पिंडी रूप में यूपी से नमक की बोरी में त्रिलोकपुर आई थी मां बाला सुंदरी, जानें पूरा इतिहास

Edited By Manisha rana, Updated: 24 Nov, 2025 02:29 PM

history of maa bala sundari temple

हिमाचल सिरमौर जिला से सटे हरियाणा के अंतिम शहर काला अंब से लगभग 5:30 किलोमीटर की दूरी पर गांव त्रिलोकपुर में महामाया मां बाला सुंदरी का एक आलौकिक मंदिर है।

गुहला/चीका/कुरुक्षेत्र (कपिल) : हिमाचल सिरमौर जिला से सटे हरियाणा के अंतिम शहर काला अंब से लगभग 5:30 किलोमीटर की दूरी पर गांव त्रिलोकपुर में महामाया मां बाला सुंदरी का एक आलौकिक मंदिर है। इस मंदिर की देख- रेख खुद हिमाचल सरकार करती है जहां कि विशेष कवरेज पंजाब केसरी संवाददाता कपिल शर्मा ने की। आईए जानते हैं क्या है इस मंदिर से जुड़ा इतिहास।

माँ बाला सुंदरी त्रिलोकपुर की कहानी सदियों पुरानी और लोक आस्था से जुड़ी हुई है। ऐसी मान्यता है कि वर्ष 1573 में सिरमौर (हिमाचल प्रदेश) के त्रिलोकपुर गांव के लाला रामदास नामक व्यापारी देवबंद (उत्तर प्रदेश) से नमक के बोरे लाए थे। उनमें से एक बोरी का नमक कभी खत्म नहीं होता था, चाहे जितना भी निकालें। यह देखते हुए रामदास को देवी का दिव्य साक्षात्कार हुआ, जिसमें माँ बाला सुंदरी स्वयं प्रकट हुईं और आदेश दिया कि त्रिलोकपुर में उनका मंदिर बनवाया जाए।

ये है मुख्य कथा

व्यापारी लाला रामदास को रात में सपना आया जिसमें माँ बाला सुंदरी ने प्रकट होकर बताया कि वह देवबंद से आई हैं और वे उस नमक के बोरे में पिंडी रूप में विराजमान हैं। माँ के आदेश पर लाला रामदास ने यह बात सिरमौर रियासत के तत्कालीन शासक राजा प्रदीप प्रकाश तक पहुँचाई। राजा को भी माँ ने स्वप्न में आदेश दिया। इसके बाद जयपुर (राजस्थान) से कारीगर बुलवाए गए और 1573 ई. में त्रिलोकपुर में संगमरमर का भव्य मंदिर बनवाया गया। बाद में महाराजा फतेह प्रकाश (1823) और महाराजा रघुबीर प्रकाश (1851) ने मंदिर का पुन:जीर्णोद्धार करवाया। 

मंदिर से जुड़ी क्या है मान्यताएं

माँ बाला सुंदरी को शक्ति, समृद्धि और रक्षा की देवी के रूप में पूजा जाता है- श्रद्धालुओं की मान्यता है कि यहाँ पूजा करने वालों की मनोकामना पूरी होती है तथा माँ अपने भक्तों की हर संकट में रक्षा करती हैं। त्रिलोकपुर के मंदिर परिसर में माता के बाल (बाल्यावस्था) रूप की प्रतिमा स्थापित है।

अन्य प्रमुख जानकारी - त्रिलोकपुर क्षेत्र में तीन शक्ति मंदिर त्रिकोण में स्थित हैं: बाला सुंदरी, भगवती ललिता देवी और त्रिपुर भैरवी- इस मंदिर का ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व हिमाचल प्रदेश ही नहीं, उत्तर भारत में भी अत्यंत व्यापक है। यह कहानी श्रद्धा, आस्था और दिव्यता का परिचायक है, जिसमें माँ बाला सुंदरी का चमत्कार और शक्ति भक्तों के लिए प्रेरणा बनी हुई है। माता बाला सुंदरी के अलौकिक मंदिर में हरियाणा, पंजाब, दिल्ली, राजस्थान, हिमाचल, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और अन्य कई राज्यों से श्रद्धालु माता देखने के लिए पहुंचते हैं। इस अलौकिक मंदिर की मान्यता दूर दराज तक है।

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