कोर्ट में 'जियो' का नेटवर्क फेल, अदालत में आकाश-ईशा अंबानी को पार्टी बनाया...कॉल करने को वकील खुले मैदान में जा रहे

Edited By Isha, Updated: 23 Jan, 2026 05:27 PM

reliance jio s network failed in court

जिला कोर्ट परिसर में मोबाइल नेटवर्क में आ रही दिक्कतों से परेशान वकीलों ने खुद कोर्ट में केस दायर कर दिया। टेलिकॉम कंपनी रिलायंस जियो के खिलाफ लोक अदालत में दायर याचिका में कंपनी के चेयरमैन आ

पानीपत(सचिन): जिला कोर्ट परिसर में मोबाइल नेटवर्क में आ रही दिक्कतों से परेशान वकीलों ने खुद कोर्ट में केस दायर कर दिया। टेलिकॉम कंपनी रिलायंस जियो के खिलाफ लोक अदालत में दायर याचिका में कंपनी के चेयरमैन आकाश अंबानी और मैनेजिंग डायरेक्टर ईशा अंबानी तक को पार्टी बनाया है।

याचिका में वकीलों ने कहा कि उनके चैंबरों में रेंज नहीं आती। मुवक्किल से बात करने के लिए खुले मैदान में जाना पड़ता है। याचिकाकर्ता ने कहा कि इससे अदालती कामों में अनावश्यक देरी होती है। बता दे कि अदालत ने याचिका पर सुनवाई करते हुए सभी को समन जारी कर जवाब तलब किया है। मामले की अगली सुनवाई 20 फरवरी को होनी सुनिश्चित की गई है।

दरअसल पानीपत कोर्ट परिसर में प्रैक्टिस करने वाले एडवोकेट अमित राठी पिछले काफी समय से जियो नेटवर्क की खराब सेवाओं से जूझ रहे थे। उन्होंने अपनी शिकायत में बताया कि कोर्ट परिसर, विशेष रूप से वकीलों के चेंबर, दो मुख्य कोर्ट बिल्डिंग और टाइपिस्ट कॉम्प्लेक्स में जियो का नेटवर्क पूरी तरह से ध्वस्त हो चुका है।

अमित राठी ने 'लीगल सर्विसेज अथॉरिटीज एक्ट, 1987' की धारा 22-C के तहत यह आवेदन दायर किया है, जो सार्वजनिक उपयोगिता सेवाओं में विवाद निपटान से संबंधित है। उनका कहना है कि एक बार किसी मामले में क्लाइंट ने फेसबुक से कुछ सबूत दिखाने थे। लेकिन नेटवर्क की दिक्कतों के चलते वे उस समय वह नहीं देख सके। इसके बाद उन्होंने मन बना लिया था कि वे अदालत का रुख करेंगे।

कॉल ड्रॉप और सिग्नल गायबः कोर्ट की इमारतों के भीतर मोबाइल सिग्नल इतने कमजोर हैं कि कॉल करना या रिसीव करना लगभग नामुमकिन हो गया है। वकीलों और मुवक्किलों को एक कॉल करने के लिए बिल्डिंग से बाहर खुले मैदान में जाना पड़ता है, जिससे समय की भारी बर्बादी होती है।

पानीपत कोर्ट के अन्य वकीलों ने भी इस पहल का समर्थन किया है। एडवोकेट अनिल रावल और पूर्व बार प्रधान शेरसिंह खर्ब का कहना है कि बार-बार कस्टमर केयर और स्थानीय अधिकारियों से शिकायत करने के बावजूद स्थिति जस की तस बनी हुई है।

वकीलों का आरोप है कि रिलायंस जियो जैसी बड़ी कंपनी का नेटवर्क एक जिला मुख्यालय के न्यायालय परिसर में विफल होना प्रशासनिक लापरवाही का चरम है। इस मामले की अगली सुनवाई स्थायी लोक अदालत में होगी, जहां रिलायंस जियो को अपना पक्ष रखना होगा। यह मामला न केवल पानीपत बल्कि देश भर के उन उपभोक्ताओं के लिए एक मिसाल बन सकता है जो टेलीकॉम कंपनियों की खराब सेवाओं से त्रस्त हैं, लेकिन कानूनी रास्ता अपनाने से हिचकिचाते हैं। शेर सिंह खरकने कोर्ट परिसर में जिओ कंपनी का टावर लगाने और जल्द ही जिओ की सेवाओं को सुचारू रूप से चलाने की मांग की है।
 

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