Edited By Isha, Updated: 09 Jun, 2026 08:16 AM

हरियाणा के पंचकूला जिले में स्थित 1394 एकड़ (लगभग 1396 एकड़) बेशकीमती जमीन से जुड़े 66 साल पुराने ऐतिहासिक भूमि विवाद में एक नया और बड़ा मोड़ आ गया है। अंबाला मंडल के कमिश्नर संजीव वर्मा
चंडीगढ़/पंचकूला: हरियाणा के पंचकूला जिले में स्थित 1394 एकड़ (लगभग 1396 एकड़) बेशकीमती जमीन से जुड़े 66 साल पुराने ऐतिहासिक भूमि विवाद में एक नया और बड़ा मोड़ आ गया है। अंबाला मंडल के कमिश्नर संजीव वर्मा ने इस मामले में एक महत्वपूर्ण आदेश पारित करते हुए राजस्व रिकॉर्ड (Revenue Records) से जुड़े पुराने फैसले को रद्द कर दिया है। अब इस विशाल भूमि खंड के मालिकाना हक को लेकर सभी पक्षों की मौजूदगी में नए सिरे से सुनवाई शुरू की जाएगी।यह मामला 1960 के दशक से लंबित है और कई पीढ़ियों से कोर्ट-कचहरी के चक्कर काट रहा है।
क्या है पूरा मामला और विवाद की जड़?
इस छह दशक पुराने विवाद की शुरुआत दिवंगत सरदार भगवंत सिंह की संपत्ति से जुड़ी है। उनके पास पंचकूला क्षेत्र के सात महत्वपूर्ण गांवों में कुल मिलाकर करीब 1396 एकड़ जमीन थी। इन गांवों में बरवाला, संगराना, फतेहपुर विरान, भराली, जलौली, बीर बाबूपुर, बीर फिरोजारी शामिल हैं। सरदार भगवंत सिंह के निधन के बाद इस विशाल भूमि के अधिशेष (Surplus Land) क्षेत्र को लेकर कानूनी लड़ाई छिड़ गई। यह जमीन सामरिक और आर्थिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह आईटीबीपी (ITBP) कैंप के पास और नेशनल हाईवे (जीटी रोड) के आसपास स्थित है।
कमिश्नर कोर्ट ने क्यों पलटा फैसला?
देहरादून की रहने वाली आशा सिंह ने कलेक्टर एग्रेरियन पंचकूला के 4 जनवरी 2024 के एक आदेश को अंबाला कमिश्नर कोर्ट में चुनौती दी थी। इस आदेश में कलेक्टर ने अपने ही एक पुराने फैसले (11 अप्रैल 2023) को पलटते हुए राजस्व रिकॉर्ड में किए गए सुधारों को रद्द कर दिया था।
अंबाला के कमिश्नर संजीव वर्मा ने मामले की समीक्षा के बाद पाया कि यह कदम पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के निर्देशों के अनुरूप नहीं था। कमिश्नर ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि हाईकोर्ट द्वारा समय-समय पर दिए गए समयबद्ध निर्देशों के बावजूद, इस संवेदनशील और अरबों रुपये के मामले को अनावश्यक रूप से इतने लंबे समय तक लटका कर रखा गया, जो न्यायसंगत नहीं है।"
अब आगे क्या? कलेक्टर को मिली 2 महीने की डेडलाइन
अंबाला कमिश्नर ने अपने अंतिम आदेश में कलेक्टर एग्रेरियन पंचकूला को बेहद सख्त निर्देश जारी किए हैं। मामले से जुड़े सभी संबंधित पक्षों (हरियाणा सरकार, मूल मालिकों के वारिसों और वर्तमान में जमीन पर काबिज निजी व्यक्तियों) को अपनी बात रखने और सुनवाई का पूरा अवसर दिया जाए।इस पूरे भूमि विवाद पर अगले दो महीने के भीतर नए सिरे से गहन जांच कर पूरी तरह से निष्पक्ष और अंतिम निर्णय लिया जाए। छह दशकों से अधिक समय से चले आ रहे इस विवाद में कमिश्नर के इस आदेश के बाद अब कयास लगाए जा रहे हैं कि इस बहुप्रतीक्षित और बेहद महंगी जमीन के मालिकाना हक का अंतिम फैसला जल्द ही सामने आ सकता है।