बहादुरगढ़ नगर परिषद में बड़ा सियासी उलटफेर, वाईस चेयरमैन को पद से हटाया; अविश्वास प्रस्ताव हुआ पास

Edited By Harman, Updated: 15 May, 2026 02:51 PM

bahadurgarh municipal council vice chairman removed from post no confidence

बहादुरगढ़ नगर परिषद की राजनीति में बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। भाजपा को यह बड़ा झटका भी लगा है। नगर परिषद के वाइस चेयरमैन राजपाल शर्मा उर्फ पालेराम के खिलाफ लाया गया अविश्वास प्रस्ताव पारित हो गया। खास बात यह रही कि भाजपा के वाइस चेयरमैन के खिलाफ...

बहादुरगढ़ (परवीन धनखड़) : बहादुरगढ़ नगर परिषद की राजनीति में बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। भाजपा को यह बड़ा झटका भी लगा है। नगर परिषद के वाइस चेयरमैन राजपाल शर्मा उर्फ पालेराम के खिलाफ लाया गया अविश्वास प्रस्ताव पारित हो गया। खास बात यह रही कि भाजपा के वाइस चेयरमैन के खिलाफ कांग्रेस, इनेलो और निर्दलीय पार्षदों ने ही नहीं  बल्कि भाजपा की टिकट पर चुनाव जीतने वाले पार्षदों ने भी पालेराम शर्मा के खिलाफ वोट कर अविश्वास प्रस्ताव पारित किया। पार्षदों ने अपनी जीत का जश्न भी मनाया और ढोल की थाप पर जमकर थिरकते हुए भी दिखाई दिए।

झज्जर जिले के एडीसी जगनिवास की अध्यक्षता में बहादुरगढ़ नगर परिषद कार्यालय में बैठक बुलाई गई। इस बैठक में शहर के कुल 31 पार्षदों में से 26 पार्षद शामिल हुए।  बैठक में नगर परिषद की चेयरपर्सन सरोज राठी, वाइस चेयरमैन राजपाल शर्मा उर्फ पालेराम समेत 5 पार्षद अनुपस्थित रहे। शहर के 31 पार्षदों और चेयरपर्सन को मिला कर कुल 32 वोटों में से बैठक में उपस्थित सभी 26 पार्षदों ने राजपाल शर्मा उर्फ पालेराम के खिलाफ वोट किया। इसके साथ ही अविश्वास प्रस्ताव भारी बहुमत से पास हो गया।

हम आपको बता दें कि 17 मार्च को 25 पार्षदों ने राजपाल शर्मा के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस दिया था। नगर परिषद के कई पार्षद लंबे समय से वाइस चेयरमैन के खिलाफ नाराजगी जाहिर कर रहे थे। अविश्वास प्रस्ताव पारित होने के बाद पार्षदों ने इसे भाईचारे की जीत करार दिया। पार्षदों ने एक बार फिर से पालेराम शर्मा पर अभद्र भाषा का प्रयोग करने और विकास कार्यों में रोड़ा अटकाने और महिला पार्षदों के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी करने जैसे गम्भीर आरोप भी लगाए। पार्षदों के कहना है कि अलग अलग राजनीतिक पार्टियों से जुड़े पार्षदों ने एकजुट होकर पालेराम शर्मा पद से हटाने का फैसला लिया था। जिसमे अब जाकर उन्हें कामयाबी हासिल हुई है। पार्षदों का कहना है कि नगर परिषद में अब जाकर बिना किसी भेदभाव के विकासकार्य होने की उम्मीद बनी है। इस घटनाक्रम को बहादुरगढ़ की स्थानीय राजनीति में भाजपा के लिए बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है।

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