पांच दशक की सक्रिय राजनीति में विज ने खुद की वर्किंग से 7 बार जीते चुनाव, भाजपा सरकार में 3 बार बने केबिनेट मंत्री

Edited By Yakeen Kumar, Updated: 05 Jan, 2026 07:28 PM

in five decades of active politics vij won elections seven times through his ow

हरियाणा में बीजेपी की राजनीति के पिछले करीब पांच दशक से प्रमुख चेहरे हरियाणा के सबसे सीनियर विधायक परिवहन, ऊर्जा और श्रम मंत्री अनिल विज भाजपा सरकार में

चंडीगढ़ (चन्द्र शेखर धरणी) :  हरियाणा में बीजेपी की राजनीति के पिछले करीब पांच दशक से प्रमुख चेहरे हरियाणा के सबसे सीनियर विधायक परिवहन, ऊर्जा और श्रम मंत्री अनिल विज भाजपा सरकार में 2014 में, 2019 में व अब 2024 में कैबिनेट मंत्री के पद पर हैं। देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अनिल विज का सामन्जसय कोई नया नहीं है। लाल चौक कश्मीर में जब भाजपा के तत्कालीन नेता तिरंगा झंडा लहराने के लिए जा रहे थे, उस यात्रा में नरेंद्र मोदी के साथ अनिल विज का लगाव सबने देखा था। 

अनिल विज हरियाणा के उन राजनीतिक लोगों में से एक है, जो अपने संबंधों का ढींढोरा पिटने के आदि नहीं है। पांच दशक की लंबी राजनीतिक पारी खेलने वाले अनिल विज भाजपा की हैट्रिक लगने के बाद सत्ता पक्ष में एक मात्र ऐसे विधायक और मंत्री है, जो हरियाणा के बहुत सारे लोग जब उनसे मिलने आते हैं तो उन्हें उनका नाम लेकर संबोधित करते हैं। आरएसएस, विश्व हिंदू परिषद और जनसंघ की पृष्ठभूमि से जुड़े अनिल विज ने भाजपा की राजनीति की बहुत सारे उतार-चढ़ाव देखे हैं। हरियाणा की विधानसभा में जब भाजपा के दो व चार विधायक हुआ करते थे, उस समय भी अनिल विज विधायक थे और विपक्ष के विधायक के रूप में सदन के भीतर इनकी आक्रामक भूमिका सबने देखी है। 

छात्र राजनीति से की शुरूआत

15 मार्च 1953 को जन्मे अनिल विज राजनीति में आने से पहले राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की छात्र शाखा में थे। अनिल विज ने अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के जरिए छात्र राजनीति में कदम रखा। वह एसडी कॉलेज, अंबाला कैंट में पढ़ते हुए राजनीति में एक्टिव रहे। 1970 में एबीवीपी ने अनिल विज को महासचिव बनाया। अनिल विज ने विश्व हिंदू परिषद, भारत विकास परिषद बीएमएस और ऐसे अन्य संगठनों के साथ सक्रिय रूप से काम किया। अनिल विज 1974 में भारतीय स्टेट बैंक में नौकरी करने लगे लेकिन बीजेपी से जुड़े रहे।

सुषमा स्वराज की जगह लड़े उपचुनाव
1990 में जब सुषमा स्वराज राज्यसभा के लिए चुनी गईं तो अंबाला छावनी की सीट खाली हो गई। अनिल विज ने बैंक की नौकरी से इस्तीफा दे दिया और सुषमा स्वराज की सीट से उपचुनाव लड़े। अनिल विज यह उपचुनाव जीत गए। करीब 34 साल पहले 27 मई 1990 को तत्कालीन सातवीं हरियाणा विधानसभा में दो रिक्त हुई सीटों पर उपचुनाव हुए थे। उस समय ओम प्रकाश चौटाला मुख्यमंत्री हुआ करते थे। तब दडवा कला हलके से जनता दल की टिकट पर पूर्व मुख्यमंत्री ओम प्रकाश चौटाला और अंबाला कैंट से अनिल कुमार विज विधायक निर्वाचित हुए थे। तब अनिल विज की आयु 37 वर्ष की थी। बैंक की नौकरी छोड़कर राजनीति में आए अनिल विज 2019 में हुए 14वीं विधानसभा के चुनाव में लगातार तीसरी बार और कुल छठी बार अंबाला छावनी से चुनाव जीते थे। 

