हरियाणा में 396 लोगों को मिली सुरक्षा, 691 पुलिसकर्मी को सौंपी जिम्मेदारी; ये रही बड़ी वजह...

Edited By Harman, Updated: 01 Sep, 2026 06:29 PM

396 people in haryana provided security

हरियाणा में गैंगस्टरों और आपराधिक गिरोहों से मिल रही धमकियों को लेकर सरकार ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर विधानसभा में स्थिति स्पष्ट की है। सरकार के अनुसार 1 जनवरी 2025 से 31 जुलाई 2026 के बीच गैंगस्टरों से धमकी मिलने के आधार पर प्रदेश में 396 लोगों को...

चंडीगढ़ (चंद्र शेखर धरणी) : हरियाणा में गैंगस्टरों और आपराधिक गिरोहों से मिल रही धमकियों को लेकर सरकार ने सुरक्षा व्यवस्था को लेकर विधानसभा में स्थिति स्पष्ट की है। सरकार के अनुसार 1 जनवरी 2025 से 31 जुलाई 2026 के बीच गैंगस्टरों से धमकी मिलने के आधार पर प्रदेश में 396 लोगों को सुरक्षा उपलब्ध कराई गई। इनकी सुरक्षा के लिए कुल 691 पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई। विधानसभा में यह जानकारी मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने एक अतारांकित प्रश्न के लिखित जवाब में दी।

विधानसभा में विधायक पूजा (मुलाना) ने सरकार से जानना चाहा था कि उक्त अवधि में गैंगस्टरों से धमकी मिलने के कारण किन व्यापारियों, जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों को सुरक्षा मुहैया कराई गई। साथ ही उन्होंने संबंधित व्यक्तियों के नाम, पदनाम, जिला-वार विवरण और प्रत्येक व्यक्ति के साथ तैनात किए गए सुरक्षाकर्मियों की संख्या की जानकारी भी मांगी थी।

सुरक्षा पाने वालों में व्यापारी सबसे अधिक

सरकार के आंकड़ों के अनुसार सुरक्षा प्राप्त करने वाले 396 लोगों में सबसे बड़ा वर्ग व्यापारियों का है। कुल 338 व्यापारियों को सुरक्षा उपलब्ध कराई गई। इसके अलावा 25 जनप्रतिनिधियों और 33 अन्य श्रेणियों से जुड़े लोगों को भी सुरक्षा प्रदान की गई। यह आंकड़ा इस बात की ओर संकेत करता है कि आपराधिक गिरोहों की धमकियों का असर केवल राजनीतिक क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि कारोबारी वर्ग भी सुरक्षा को लेकर चिंता के दायरे में है। बड़ी संख्या में व्यापारियों को सुरक्षा उपलब्ध कराया जाना प्रदेश में संगठित अपराध और रंगदारी जैसी आशंकाओं से जुड़ी सुरक्षा चुनौतियों को भी रेखांकित करता है।

नाम और जिला-वार जानकारी सार्वजनिक नहीं

सरकार ने सुरक्षा प्राप्त करने वाले लोगों के नाम, पदनाम और जिला-वार विवरण विधानसभा में सार्वजनिक नहीं किया। इसके पीछे सरकार ने सुरक्षा संबंधी संवेदनशीलता को आधार बनाया है। मुख्यमंत्री के जवाब में स्पष्ट किया गया कि संबंधित व्यक्तियों की पहचान अथवा सुरक्षा व्यवस्था का विस्तृत विवरण सार्वजनिक किए जाने से उनकी सुरक्षा को खतरा पैदा हो सकता है। सरकार का तर्क है कि जिन लोगों को पहले से धमकियां मिली हैं, उनके बारे में सुरक्षात्मक जानकारी सार्वजनिक करना उनके लिए अतिरिक्त जोखिम पैदा कर सकता है। इस तरह विधानसभा में आंकड़े तो सामने आए, लेकिन सुरक्षा प्राप्त लोगों की व्यक्तिगत पहचान और उनके सुरक्षा घेरे से जुड़ी जानकारी को गोपनीय रखा गया।

