हरियाणा की धरती गुरुओं की भूमि... गुरु तेग बहादुर जी के शहीदी दिवस पर बोले सीएम सैनी

Edited By Deepak Kumar, Updated: 25 Nov, 2025 04:47 PM

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सीएम सैनी ने कहा कि गुरु तेग बहादुर जी ने धर्म की रक्षा के लिए अपना शीश कुर्बान कर दिया था। उनका बलिदान न होता तो आज का भारत कैसा होता, इसकी कल्पना करना मुश्किल है।

कुरुक्षेत्र: कुरुक्षेत्र के ज्योतिसर में आज गुरु तेग बहादुर जी के 350वें शहीदी दिवस के अवसर पर भव्य कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस अवसर पर हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी उपस्थित रहे। सीएम सैनी ने गुरु तेग बहादुर जी को याद करते हुए कहा कि उनके संदेश आज भी उतने ही प्रभावशाली हैं, जितना 350 साल पहले थे। उन्होंने कहा, "भारत की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत में यदि कोई शख्सियत सदियों से अटल, चमकदार और अमर रही है, तो वह हैं श्री गुरु तेग बहादुर जी। उन्हें इंसानियत के सच्चे रक्षक, ज़ुल्म के खिलाफ अदम्य साहस के प्रतीक और धार्मिक आजादी के महान संरक्षक के रूप में माना जाता रहा है। उनका बलिदान किसी एक समुदाय के लिए नहीं, बल्कि पूरी इंसानियत के लिए था।"

सीएम ने मीडिया से बातचीत में बताया कि गुरु तेग बहादुर जी का बचपन का नाम त्यागमल था और वे छठे गुरु श्री हरगोबिंद साहिब जी और माता नानकी जी के पुत्र थे। उनका जन्म 1 अप्रैल 1621 को अमृतसर में हुआ था, जहां आज गुरुद्वारा 'गुरु का महल' स्थित है। उन्होंने कहा कि जब-जब मानवता पर अत्याचार हुए, तब महापुरुषों का अवतरण हुआ। गुरु जी के समय मुगल बादशाह औरंगजेब के इस्लामीकरण के प्रयासों से त्रस्त कश्मीरी पंडितों ने आनंदपुर साहिब में उनकी रक्षा की विनती की।
 
सीएम सैनी ने कहा कि गुरु तेग बहादुर जी ने धर्म की रक्षा के लिए अपना शीश कुर्बान कर दिया था। उनका बलिदान न होता तो आज का भारत कैसा होता, इसकी कल्पना करना मुश्किल है। उन्होंने कहा कि हरियाणा की धरती गुरुओं और संतों की भूमि रही है, जहां कुरुक्षेत्र की पवित्र भूमि पर महाभारत का युद्ध लड़ा गया और श्रीकृष्ण ने गीता का उपदेश दिया।

सीएम ने अपनी बात में ‘संत-महापुरुष सम्मान एवं चिंतन प्रसार योजना’ का जिक्र भी किया, जिसके माध्यम से गुरु नानक देव, गुरु तेग बहादुर, गुरु गोबिंद सिंह, बाबा बंदा सिंह बहादुर, धन्ना भगत, कबीर, नामदेव और रविदास जैसे महापुरुषों के विचारों का प्रचार किया जा रहा है।

इसके अलावा सीएम ने बताया कि सिरसा के चौधरी देवीलाल विश्वविद्यालय में गुरु तेग बहादुर चेयर स्थापित की गई। अंबाला पॉलिटेक्निक का नामकरण किया गया। करनाल में गुरु तेग बहादुर मेमोरियल, टोहाना-जीन-नारनौल मार्ग को ‘गुरु तेग बहादुर मार्ग’ और कैथल में ‘गुरु तेग बहादुर वन’ की स्थापना की गई। यमुनानगर के किशनपुरा में कृषि महाविद्यालय की स्थापना भी गुरु जी के संदेश को पीढ़ियों तक पहुंचाने के लिए की गई। सीएम ने कहा कि इन पहलों के माध्यम से गुरु जी का त्याग और इंसानियत का संदेश आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचता रहेगा।
 

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