Edited By Gaurav Tiwari, Updated: 20 Nov, 2025 07:00 PM

हर माता-पिता की ख्वाहिश होती है कि उनका बच्चा ज़िंदगी में सफल हो। चाहे भारत के IIT में पढ़ाई हो या विदेश के हार्वर्ड में, उम्मीदें हमेशा बड़ी होती हैं, और सही भी है।
गुड़गांव ब्यूरो : हर माता-पिता की ख्वाहिश होती है कि उनका बच्चा ज़िंदगी में सफल हो। चाहे भारत के IIT में पढ़ाई हो या विदेश के हार्वर्ड में, उम्मीदें हमेशा बड़ी होती हैं, और सही भी है। लेकिन असली चुनौती तब आती है जब ये सपने पैसे की हकीकत से टकराते हैं। भारत में पढ़ाई के खर्चे हर साल लगभग 10% बढ़ रहे हैं, जो आम महंगाई से कहीं ज़्यादा है। अगर ऐसा ही चलता रहा, तो आज ₹20 लाख की डिग्री आपके बच्चे के 18 साल की उम्र में ₹80 लाख तक पहुंच सकती है। एडेलवाइस लाइफ के मुख्य वितरण अधिकारी अनुप सेठ के अनुसार ज़्यादातर परिवारों का पारंपरिक रास्ता यही होता है कि वे पढ़ाई के लिए लोन पर भरोसा करें। लोन अपने काम का होता है, लेकिन अक्सर यह बच्चों के करियर की शुरुआत में ही उन्हें बोझिल कर देता है और उन्हें अवसरों पर समझौता करना पड़ता है। सवाल यह है कि माता-पिता बिना किसी लोन के, बच्चों की पढ़ाई के लिए फंड कैसे तैयार करें?
इसका जवाब है लंबे समय के लिए संपत्ति बनाने में। ज़्यादातर माता-पिता अपने बच्चे का भविष्य तभी गंभीरता से सोचते हैं जब वह स्कूल में दाखिला लेता है। लेकिन असली ताकत कॉम्पाउंडिंग की होती है जब आप शुरुआत बहुत पहले, यानी बच्चे के जन्म के साल से ही कर दें। 17–18 साल के दौरान, थोड़ी-थोड़ी बचत भी सही जगह निवेश करने पर एक बड़ा फंड बन सकती है। एडेलवाइस लाइफ के मुख्य वितरण अधिकारी अनुप सेठ के अनुसार यहीं पर लाइफ इंश्योरेंस आधारित योजनाएँ अहम भूमिका निभा सकती हैं। उदाहरण के लिए, पार्टिसिपेटिंग इंश्योरेंस प्लान परिवारों को मार्केट से जुड़ी ग्रोथ का फायदा देते हुए गारंटीड बेनिफिट्स की सुरक्षा भी देते हैं। ये काफी समय तक महंगाई से बचाव करने में मदद करते हैं, जबकि फिक्स्ड डिपॉजिट या सेविंग अकाउंट जैसी चीज़ें असल में अपनी वैल्यू खो देती हैं। सबसे खास बात यह है कि ये अनुशासन सिखाते हैं। क्योंकि ये काफी समय तक काम करने वाले टूल हैं, माता-पिता इस लक्ष्य के प्रति प्रतिबद्ध रहते हैं और छोटी-मोटी ज़रूरतों के लिए फंड निकालने के लालच में नहीं पड़ते।
इंश्योरेंस आधारित एजुकेशन प्लानिंग की सबसे बड़ी ताकत इसका दोहरा फायदा है। यह केवल पैसे बढ़ाने तक ही सीमित नहीं है, बल्कि बच्चे के भविष्य को लाइफ कवर के जरिए सुरक्षित भी करता है। किसी अनहोनी की स्थिति में भी पॉलिसी यह सुनिश्चित करती है कि एजुकेशन फंड सुरक्षित रहे और योजना के मुताबिक चलता रहे। एडेलवाइस लाइफ के अनुप सेठ के अनुसार 20 साल का एजुकेशन फंड बनाने का मतलब यह नहीं कि सबसे ज्यादा रिटर्न सबसे कम समय में पाने की कोशिश करें। इसका मतलब है एक मजबूत, महंगाई-से-प्रभावित न होने वाला फंड तैयार करना, जिसमें अनुशासन और सुरक्षा दोनों शामिल हों। माता-पिता के लिए, सही लाइफ इंश्योरेंस टूल्स के साथ जल्दी शुरुआत करने का मतलब है कि वे अपने बच्चों को उनके सपनों को चुनने की आज़ादी दे सकते हैं, बिना किसी कर्ज के बोझ के।