विद्यालयों के छात्र उपस्थित रहे।भारत सरकार के 'संगम' कार्यक्रम का चंडीगढ़ और पंजाब में विधिवत शुभारंभब्रह्माकुमारीज़ और भारत सरकार के बीच हस्ताक्षरित सहमति पत्र का हुआ क्रियान्वयनइस कार्यक्रम का एक महत्वपूर्ण पड़ाव रहा  भारत सरकार के वरिष्ठ नागरिकों के लिए बनाए गए 'संगम' कार्यक्रम के अंतर्गत ब्रह्माकुमारीज़ संस्था के साथ हस्ताक्षरित सहमति पत्र का चंडीगढ़ और पंजाब के लिए विधिवत शुभारंभ। इस सहमति पत्र के माध्यम से वरिष्ठ नागरिकों के कल्याण, सम्मान और उनके जीवन को और अर्थपूर्ण बनाने की दिशा में संस्था तथा सरकार मिलकर कार्य करेंगी।'वो बूढ़े नहीं, बड़े हैं'  राज़ योगनी अनीता दीदी ने किया  वरिष्ठ नागरिकों का हृदयस्पर्शी स्वागतगरिमा और गौरव के साथ जीने का अधिकार  समाज को दिलाई गई प्रतिज्ञासंस्था की निदेशक राजयोगिनी अनीता दीदी ने उपस्थित वरिष्ठ नागरिकों का खुले हृदय से स्वागत करते हुए कहा कि ये बुज़ुर्ग नहीं, बड़े हैं अनुभव और ज्ञान की जीती-जागती धरोहर। उन्होंने 'गरिमा के साथ जीने के अधिकार' पर विशेष बल देते हुए समाज से आह्वान किया कि वरिष्ठ नागरिकों को उपेक्षा और अवहेलना का शिकार न बनाया जाए।उन्होंने 'बुजुर्ग' शब्द की रोचक व्याख्या करते हुए कहा  'ब' अर्थात बच्चों जैसी निश्छलता, 'ज' अर्थात जवानों जैसा उत्साह और जिम्मेदारी, और 'ग' अर्थात गीता जैसा ज्ञान और अनुभव।

उन्होंने कहा कि वरिष्ठ नागरिकों ने अपनी पारी खेली है, परिवार और समाज को समृद्ध किया है अब समाज का दायित्व है कि उनके अनुभव और योगदान को सम्मान दे।इस अवसर पर उपस्थित जनसमूह से एक भावपूर्ण प्रतिज्ञा भी करवाई गई  "हम जीवन भर परिवार और समाज के बुज़ुर्गों का सम्मान बनाए रखेंगे, उनकी देखभाल करेंगे, प्रेम, सहानुभूति और करुणा से व्यवहार करेंगे, उनके अनुभव से सीख को महत्व देंगे, उनके अधिकारों के प्रति जागरूक रहेंगे, उनकी आवाज़ बनेंगे और उनके साथ होने वाले किसी भी दुर्व्यवहार का विरोध करेंगे।"'अलविदा तनाव'  बीके भाई ई वी गिरीश ने बताए तनाव से मुक्ति के सरल और सटीक उपायराजयोग के अभ्यास से मन की एकाग्रता, मुस्कुराहट को जीवन का हिस्सा बनाने पर दिया बलकार्यक्रम का मुख्य आकर्षण रहा 'अलविदा तनाव' विषय पर अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त बीके भाई ई वी गिरीश का प्रेरणादायी उद्बोधन। अलविदा तनाव’ सत्र में राजयोग का संदेशकार्यक्रम का मुख्य आकर्षण ‘अलविदा तनाव’ विषय पर बीके भाई ई.वी. गिरीश का संबोधन रहा। उन्होंने तनाव से बचने के लिए सकारात्मक सोच, उन्मुक्त हंसी और मुस्कुराहट को जीवन का हिस्सा बनाने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि न तनाव देना है और न तनाव लेना है। 


राजयोग के नियमित अभ्यास द्वारा मन की एकाग्रता, भावनात्मक स्थिरता और मजबूत आत्मस्थिति विकसित कर परिस्थितियों पर विजय पाई जा सकती है।न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता बोले  'आज तो पैदा होते बच्चे को भी तनाव है, ध्यान ही है एकमात्र उपाय'वरिष्ठ पुलिस अधिकारी एल के यादव ने आध्यात्मिक ऊर्जा और क्वांटम विज्ञान का किया अद्भुत संगमइस अवसर पर उपस्थित न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता ने कहा कि आज के युग में तनाव इतना व्यापक हो गया है कि जन्म लेते शिशु को भी इससे अछूता नहीं कहा जा सकता।

उन्होंने अपने व्यक्तिगत अनुभव साझा करते हुए बताया कि न्यायिक कार्यक्षेत्र में जहाँ चारों ओर नकारात्मकता और संघर्ष का वातावरण होता है, वहाँ ध्यान के अभ्यास से उन्होंने स्वयं को सकारात्मक और तनाव मुक्त बनाए रखा है।वरिष्ठ पुलिस अधिकारी श्री एल के यादव ने अपने सन्देश  में आध्यात्मिक ऊर्जा के साथ क्वांटम विज्ञान और ब्रह्मांडीय ऊर्जा की बात करते हुए कहा कि  आध्यात्मिक   वातावरण में शांति, पवित्रता और सुख की अनुभूति होती है तथा चारों ओर सकारात्मकता फैलती है।सविता भट्टी बोलीं 'जीवन ईसीजी के ग्राफ जैसा है  ऊपर-नीचे होना ही जीवन है, हँसते रहो, हँसाते रहो'स्वर्गीय पद्मभूषण जसपाल भट्टी के जीवन दर्शन को किया जीवंतचर्चित निर्माता, निर्देशक और अभिनेत्री सविता भट्टी ने अपने स्वर्गीय पति पद्मभूषण जसपाल भट्टी के जीवनानुभवों को साझा करते हुए कहा कि जीवन तो ईसीजी के ग्राफ की तरह होता है  ऊपर-नीचे होता रहता है, और यही जीवंतता का प्रमाण है। 

सीधी रेखा तो मृत्यु को इंगित करती है। उन्होंने सबको यही संदेश दिया सब कुछ होते हुए भी हँसते रहो और हँसाते रहो।उत्कृष्ट छात्रों का सम्मान, ध्यान का अनुभव और रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँखचाखच भरे पंडाल में ध्यान के दौरान लोगों ने अनुभव की असीम शांतिकार्यक्रम का शुभारंभ ज्योति प्रज्वलन से हुआ। इसके पश्चात विभिन्न विद्यालयों के उत्कृष्ट छात्रों को उनकी असाधारण उपलब्धियों के लिए पुरस्कृत और प्रोत्साहित किया गया। पीजीआई के चिकित्सकों, पंजाब विश्वविद्यालय के प्राध्यापकों और डीन  सहित  वरिष्ठ नागरिकों का भी विशेष सम्मान किया गया।इस अवसर पर चंडीगढ़ मेयर श्री सौरभ जोशी भी उपस्थित थे। कार्यक्रम में नाटक, गीत, नृत्य और भांगड़े की रंगारंग प्रस्तुतियों ने उपस्थित जनसमूह का मन मोह लिया। कार्यक्रम के अंत में खचाखच भरे पंडाल में सामूहिक ध्यान का अनुभव कराया गया, जिसमें उपस्थित लोगों ने असीम शांति और दिव्य प्रेम की अनुभूति की।
 

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