तैयारी सही हुई तो समय पर दौड़ेगी मेट्रो

Edited By Gaurav Tiwari, Updated: 02 May, 2026 07:52 PM

if preparations are done properly the metro will run on time

गुरुग्राम में मेट्रो फेज-2 को लेकर उम्मीदें बढ़ रही हैं, लेकिन निर्माण शुरू होने से पहले ही जमीन, रास्ते और यूटिलिटी की स्पष्टता बड़ा मुद्दा बन गई है।

बादशाहपुर, ब्यूरो : गुरुग्राम में मेट्रो फेज-2 को लेकर उम्मीदें बढ़ रही हैं, लेकिन निर्माण शुरू होने से पहले ही जमीन, रास्ते और यूटिलिटी की स्पष्टता बड़ा मुद्दा बन गई है। गुरुग्राम मेट्रो रेल लिमिटेड ने हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण से सेक्टर-9 से साइबर सिटी कॉरिडोर के लिए राइट ऑफ वे का सीमांकन कराने को कहा है। इसका सीधा मतलब है कि मेट्रो निर्माण से पहले यह साफ होना जरूरी है कि सड़क, सर्विस लेन, डिवाइडर, यूटिलिटी लाइनें और आसपास की जमीन किस सीमा में आती हैं तथा कौन-सा हिस्सा सरकारी या निजी भूमि में है।

 

इस कदम को सकारात्मक नजरिए से देखें तो जीएमआरएल ने निर्माण शुरू होने से पहले ही संभावित बाधाओं की पहचान कर ली है। अगर एचएसवीपी समय पर सीमांकन कर देता है तो ठेकेदारों को कार्य स्थल तक पहुंचने, मशीनरी लगाने, यूटिलिटी शिफ्ट करने और ट्रैफिक डायवर्जन प्लान बनाने में आसानी होगी। इससे प्रोजेक्ट में अनावश्यक देरी कम हो सकती है। सेक्टर-9 से साइबर सिटी तक मेट्रो कनेक्टिविटी पुराने गुरुग्राम को रोजगार केंद्रों, औद्योगिक क्षेत्रों और कॉरपोरेट हब से बेहतर तरीके से जोड़ेगी। इससे निजी वाहनों पर निर्भरता घटेगी और भविष्य में ट्रैफिक दबाव भी कम हो सकता है।

 

सीमांकन में देरी तो निर्माण से पहले ही अड़चन :

दूसरी तरफ यह मामला चिंता भी बढ़ाता है। यदि अभी तक रास्ते की जमीन और यूटिलिटी कॉरिडोर की स्थिति स्पष्ट नहीं है, तो सवाल उठता है कि इतने बड़े प्रोजेक्ट की प्रारंभिक तैयारी कितनी मजबूत है। गुरुग्राम में पहले भी कई सड़क, फ्लाईओवर और अन्य इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट जमीन विवाद, बिजली-पानी-सीवर लाइन शिफ्टिंग और विभागों के आपसी तालमेल की कमी के कारण देरी का सामना कर चुके हैं। अगर यही स्थिति मेट्रो फेज-2 में बनी तो शहरवासियों को लंबे समय तक खुदाई, बैरिकेडिंग और ट्रैफिक जाम झेलना पड़ सकता है।

 

सबसे बड़ा सवाल जनता को राहत कब मिलेगी :

गुरुग्राम पहले से जाम, पार्किंग, अव्यवस्थित सार्वजनिक परिवहन और बढ़ते निजी वाहनों के दबाव से जूझ रहा है। मेट्रो फेज-2 शहर के लिए राहत का रास्ता बन सकता है, लेकिन यह तभी संभव है जब सभी विभाग समयबद्ध तरीके से काम करें। एचएसवीपी, जीएमआरएल, नगर निगम, ट्रैफिक पुलिस और यूटिलिटी एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय जरूरी है। राइट ऑफ वे का सीमांकन केवल तकनीकी प्रक्रिया नहीं, बल्कि पूरे मेट्रो प्रोजेक्ट की नींव है। अगर नींव मजबूत हुई तो गुरुग्राम को आधुनिक परिवहन सुविधा मिलेगी। अगर देरी हुई तो मेट्रो का सपना फिर फाइलों, सीमांकन और विभागीय पत्राचार में उलझ सकता है।

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