Edited By Manisha rana, Updated: 03 Jun, 2026 02:25 PM

नूंह जिले में साइबर अपराध लंबे समय से एक गंभीर चुनौती बना हुआ है। पुलिस की लगातार कार्रवाई और जागरूकता अभियानों के बावजूद जिले के 58 गांव अभी भी साइबर ठगी के हॉटस्पॉट के रूप में चिन्हित हैं।
नूंह (अनिल मोहनिया) : नूंह जिले में साइबर अपराध लंबे समय से एक गंभीर चुनौती बना हुआ है। पुलिस की लगातार कार्रवाई और जागरूकता अभियानों के बावजूद जिले के 58 गांव अभी भी साइबर ठगी के हॉटस्पॉट के रूप में चिन्हित हैं। इस समस्या पर प्रभावी नियंत्रण के लिए अब नूंह पुलिस ने एक नया कदम उठाते हुए इन गांवों के सरपंचों की जवाबदेही तय करने की पहल की है। इसके तहत संबंधित सरपंचों को नोटिस जारी कर साइबर अपराध रोकने में सक्रिय सहयोग करने के निर्देश दिए गए हैं।
सरपंचों को इन बातों का रखना होगा ध्यान
पुलिस का मानना है कि गांव स्तर पर जनप्रतिनिधियों की भागीदारी से साइबर अपराधियों की गतिविधियों पर नजर रखना और लोगों को जागरूक करना अधिक प्रभावी हो सकता है। नोटिस में स्पष्ट किया गया है कि सरपंच अपने गांवों में साइबर अपराध संबंधी गतिविधियों पर निगरानी रखें और पुलिस को आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराएं। साथ ही निर्देशों की अनदेखी करने पर नियमानुसार कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है।
हालांकि इस निर्णय पर कई सरपंचों ने आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि अपराधियों की पहचान और उनके नेटवर्क की जानकारी पुलिस के पास होती है, इसलिए अपराध रोकने की मुख्य जिम्मेदारी पुलिस प्रशासन की है। सरपंचों का यह भी मानना है कि उन्हें सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराने से गांवों में सामाजिक और राजनीतिक तनाव पैदा हो सकता है। इसके बावजूद उन्होंने पुलिस प्रशासन को पूरा सहयोग देने का आश्वासन दिया है।
पुलिस के अनुसार पिछले वर्ष तक जिले के लगभग 100 गांव साइबर अपराध के हॉटस्पॉट थे, जिनकी संख्या अब घटकर 58 रह गई है। यह कमी पुलिस की सक्रिय कार्रवाई का परिणाम है, लेकिन समस्या अभी भी पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है। चालू वर्ष में अब तक साइबर ठगी से जुड़े 116 मामले दर्ज किए जा चुके हैं, जबकि 158 आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है। इसके अलावा 146 मोबाइल फोन, 192 फर्जी सिम कार्ड और 23.66 लाख रुपये की बरामदगी भी की गई है। जिले के अधिकांश साइबर अपराध प्रभावित गांव राजस्थान सीमा से सटे क्षेत्रों में स्थित हैं। पुन्हाना उपमंडल के 49 गांव, फिरोजपुर झिरका क्षेत्र के छह गांव और नगीना क्षेत्र के तीन गांव इस सूची में शामिल हैं। पुलिस का कहना है कि साइबर अपराधियों तक फर्जी सिम कार्ड पहुंचाने वाले बाहरी लोगों और ट्रक चालकों के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जाएगी।
अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक वाईवीआर शशि शेखर के अनुसार पुलिस अधीक्षक डॉ. अर्पित जैन के निर्देश पर जिले के प्रत्येक थाने में साइबर टास्क फोर्स का गठन किया गया है। यह टीम साइबर अपराधियों की पहचान, निगरानी और गिरफ्तारी के लिए विशेष रूप से कार्य कर रही है। पुलिस का उद्देश्य केवल अपराधियों को गिरफ्तार करना ही नहीं, बल्कि साइबर ठगी के पूरे नेटवर्क को समाप्त करना है। साइबर अपराध आज केवल कानून-व्यवस्था का नहीं बल्कि सामाजिक जागरूकता का भी विषय बन चुका है। ऐसे में पुलिस, पंचायत प्रतिनिधियों और आम नागरिकों के संयुक्त प्रयासों से ही इस चुनौती पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है। नूंह पुलिस की यह नई पहल साइबर अपराध के खिलाफ सामूहिक जिम्मेदारी और सहभागिता का एक महत्वपूर्ण उदाहरण बन सकती है।
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