691 पुलिसकर्मियों पर सुरक्षा की जिम्मेदारी

सरकार के अनुसार करीब डेढ़ वर्ष से अधिक की अवधि में इन 396 लोगों की सुरक्षा के लिए कुल 691 सुरक्षा कर्मी उपलब्ध कराए गए। हालांकि सरकार ने प्रत्येक व्यक्ति के साथ कितने पुलिसकर्मी तैनात हैं, इसका अलग-अलग ब्योरा नहीं दिया। सुरक्षा की आवश्यकता व्यक्ति की धमकी के स्तर, उसकी सार्वजनिक भूमिका, क्षेत्र और खतरे की प्रकृति के आधार पर अलग-अलग हो सकती है। ऐसे में सभी 396 लोगों के लिए समान संख्या में सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए हों, ऐसा जरूरी नहीं है।

अधिकांश सुरक्षा सरकारी खर्च पर

सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े वित्तीय पहलू पर भी सरकार ने विधानसभा में आंकड़े रखे। कुल 396 सुरक्षा प्राप्त लोगों में से 366 लोगों को सरकारी खर्च पर सुरक्षा उपलब्ध कराई गई। वहीं 20 लोगों को भुगतान के आधार पर सुरक्षा प्रदान की गई। इसके अतिरिक्त 10 लोगों को आंशिक रूप से सरकारी खर्च और आंशिक रूप से भुगतान के आधार पर सुरक्षा उपलब्ध कराई गई।
इससे स्पष्ट है कि गैंगस्टरों से मिली धमकियों के मामलों में बड़ी संख्या में लोगों की सुरक्षा का खर्च सरकार स्वयं वहन कर रही है। 396 में से 366 लोगों के लिए सरकारी स्तर पर सुरक्षा खर्च उठाया जाना इस व्यवस्था के बड़े हिस्से को दर्शाता है।

व्यापारिक वर्ग पर विशेष सुरक्षा दबाव

आंकड़ों में सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि सुरक्षा प्राप्त करने वालों में लगभग 85 प्रतिशत व्यापारी हैं। 396 में 338 व्यापारियों की संख्या यह बताती है कि गैंगस्टर धमकियों के मामलों में कारोबारी समुदाय प्रमुख रूप से प्रभावित वर्ग के रूप में सामने आया है।
हरियाणा में व्यापारिक गतिविधियों और निवेश के विस्तार के बीच कारोबारियों की सुरक्षा का मुद्दा प्रशासन के लिए भी महत्वपूर्ण है। व्यापारियों को धमकी मिलने की स्थिति में पुलिस के सामने एक ओर संबंधित व्यक्ति की व्यक्तिगत सुरक्षा सुनिश्चित करने की चुनौती रहती है, वहीं दूसरी ओर धमकी के स्रोत और आपराधिक नेटवर्क तक पहुंचने की जिम्मेदारी भी रहती है।

सुरक्षा और पारदर्शिता के बीच संतुलन

विधानसभा में सरकार के जवाब से यह भी सामने आया कि सुरक्षा संबंधी मामलों में पारदर्शिता और गोपनीयता के बीच संतुलन बनाए रखने की कोशिश की जा रही है। सरकार ने कुल लाभार्थियों और तैनात सुरक्षाकर्मियों की संख्या सार्वजनिक की है, लेकिन व्यक्तिगत पहचान और सुरक्षा व्यवस्था का ब्योरा साझा नहीं किया।  ऐसे मामलों में विस्तृत जानकारी सार्वजनिक होने से संभावित अपराधियों को सुरक्षा घेरे की जानकारी मिलने का खतरा रहता है। इसलिए सरकार ने नाम और अन्य संवेदनशील विवरण रोकने का फैसला किया है।

विधानसभा के आंकड़ों ने खींचा ध्यान

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी द्वारा विधानसभा में दिए गए जवाब से सामने आए 396 लोगों और 691 सुरक्षाकर्मियों के आंकड़े प्रदेश की सुरक्षा व्यवस्था के एक महत्वपूर्ण पहलू को सामने लाते हैं। इनमें व्यापारियों की संख्या सबसे अधिक होना खास तौर पर उल्लेखनीय है। सरकार ने जहां सुरक्षा प्राप्त लोगों की पहचान को गोपनीय रखते हुए सुरक्षा कारणों को प्राथमिकता दी है, वहीं आंकड़ों के जरिए यह स्पष्ट किया है कि गैंगस्टर धमकियों के मामलों में प्रशासन की ओर से बड़े स्तर पर सुरक्षा उपलब्ध कराई जा रही है। अब निगाह इस बात पर रहेगी कि ऐसे मामलों में पुलिस कार्रवाई के साथ-साथ धमकी देने वाले आपराधिक नेटवर्क पर कितनी प्रभावी कार्रवाई होती है।

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