HPSC में सदस्य पद 2 माह से खाली, आयोग में संभावित फेरबदल को लेकर बढ़ी चर्चाएं

Edited By Manisha rana, Updated: 19 Jun, 2026 11:34 AM

the post of member in hpsc is vacant for 2 months

हरियाणा की प्रमुख संवैधानिक भर्ती संस्था हरियाणा लोक सेवा आयोग (एचपीएससी) में सदस्य का एक पद पिछले करीब दो महीनों से रिक्त पड़ा हुआ है। आयोग के सदस्य रहे राजेंद्र कुमार का कार्यकाल 16 अप्रैल 2026 को समाप्त हो गया था, लेकिन उनके स्थान पर अभी तक नई...

चंडीगढ़ (धरणी) : हरियाणा की प्रमुख संवैधानिक भर्ती संस्था हरियाणा लोक सेवा आयोग (एचपीएससी) में सदस्य का एक पद पिछले करीब दो महीनों से रिक्त पड़ा हुआ है। आयोग के सदस्य रहे राजेंद्र कुमार का कार्यकाल 16 अप्रैल 2026 को समाप्त हो गया था, लेकिन उनके स्थान पर अभी तक नई नियुक्ति नहीं हो सकी है। ऐसे में आयोग की भावी संरचना और संभावित नियुक्तियों को लेकर प्रशासनिक एवं राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। स्थिति इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि आयोग के अध्यक्ष आलोक वर्मा का कार्यकाल भी इसी वर्ष अक्टूबर में पूरा होने जा रहा है। ऐसे में आने वाले महीनों में आयोग के शीर्ष नेतृत्व में बदलाव की संभावना जताई जा रही है।

आयु सीमा पूरी होने से समाप्त हुआ सदस्य का कार्यकाल

संविधान के अनुच्छेद 316(2) के अनुसार राज्य लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों का कार्यकाल नियुक्ति की तिथि से छह वर्ष अथवा 62 वर्ष की आयु पूरी होने तक, जो भी पहले हो, निर्धारित किया गया है। राजेंद्र कुमार को 23 सितंबर 2022 को आयोग का सदस्य नियुक्त किया गया था। सामान्य परिस्थितियों में उनका कार्यकाल सितंबर 2028 तक चलता, लेकिन 62 वर्ष की आयु पूरी होने के कारण उनका कार्यकाल 16 अप्रैल 2026 को समाप्त हो गया। इसके बाद से आयोग में एक सदस्य पद खाली है।

वर्तमान में आयोग की क्या है स्थिति

हरियाणा लोक सेवा आयोग में अध्यक्ष के अतिरिक्त पांच सदस्य पद स्वीकृत हैं। वर्तमान में आलोक वर्मा आयोग के अध्यक्ष हैं, जबकि आनंद कुमार शर्मा, ज्योति बैंदा, ममता यादव और डॉ. सोनिया त्रिखा सदस्य के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। राजेंद्र कुमार के सेवानिवृत्त होने के बाद आयोग में एक सदस्य का पद रिक्त है, जिससे आयोग की पूर्ण संरचना फिलहाल अधूरी बनी हुई है।

संवैधानिक प्रावधानों के तहत नियुक्ति का दायरा व्यापक

पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के अधिवक्ता एवं संवैधानिक मामलों के जानकार हेमंत कुमार के अनुसार संविधान के अनुच्छेद 316(1) के तहत आयोग में कम-से-कम आधे सदस्य ऐसे होने चाहिए, जिन्होंने नियुक्ति से पहले केंद्र या राज्य सरकार में न्यूनतम दस वर्ष तक सेवा की हो। उनका कहना है कि यदि यह संवैधानिक शर्त वर्तमान संरचना में पूरी हो रही है तो सरकार के पास गैर-सरकारी पृष्ठभूमि वाले किसी योग्य व्यक्ति को भी आयोग का सदस्य नियुक्त करने का विकल्प उपलब्ध है।

क्या सरकार घटा सकती है सदस्यों की संख्या?

विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार के पास आयोग की संरचना में बदलाव का विकल्प भी मौजूद है। हेमंत कुमार के अनुसार हरियाणा लोक सेवा आयोग (सेवा की शर्तें) विनियम, 2018 में संशोधन कर सदस्यों की संख्या पांच से घटाकर चार की जा सकती है। उन्होंने बताया कि पूर्व में आयोग में सदस्यों की संख्या आठ से घटाकर पांच की जा चुकी है। ऐसे में भविष्य में आवश्यकता और परिस्थितियों के अनुसार संरचनात्मक बदलाव की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता।

सचिव की पुनर्नियुक्ति ने बढ़ाई अटकलें

एचपीएससी के सचिव मुकेश आहूजा 31 मार्च 2026 को भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) से सेवानिवृत्त हो गए थे। सेवानिवृत्ति के बाद राज्य सरकार ने उन्हें तीन माह की पुनर्नियुक्ति प्रदान करते हुए 30 जून तक पद पर बनाए रखा है। इसी पुनर्नियुक्ति के बाद प्रशासनिक हलकों में यह चर्चा भी जोर पकड़ रही है कि कार्यकाल समाप्त होने के बाद उन्हें आयोग में सदस्य के रूप में जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है। हालांकि इस संबंध में सरकार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा या संकेत नहीं दिया गया है।

अक्टूबर से पहले महत्वपूर्ण हो सकते हैं सरकार के फैसले

आयोग में एक सदस्य पद पहले से रिक्त है और अध्यक्ष का कार्यकाल भी कुछ ही महीनों बाद समाप्त होने वाला है। ऐसे में आने वाले समय में सरकार द्वारा की जाने वाली नियुक्तियां एचपीएससी की भावी दिशा और कार्यप्रणाली तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। फिलहाल सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि सरकार रिक्त पद पर नई नियुक्ति करती है या आयोग की संरचना में कोई बड़ा प्रशासनिक बदलाव सामने आता है।

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