हरियाणा में 504 करोड़ का बैंक घोटाला : 3 IAS अफसरों पर बढ़ेगा कानूनी शिकंजा, चार्जशीट की स्क्रटूनी के बाद जारी होगा कोर्ट का नोटिस

Edited By Harman, Updated: 04 Sep, 2026 11:48 AM

504 crore bank scam in haryana

हरियाणा के चर्चित ₹504 करोड़ के IDFC APU स्मॉल बैंक घोटाले में आरोपी तीन IAS अधिकारियों की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं। यह मामला अब कानूनी कार्यवाही के चरण में पहुँच गया है।

हरियाणा डेस्क : हरियाणा के चर्चित ₹504 करोड़ के IDFC APU स्मॉल बैंक घोटाले में आरोपी तीन IAS अधिकारियों की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं। यह मामला अब कानूनी कार्यवाही के चरण में पहुँच गया है।

कानूनी जानकारों का कहना है कि पहले चार्जशीट की स्क्रटूनी की जाएगी, और फिर तीन IAS अधिकारियों विनीत गर्ग, मोहम्मद शैन और डॉ. साकेत कुमार सहित न्यायिक हिरासत से बाहर मौजूद अन्य सभी आरोपियों को कोर्ट में पेश होने के लिए नोटिस भेजा जाएगा। उस दौरान, उन्हें कोर्ट से अग्रिम या नियमित ज़मानत लेनी होगी।

वहीं, न्यायिक हिरासत में मौजूद तीन IAS अधिकारियों पंकज अग्रवाल, रामकुमार सिंह और प्रदीप कुमार को अगली तारीख पर कोर्ट की ओर से चालान की कॉपी दी जाएगी। इसके साथ ही, CBI को आरोपियों के खिलाफ आरोप तय करने के लिए हरियाणा सरकार से मुकदमा चलाने की मंज़ूरी भी लेनी होगी, क्योंकि PC एक्ट के तहत किसी भी सरकारी कर्मचारी के खिलाफ मामले में ऐसी मंज़ूरी ज़रूरी होती है। ऐसे में, अब न्यायिक हिरासत से बाहर चल रहे तीन IAS अधिकारियों को चालान की कॉपी दी जाएगी। अब इन अधिकारियों को एक जटिल कानूनी प्रक्रिया से गुज़रना होगा क्योंकि आरोपी पंकज अग्रवाल की नियमित ज़मानत की अर्ज़ी पहले ही खारिज हो चुकी है।

गौरतलब है कि दो दिन पहले ही CBI ने हरियाणा के छह IAS अधिकारियों समेत 19 आरोपियों के खिलाफ अपनी तीसरी चार्जशीट दाखिल की थी। इन आरोपों में भारतीय दंड संहिता (IPC) की कई गैर-ज़मानती धाराएँ शामिल हैं, जिनमें तीन साल से ज़्यादा की सज़ा का प्रावधान है।  कोर्ट चार्जशीट का संज्ञान लेगी। पंचकूला स्थित स्पेशल CBI कोर्ट चार्जशीट और उसके साथ लगे दस्तावेज़ों/सबूतों की जांच करेगी। दस्तावेज़ आरोपियों को उपलब्ध कराए जाएंगे। प्रॉसिक्यूशन के दस्तावेज़ों और उन सबूतों की कॉपी आरोपियों को दी जाएगी जिन पर यह मामला आधारित है। इसके बाद आरोप तय करने की प्रक्रिया शुरू होगी। यह मामला अभी खत्म नहीं हुआ है, CBI की जांच चल रही है।

CBI ने साफ़ किया है कि तीनों मामलों की जांच जारी है। दूसरे संदिग्धों और आरोपियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। एजेंसी का कहना है कि उसका मकसद सरकारी फंड के गलत इस्तेमाल से जुड़े पूरे मनी ट्रेल (पैसे के लेन-देन के रास्ते) का पता लगाना, अपराध से हुई कमाई का पता लगाना और जिम्मेदार लोगों को सज़ा दिलाना है। जांच एजेंसी अभी भी सरकारी फंड के कथित गलत इस्तेमाल के पूरे मनी ट्रेल का पता लगाने और इसमें शामिल लोगों की पहचान करने की कोशिश कर रही है।

CBI के मुताबिक, सरकारी फंड को कथित तौर पर अलग-अलग अकाउंट और शेल कंपनियों के ज़रिए दूसरी जगहों पर भेजा गया था, और सोने व रियल एस्टेट में निवेश या कैश निकालने से इसका कनेक्शन सामने आया है। खबर है कि लगभग ₹20 करोड़ कीमत का सोना भी ज़ब्त किया गया है। हालांकि, पहले की रिपोर्ट में CBI ने संकेत दिया था कि इस मामले में और भी चार्जशीट दाखिल की जा सकती हैं।

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