Edited By Harman, Updated: 17 Jul, 2026 02:40 PM

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जींद से देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर एक नया इतिहास रच दिया है। जींद- सोनीपत रेलखंड पर शुरू की गई हाइड्रोजन ट्रेन देश की पहली और एशिया की सबसे लंबी हाइड्रोजन ट्रेन मानी जा रही है। यह परियोजना 'मेक इन...
हरियाणा डेस्क : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जींद से देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन को हरी झंडी दिखाकर एक नया इतिहास रच दिया है। जींद- सोनीपत रेलखंड पर शुरू की गई हाइड्रोजन ट्रेन देश की पहली और एशिया की सबसे लंबी हाइड्रोजन ट्रेन मानी जा रही है। यह परियोजना 'मेक इन इंडिया' और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भारत की बढ़ती तकनीकी क्षमता का प्रतीक है।
2,638 यात्रियों की क्षमता, 1,200 KW फ्यूल सेल...
नई हाइड्रोजन ट्रेन में 1,200 किलोवाट क्षमता का अत्याधुनिक हाइड्रोजन फ्यूल सेल सिस्टम लगाया गया है। ट्रेन एक बार में 2,638 यात्रियों को लेकर सफर कर सकेगी। इसकी अधिकतम गति 110 से 140 किलोमीटर प्रति घंटा तक होगी, जिससे यात्रियों का सफर पहले की तुलना में कहीं अधिक तेज और सुविधाजनक बनेगा।
रूट और टाइमिंग
जींद से सोनीपत का सफरयह देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन हरियाणा के जींद और सोनीपत के बीच 89 किलोमीटर लंबे रूट पर चलाई जाएगी। यह ट्रेन जींद से सोनीपत के बीच कुल 12 स्टेशनों (जैसे गोहाना, बुताना, मोहाना आदि) पर रुकेगी। यह ट्रेन 89 किलोमीटर का सफर करीब 2 घंटे में तय करेगी। इस सफ़र के दौरान, ट्रेन जींद शहर, पांडु पिंडारा जंक्शन, ललित खेड़ा, भाम्बेओ, ईसापुर खेड़ी, बुटाना, खंडराई, गोहाना जंक्शन, राबरह, लाठ, मोहाना हरियाणा और बड़वासनी से होकर गुज़रेगी। सामान्य ट्रैक पर इसकी अधिकतम परिचालन गति 75 किमी/घंटा होगी, हालांकि इसे 110 किमी/घंटा की टॉप स्पीड के लिए डिजाइन किया गया है।
₹5 से ₹25 में मिलेगा हाईटेक सफर
रेलवे ने अत्याधुनिक तकनीक से लैस इस ट्रेन का किराया भी आम यात्रियों को ध्यान में रखकर निर्धारित किया है। यात्रा के लिए न्यूनतम ₹5 और अधिकतम ₹25 तक का किराया रखा गया है, जिससे आम लोगों को भी आधुनिक, पर्यावरण-अनुकूल और तेज परिवहन सुविधा का लाभ मिल सकेगा।
भारत बना पांचवा देश
भारत दुनिया का पांचवां ऐसा देश बनने जा रहा है, जिसने अपनी पटरियों पर हाइड्रोजन ईंधन से चलने वाली ट्रेन उतार दी है। इससे पहले जर्मनी, चीन, जापान और अमेरिका जैसे गिने-चुने देशों ने ही इस तकनीक का सफल इस्तेमाल किया है। यह पूरी तरह से 'मेक इन इंडिया' के तहत स्वदेशी तकनीक से तैयार की गई ट्रेन है।