प्रदेश में 9 और स्मारकों को राज्य संरक्षित पुरातत्व धरोहर घोषित करने की तैयारी

Edited By Isha, Updated: 08 Aug, 2019 10:27 AM

rotected archaeological heritage

हरियाणा में 9 और स्मारकों को राज्य संरक्षित पुरातत्व धरोहर घोषित करने की तैयारी की गई है। अब तक राज्य में 34 स्मारक व स्थल ही राज्य संरक्षित पुरातत्व धरोहर और 91 केंद्र संरक्षित स्मारक व धरोहरें हैं। नए स्मारकों में कर्णकोट

चंडीगढ़ (अर्चना): हरियाणा में 9 और स्मारकों को राज्य संरक्षित पुरातत्व धरोहर घोषित करने की तैयारी की गई है। अब तक राज्य में 34 स्मारक व स्थल ही राज्य संरक्षित पुरातत्व धरोहर और 91 केंद्र संरक्षित स्मारक व धरोहरें हैं। नए स्मारकों में कर्णकोट भाटू फतेहाबाद, धरोंद खेड़ा जींद, नूंह का टोंब कॉम्पलैक्स, लोहारू किला भिवानी, नूंह की पुरानी तहसील बिल्डिंग, चूहीमल की छत्तरी नूंह, सती का तालाब पलवल, कासीराम हवेली होडल, पुरानी कचहरी पलवल को पुरातत्व धरोहर घोषित किए जाने की मंजूरी हरियाणा सरकार ने दे दी है। 

इससे इन स्मारक व स्थलों का संरक्षण तो किया ही जाएगा, साथ ही जिस स्थल से खुदाई के बाद प्राचीनतम अवशेष मिल सकते हैं,उसकी खुदाई का कार्य कर इतिहास से जुड़े तथ्यों को भी खंगाला जाएगा। सूत्रों का कहना है कि पुरातत्व विभाग के अधिकारियों ने हरियाणा के इन स्थलों का दौरा किया था और पाया था कि इन स्मारक व स्थलों को सहेजना जरूरी हो गया है। ये स्मारक संरक्षण के बगैर खराब हो सकते हैं। इतना ही नहीं,स्मारकों को सहेजने व संरक्षण के लिए विभाग द्वारा नई तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। आने वाली पीढिय़ां इतिहास से जुड़ी इन धरोहरों को जान सकें, इसको ध्यान में रखते हुए कई स्मारकों को भविष्य में विकसित भी किया जाएगा। 

पर्यटकों के आकर्षण को ध्यान में रख धरोहर की जाएगी विकसित 
हरियाणा के पुरातत्व संग्रहालय विभाग की डिप्टी डायरैक्टरडा. बनानी भट्टाचार्य का कहना है कि राज्य संरक्षित पुरातत्व धरोहरों में जल्द ही 9 नए स्मारक जुड़ जाएंगे। नए स्मारकों का न सिर्फ संरक्षण किया जाएगा, बल्कि उन्हें पर्यटकों के रुझान अनुरूप विकसित भी किया जाएगा। उन्होंने कहा कि हरियाणा में बेशुमार ऐतिहासिक धरोहर व स्थल हैं और आने वाली पीढिय़ां इन स्मारकों को तब देख सकेंगी जब इनकी दीवारों, मीनारों, मकबरों, गुंबदों को सहेज कर रखा जाए। पुरातत्व विभाग नियमित तौर पर इन स्थलों का दौरा करता रहता है और जरूरत मुताबिक स्थलों की मुरम्मत का काम करवाया जाता है।

उन्होंने कहा कि हाल ही में विभाग द्वारा पंचकूला में एक कार्यशाला का भी आयोजन किया गया था,जिसमें ऐतिहासिक स्मारक व धरोहरों के संरक्षण में इस्तेमाल होने वाली पुरातत्व व नूतन तकनीक पर विचार-विमर्श किया गया। आॢकयोलॉजी सर्वे ऑफ इंडिया दिल्ली के महासचिव डा. के.एन. दीक्षित का कहना है कि स्मारकों के संरक्षण के लिए बेशक आज बहुत सी नई तकनीकें आ चुकी हैं परंतु पुरानी तकनीकें भी धरोहरों के संरक्षण में आज भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।

कुरुक्षेत्र के बुद्धिस्ट स्तूप पर खर्च होंगे 6 करोड़ रुपए
कुरुक्षेत्र को अब तक सिर्फ महाभारत के युद्ध या श्रीमद् भागवत गीता के संदेश के साथ ही जोड़कर देखा जाता रहा है परंतु हरियाणा के पुरातत्व संग्रहालय विभाग ने कुरुक्षेत्र को बुौद्ध तीर्थ स्थल के साथ जोडऩे की तैयारियां भी शुरू कर दी हैं। कुरुक्षेत्र यूनिवॢसटी के नजदीक बने कुषाण काल,गुप्त काल,वर्धन काल से जुड़े बुद्धिस्ट स्तूप को तीर्थ स्थल व पर्यटक स्थल बनाने के लिए तैयार किए नक्शे को मंजूरी मिल गई है। पब्लिक वर्क डिपार्टमैंट और फॉरैस्ट डिपार्टमैंट को स्मारक स्थल का काम करने की जिम्मेदारी सौंप दी गई है। 6 करोड़ रुपए की लागत से इस स्मारक को विकसित करने का फैसला किया गया है।

यहां लोगों के लिए मैडीटेशन सैंटर बनाया जाएगा। पर्यावरण व स्थल की खूबसूरती को ध्यान में रखते हुए यहां कई तरह के पौधे लगाए जाएंगे। बुद्ध की 2 प्रतिमाएं भी यहां स्थापित की जाएंगी। प्रतिमाओं के निर्माण के लिए विभाग द्वारा एक वर्कशॉप आयोजित की जाएगी, जिसमें मूॢतकार व कलाकार हिस्सा लेकर प्रतिमाओं के निर्माण से जुड़े फैसले लेंगे। पर्यावरण मैत्री स्थल पर वाटर हार्वैसिं्टग से जुड़ा प्रोजैक्ट भी शुरू किया जाएगा।  

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