शी स्पीक्स' के माध्यम से युवतियों ने सुरक्षित सार्वजनिक स्थानों के लिए बुलंद की आवाज

Edited By Gaurav Tiwari, Updated: 06 Mar, 2026 07:42 PM

through  she speaks  young women raise their voices for safe public spaces

विश्वविद्यालयों, युवा आंदोलनों और सामुदायिक संगठनों की युवतियों ने साझा किए अपने अनुभव

गुड़गांव ब्यूरो : अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर गुरुग्राम में 'शी स्पीक्स: हक, न्याय और बदलाव' कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इसमें विश्वविद्यालयों, युवा आंदोलनों और सामुदायिक संगठनों की युवतियों ने सार्वजनिक स्थानों पर अपने अनुभवों और चुनौतियों को साझा किया। राहगिरी फाउंडेशन और सेफटीपिन द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में छात्रों, युवा नेताओं, नागरिक समाज संगठनों, शहरी योजनाकारों और पुलिस प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया, ताकि सुरक्षा, गतिशीलता और शहरों तक पहुंच के संबंध में युवा महिलाओं के नजरिए को सीधे तौर पर समझा जा सके। यह आयोजन डिजिटल एम्पायरमेंट फाउंडेशन (डीईएफ इंडिया), जागोरी, सीक्वीन, गुड़गांव फर्स्ट, गर्ल अप, गुड़गांव की आवाज़ और कोहास की साझेदारी में संपन्न हुआ। इसमें समावेशी शहरी वातावरण बनाने की दिशा में एक सामूहिक प्रयास को दर्शाया गया। इस दौरान एसजीटी और सुशांत विश्वविद्यालय की छात्राओं सहित विभिन्न युवा संगठनों की प्रतिनिधियों ने सड़कों और परिवहन प्रणालियों में गुजरने वाले अपने दैनिक अनुभवों पर चर्चा की। इस मौके पर प्रतिभागियों ने कहा कि शहरों पर युवा महिलाओं का भी समान अधिकार होना चाहिए। साथ ही उनकी शिक्षा, काम और स्वतंत्रता के लिए सुरक्षित सार्वजनिक स्थान जरूरी हैं।

 

कार्यक्रम के दौरान एक इंटरैक्टिव 'वर्ल्ड कैफे' चर्चा का भी आयोजन हुआ, जहाँ कानूनी अधिकारों, डिजिटल सुरक्षा, शहरी गतिशीलता और समावेशी बुनियादी ढांचे जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर संवाद किया गया। सेफटीपिन और राहगिरी फाउंडेशन के प्रतिनिधियों ने इस बात को रेखांकित किया कि शहरों की कार्यप्रणाली को समझने और बेहतर योजना बनाने के लिए युवाओं, विशेषकर महिलाओं के अनुभवों को नीतियों में शामिल करना बेहद जरूरी है। कार्यक्रम का समापन एक 'यूथ वॉयस लिसनिंग पैनल' के साथ हुआ, जहाँ युवाओं ने शहर के हितधारकों के साथ सीधे संवाद कर अपने सुझाव रखे। कार्यक्रम में सोहना की महिला पुलिस प्रभारी (पीएसआई) सोनिया ने महिलाओं के खिलाफ अपराधों, विशेषकर डिजिटल अपराधों से एक कदम आगे रहने के महत्व पर प्रकाश डाला। गुरुग्राम के डीसीपी डॉ. अर्पित जैन ने कहा कि पुलिस संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान कर रही है और अपनी मौजूदगी बढ़ा रही है। जगह जगह कैमरे लगाए जा रहे हैं। नियंत्रण कक्ष स्थापित किए जा रहे हैं और महिलाओं की सुरक्षा की भावना को बेहतर बनाने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि हम गुरुग्राम को पूरे भारत के लिए एक उदाहरण बनाना चाहते हैं।

 

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    वहीं, एसजीटी विश्वविद्यालय के छात्रों ने गर्ल अप, सीओएचएएस और गुड़गांव की आवाज के युवा नेताओं के साथ मिलकर शहरी क्षेत्रों में आवागमन, सुरक्षा और अपनेपन की भावना से जुड़े अपने व्यक्तिगत अनुभव साझा किए। विश्वविद्यालय की एक छात्रा ने कहा कि हमारे परिवारों और समाज में सांस्कृतिक परिवर्तन उतना ही महत्वपूर्ण है जितना कि बुनियादी ढांचे में परिवर्तन। शहरों को हमें आजादी देनी चाहिए, न कि हमें हर दिन अपनी सुरक्षा से समझौता करने के लिए मजबूर करना चाहिए।

     

    गर्ल अप की एक युवा नेता ने कहा कि अगली पीढ़ी पहले से ही बदलाव का नेतृत्व कर रही है। उन्होंने कहा कि समाज को एक बेहतर न्याय व्यवस्था की जरूरत है। न्याय में देरी न्याय से वंचित करने के समान है। सेफ्टीपिन की शिवानी सिंघल ने वास्तविक अनुभवों को सुनने के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि डेटा हमें शहरों को समझने में मदद जरूर करता है, लेकिन वास्तविक अनुभव ही हमें बताते हैं कि सबसे ज्यादा बदलाव की जरूरत कहां है। युवा महिलाएं अपने जीवन के सफर की विशेषज्ञ हैं, और सुरक्षित शहर बनाने के लिए उनकी आवाज बेहद जरूरी है। वहीं राहगिरी फाउंडेशन की सबीहा अंसारी ने कहा कि मैं ऐसे समय में जीना चाहूंगी जहां मुझे घर सुरक्षित लौटने के लिए घड़ी न देखनी पड़े। अगर हम सचमुच समावेशी शहरी व्यवस्था चाहते हैं, तो युवाओं की आवाज को हाशिये से निकालकर निर्णय लेने की प्रक्रिया के केंद्र में लाना होगा।

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