आईएमटी मानेसर में हड़ताल की शुरुआत, उद्योगों पर संकट गहराया

Edited By Gaurav Tiwari, Updated: 07 Apr, 2026 07:50 PM

strike begins at imt manesar deepening crisis in industries

हरियाणा सरकार द्वारा वर्ष 2026 के बजट में न्यूनतम मजदूरी को 11,257 से बढ़ाकर 15,200 प्रति माह करने की घोषणा के बाद पूरे प्रदेश के औद्योगिक क्षेत्रों में भारी भ्रम की स्थिति पैदा हो गई है।

गुड़गांव, (ब्यूरो): हरियाणा सरकार द्वारा वर्ष 2026 के बजट में न्यूनतम मजदूरी को 11,257 से बढ़ाकर 15,200 प्रति माह करने की घोषणा के बाद पूरे प्रदेश के औद्योगिक क्षेत्रों में भारी भ्रम की स्थिति पैदा हो गई है। कर्मचारियों और मजदूरों के बीच यह धारणा तेजी से फैल रही है कि नई मजदूरी दरें 1 अप्रैल 2026 से लागू हो चुकी हैं, जबकि वास्तविकता इससे बिल्कुल अलग है। विशेषज्ञों के अनुसार, केवल बजट में की गई घोषणा से न्यूनतम मजदूरी लागू नहीं होती। इसके लिए लेबर डिपार्टमेंट द्वारा पहले आधिकारिक ड्राफ्ट तैयार किया जाता है और उसके बाद सरकार की ओर से विधिवत नोटिफिकेशन जारी किया जाता है। इसी नोटिफिकेशन में प्रभावी तिथि तय होती है। वर्तमान में ऐसी कोई आधिकारिक अधिसूचना जारी नहीं की गई है। इस भ्रम का सबसे बड़ा असर आईएमटी मानेसर में देखने को मिल रहा है, 

 

10000 फैक्ट्री पर असर 

बताया गया है की 8 से 10 हजार फैक्ट्रियों में कामकाज बाधित हो चुका है। कई स्थानों पर हड़ताल जैसी स्थिति बन गई है। उद्योगों में उत्पादन ठप होने की कगार पर है, जिससे करोड़ों रुपये के नुकसान की आशंका जताई जा रही है। औद्योगिक संगठनों का कहना है कि यदि समय रहते स्थिति स्पष्ट नहीं की गई, तो यह भ्रम गुड़गांव ही नहीं बल्कि पूरे हरियाणा के औद्योगिक क्षेत्रों में फैल सकता है। जिससे बड़े पैमाने पर औद्योगिक अशांति पैदा होने का खतरा है। आईएमटी मानेसर के संरक्षक पवन यादव ने इस स्थिति पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए कहा है कि लेबर डिपार्टमेंट के अधिकारी डीएलसी साउथ व डीएलसी नॉर्थ  को तुरंत सामने आकर आधिकारिक बयान जारी करना चाहिए।

 

विभाग को स्पष्ट रूप से बताना चाहिए कि नई न्यूनतम मजदूरी अभी लागू नहीं हुई है और इसे किस तिथि से लागू किया जाएगा। यदि प्रशासन ने जल्द हस्तक्षेप नहीं किया, तो यह स्थिति और बिगड़ सकती है तथा उद्योगों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। वर्तमान में आईएमटी मानेसर में हालात संवेदनशील बने हुए हैं और श्रमिकों के बीच भ्रम तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में प्रशासन की चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है और उद्योग जगत लेबर डिपार्टमेंट से तुरंत स्पष्टता की मांग कर रहा है। पवन यादव ने बताया कि जब तक लेबर डिपार्टमेंट की तरफ से आधिकारिक बयान ना आए पुलिस प्रशासन को तत्परता से उद्योगों पर नजर रखने की आवश्यकता है ताकि किसी भी अनहोनी को टाला जा सके।

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