अपनी पार्टी बनाकर भी नहीं छूटा बीजेपी प्रेम
अनिल विज एक अप्रैल 1996 तथा फऱवरी 2000 में हुए दो विधानसभा चुनावों में निर्दलीय के रूप में अंबाला कैंट से विधायक बने। 2005 में विधानसभा के आम चुनाव में अनिल विज 615 वोट से अपनी हैट्रिक बनाने से चूक गए। 2007 में उन्होंने विकास परिषद के नाम से अपनी एक अलग राजनीतिक पार्टी भारतीय चुनाव आयोग से पंजीकृत करवाई। 2009 में हरियाणा विधानसभा के आम चुनाव से पहले भाजपा के राष्ट्रीय नेतृत्व द्वारा उन पर फिर से भरोसा जताया गया और उन्हें भाजपा की टिकट दी गई। विज 2009, 2014, 2019 में लगातार तीन बार विधायक बने और अपनी हैट्रिक लगाई। अब 2024 में विज ने अंबाला कैंट से लगातार चौथी बार और कुल सातवीं बार जीत दर्ज की है।

बंसीलाल-चौटाला के मंत्री के ऑफर को भी ठुकरा चुके हैं विज
अनिल विज अंबाला कैंट विधानसभा से सातवीं बार विधायक चुने गए हैं। वह पिछले 11 साल से हरियाणा की बीजेपी सरकार में कैबिनेट मंत्री है। अनिल विज अपने सक्रिय राजनीतिक जीवन में भाजपा के अलावा कभी किसी अन्य राजनीतिक दल में शामिल नहीं हुए। 1996 में बंसीलाल जब हरियाणा के मुख्यमंत्री थे, उनके द्वारा मंत्री बनाए जाने के ऑफर को भी विज ने ठुकरा दिया था और सन 2000 में ओमप्रकाश चौटाला के नेतृत्व में प्रदेश में इनेलो की सरकार थी, चौटाला ने पार्टी के दो दिग्गज पंजाबी नेताओं अशोक अरोड़ा और ओमप्रकाश महाजन की जिम्मेदारी अनिल विज को पार्टी ज्वाइन करने के लिए मनाने को दी थी। मनाए जाने पर इनाम के रूप में ना केवल अनिल विज को बल्कि ओपी महाजन को भी मंत्री बनाया जाना था। इस कोशिश में महाजन 2 दिन तक विज के निवास पर डटे रहे, लेकिन उस समय भी उनके पथ- सोच और विचारधारा से अलग नहीं कर पाए।

अनिल विज एक बेहद साधारण परिवार से संबंध 
हरियाणवी राजनीति में एक बड़ा नाम अनिल विज एक बेहद साधारण परिवार से संबंध रखते हैं। राजनीति से कभी कोई सरोकार न रखने वाले इस परिवार में जन्मे अनिल विज ने 37 साल की उम्र में अपने दम पर राजनीति में पैर रखे और 7 बार चुनाव जीत चुके अनिल विज आज बेहद जनप्रिय नेता बन चुके हैं। बैंक की नौकरी को छोड़ पहली बार 27 मई 1990 को अंबाला कैंट उपचुनाव में जीत दर्ज कर विधायक बने। लेकिन राजनीति से पहले भी लोगों की मदद करना, लोगों के दुख दर्द में शामिल होना उनकी आदतों में शुमार रहा। वह कर्मचारी होने के बावजूद जनसेवा में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते रहते थे। जोकि आज तक उन्होंने अपनी इस आदत को बरकरार रखा है।1990 में उनके पहली बार विधायक बनने के बाद अप्रैल 1991 में हरियाणा विधानसभा समय पूर्व ही भंग कर दी गई थी।

