सीवर सफाई मौत के मामले में मानवाधिकार आयोग सख्त, पुलिस प्रक्रिया पर सवाल, SP-DSP और DDA तलब

Edited By Yakeen Kumar, Updated: 28 Jan, 2026 03:55 PM

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हांसी में एक होटल की सीवर लाइन की सफाई के दौरान 2 व्यक्तियों की मौत के मामले में हरियाणा मानवाधिकार आयोग ने पुलिस जांच को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। आयोग ने इस जांच को पक्षपातपूर्ण, संदेहास्पद और वास्तविक दोषियों को बचाने के इरादे से की गई...

हांसी (संदीप सैनी) : हांसी में एक होटल की सीवर लाइन की सफाई के दौरान 2 व्यक्तियों की मौत के मामले में हरियाणा मानवाधिकार आयोग ने पुलिस जांच को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। आयोग ने इस जांच को पक्षपातपूर्ण, संदेहास्पद और वास्तविक दोषियों को बचाने के इरादे से की गई कार्रवाई करार दिया है। आयोग का कहना है कि उपलब्ध रिकॉर्ड और जांच की दिशा यह संकेत देती है कि जिम्मेदार लोगों को कानून से बचाने के लिए सुनियोजित प्रयास किए गए।

आयोग के अध्यक्ष जस्टिस ललित बत्रा तथा सदस्य कुलदीप जैन और दीप भाटिया की पीठ ने पुलिस द्वारा सौंपी गई रिपोर्ट पर कड़ी आपत्ति जताई। आयोग ने होटल के कथित सहायक प्रबंधक को लेकर प्रस्तुत बिना तिथि का नियुक्ति पत्र संदिग्ध बताया और कहा कि यह दस्तावेज घटना के बाद तैयार कर होटल मालिक की जिम्मेदारी से बचने का प्रयास प्रतीत होता है। आयोग ने इसे कानून और नैतिक मूल्यों के विपरीत बताया।

निष्पक्षता पर सवाल

इसके अलावा आयोग ने उप जिला अटॉर्नी द्वारा 13 नवंबर 2025 को दी गई कानूनी राय पर भी सवाल उठाए, जिसके तहत गंभीर अपराध की धारा बदलकर उसे अपेक्षाकृत हल्का कर दिया गया। आयोग के अनुसार, इस निर्णय ने जांच एजेंसी की नीयत और निष्पक्षता पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है।

SP, DSP और DDA को किया तलब

मानवाधिकार आयोग ने स्पष्ट किया कि यह केवल जांच में लापरवाही का मामला नहीं, बल्कि संस्थागत स्तर पर जवाबदेही से बचने की कोशिश का संकेत देता है। आयोग ने हांसी पुलिस अधीक्षक (SP) को निर्देश दिए हैं कि पूरे प्रकरण की पुनः समीक्षा कर विस्तृत रिपोर्ट अगली सुनवाई से एक सप्ताह पहले प्रस्तुत करें और स्वयं आयोग के समक्ष उपस्थित हों। साथ ही प्रारंभिक जांच अधिकारी डीएसपी और विवादित कानूनी राय देने वाले उप जिला अटॉर्नी (DDA) को भी तलब किया गया है।

मुआवजा न्याय का विकल्प नहीं

आयोग ने यह भी दोहराया कि मृतकों के परिजनों को दिया गया मुआवजा न्याय का विकल्प नहीं हो सकता और वास्तविक दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई अनिवार्य है। मामले की अगली सुनवाई 18 फरवरी 2026 को होगी।

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