 कुछ वर्ष बाद किसी कारण अनिल विज ने भाजपा का त्याग कर दिया और अप्रैल 1996 और फरवरी 2000 में वह निर्दलीय विधायक बने। वर्ष 2007 में एक राजनीतिक पार्टी ''विकास परिषद" का गठन कर विज ने नारा दिया, काम किया था-काम करेंगे। ज्यादा मान-मनव्वल पर अक्टूबर 2009 में फिर से भाजपा में शामिल हुए और 2009-14 और 2019 के विधानसभा चुनाव में लगातार तीन बार चुनाव जीतकर उन्होंने हैट्रिक लगाई। विज हमेशा स्वार्थ और लालच की राजनीति से दूर रहे और जनता का दुख दर्द हमेशा उनके लिए दुखदाई रहा।
        ओम प्रकाश चौटाला सरकार में बतौर विधायक जब अनिल विज को अन्य विधायकों की तरह विधानसभा में लेपटॉप प्रथम बार मिला तो अनिल विज ने तब भी इंडिया नेट के नाम से एक पोर्टल बनाया था।मगर चुनावी राजनीति में व्यस्तता के चलते समयाभाव के कारण वह बंद कर दिया था।

सिंगल मैन आर्मी क्यों

अनिल विज सिंगल मैन आर्मी किस लिए कहे जाते हैं, इसका एक अहं कारण यह भी है कि अनिल विज जब विधायक बने उसके बाद से लगातार खुद ही अपने प्रेस नोट लिखकर मीडिया को देते रहे तथा जैसे-जैसे समय परिवर्तित होता रहा वह समाचार आदान-प्रदान के संसाधन भी बदलते रहे इस प्रकार अनिल विज भी फैक्स तथा ई-मेल भी खुद ही अपने समाचार लिखकर मीडिया को भेजने का काम करते रहे। अनिल विज ने मंत्री बनने से पहले कभी भी अपने प्रश्नोत्तरी या सूचनाओं आधार प्रदान करने के लिए किसी को भी कोई जिम्मेदारी नहीं दी।अनिल विज जो कि अपने फेसबुक ट्विटर तथा सोशल मीडिया के सभी प्लेटफॉर्मों को खुद हैंडल करते हैं समय-समय पर इनका उपयोग भी करते रहते हैं। आज भी जब उन्हें समय मिलता है तो किसी भी करंट मुद्दे पर अपने प्रेस नोट लिख कर खुद ही व्हाट्सएप्प के माध्यम से मीडिया को भेजते रहते हैं।
अनिल विज कहते हैं कि मैं किसी की प्रशंसा का मोहताज नहीं। मैं वर्कर हूं और अपना काम करता हूं। मैं काम करते हुए अपने आपको देखता हूं कि मैं ठीक करूं। कोई मेरे काम को सराहे - जले या विरोध करें, मुझे इससे कोई फर्क नहीं पड़ता।

टेक्नोलॉजी के मास्टर विज
 
अनिल विज का मानना है कि सरकारी तंत्र के माध्यम किए जाने वाले पत्राचार की स्पीड काफी धीमी होने के कारण आदेश और दिशा निर्देश की पालना में काफी वक्त लगता है। लेकिन टेक्नोलॉजी का प्रयोग कर तुरंत प्रभाव से अधिकारियों तक बात पहुंचाई जा सकती है। वही सोशल मीडिया के माध्यम से जनता को भी पता चलता है कि सरकार क्या कर रही है। इससे सरकार द्वारा की गई कार्यवाही में भी पारदर्शिता नजर आती है। कुछ साल  पहले करोना में अस्वस्थ होने पर वह अस्पताल में भी इसके जरिए अपने विभिन्न विभागों को नियंत्रित करते रहे थे। 

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