Edited By Krishan Rana, Updated: 18 Jun, 2026 07:11 PM
पिछले कई दशकों से पंचकूला, चंडीगढ़ ट्राई सिटी का फेफड़ा कहलाए जाने वाले हरियाणा के एकमात्र पहाड़ी क्षेत्र मोरनी के लोगों को अब उनकी
चंडीगढ़ (चन्द्र शेखर धरणी) : पिछले कई दशकों से पंचकूला, चंडीगढ़ ट्राई सिटी का फेफड़ा कहलाए जाने वाले हरियाणा के एकमात्र पहाड़ी क्षेत्र मोरनी के लोगों को अब उनकी जमीनों का मालिकाना अधिकार मिलने का रास्ता पूरी तरह से साफ हो गया है। शिवालिक विकास मंच प्रदेश अध्यक्ष विजय बंसल एडवोकेट ने बताया कि कोर्ट के आदेश के बाद सरकार हरकत में आई है सरकार के आदेश पर वन विभाग ने संयुक्त टीम का गठन कर युद्ध स्तर पर काम शुरू कर दिया है।
इसी विषय में गत दिवस पंचकूला में फॉरेस्ट सेटलमेंट ऑफिसर रिटायर्ड आईएफएस अधिकारी एमपी शर्मा, मुख्य वन संरक्षक जितेंद्र अहलावत, डीएफओ अजय पाल जांगड़ा, डीएफओ मोरनी- पिंजौर विशाल कौशिक, नायब तहसीलदार प्रद्युमन, 60 पटवारी कानूनगो, वन विभाग के अन्य अधिकारी, याचिकाकर्ता विजय बंसल एडवोकेट और पवन कुमार धीमान, चेन्नई की प्राइवेट कंपनी अलमेंड्स ग्लोबल इंफ्रा कंसलटेंट लिमिटेड के अधिकारी आदि अन्य लोगों की एक मीटिंग हुई जिसमें वन विभाग की भूमि जमीदारों और अन्य लोगों की भूमि का सही सीमांकन करने के लिए विचार विमर्श किया गया।
बता दें कि शिवालिक विकास मंच प्रदेश अध्यक्ष विजय बंसल एडवोकेट द्वारा वर्ष 2017 में जमींदारों को उनका अधिकार दिलाने के लिए पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर की थी जिसकी सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने वन विभाग को फटकार लगाते हुए तुरंत मोरनी क्षेत्र की वन विभाग और जमींदारों एवं अन्य लोगों की प्राइवेट भूमि का सही तरीके से बंदोबस्त करने के आदेश दिए थे इसके बाद अब वन विभाग रेवेन्यू विभाग सहित प्रशासनिक अधिकारी की टीम गठित की गई है।
याचिकाकर्ता विजय बंसल ने बताया कि सरकार ने हाई कोर्ट में शपथ पत्र देकर जमीन के बंदोबस्त के लिए एक टीम गठित करने के लिए कहा था जिसमें फॉरेस्ट सेटलमेंट ऑफिसर (वन बंदोबस्त अधिकारी) के नेतृत्व में नायब तहसीलदार, 60 पटवारी, 4 कानूनगो तीन डीएफओ और चेन्नई की एक प्राइवेट कंपनी अलमेंड्स ग्लोबल इंफ्रा कंसलटेंट लिमिटेड शामिल होंगे ये टीम सर्वे कर मोरनी के सभी 14 भोज कोटाहा और 172 वास अन्य गांवों सहित जंगल की जमीनो का सीमांकन (डिमार्केशन) करेगी।

विजय बंसल एडवोकेट ने बताया कि वन बंदोबस्त अधिकारी एमपी शर्मा के नेतृत्व में प्राइवेट कंपनी, राजस्व विभाग अधिकारियों, पटवारीयों के साथ मिलकर कंपनी आधुनिक तरीके से डीजीपीएस सर्वे करेगी जिसमें सैटेलाइट फोटोग्राफिक के माध्यम से सभी भोज कोटाहा और फॉरेस्ट और गैर फॉरेस्ट क्षेत्र की सीमाएं (मसाबी नक्शा) के अनुसार सटीक सर्वे कर जमीनों का सीमांकन करेगी। बंसल ने बताया कि कोर्ट के आदेश के बाद वन विभाग एवं प्रशासन हरकत में आया है जल्द ही लोगों को उनकी जमीनों का अधिकार मिलेगा।
विजय बंसल ने इसके लिए पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट का आभार प्रकट करते हुए कहा कि भूमि सीमांकन के लिए सरकार सरकार द्वारा पूरा अमला तैयार कर दिया गया है। अब लोगों को जल्द ही उनके अधिकार मिलेंगे। विजय बंसल एडवोकेट ने कहा कि लोगों को उनका अधिकार दिलाने के लिए वह लंबे समय से लड़ाई लड़ रहे थे, अधिकारियों, मंत्रियों मुख्यमंत्री और सरकार के समक्ष कई बार आवाज उठाई, हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर की कोर्ट के आदेश के बाद अब धरातल पर काम आरंभ हो चुका है। लंबे समय से इंतजार कर रहे लोगों को जल्द ही उनके अधिकार मिलेंगे। उन्होंने बताया कि इस सर्वे में पता चल जाएगा की वन विभाग की जमीन कितनी है प्राइवेट जमीन और नोतोड़ भूमि कितनी है।
नियुक्त किए गए वन बंदोबस्त अधिकारी एमपी शर्मा ने कहा कि हम जल्द ही इस सर्वे के कार्य को संपन्न कर लेंगे। मुख्य वन संरक्षक जितेंद्र अहलावत ने भी कहा कि अब काम में देरी नहीं होगी। उधर पूर्व सरपंच पवन कुमार धीमान ने कहा कि वह इस मामले में अपना पूरा सहयोग देंगे जो भी समस्या आएगी उसका समाधान करवाने का प्रयास करूंगा।
विजय बंसल एडवोकेट ने बताया कि नोतोड़ भूमि की समस्या के कारण लोगों की अपनी ही जमीनों पर वन विभाग अधिकार जताकर उन्हें तंग करता था। मोरनी में कुल 14 भोज कोटाहा जबकि 172 वास हैं। विजय बंसल ने कहा कि उन्होंने सूचना के अधिकार 2005 के तहत जानकारी मांगी थी जिसमें खुलासा हुआ था कि वन विभाग ने पटवारी पर एक करोड़ 60 लाख खर्च किए थे लेकिन नतीजा कुछ नहीं निकला जबकि मोरनी की लगभग 6000 एकड़ जमीन का पुनः बंदोबस्त होना है। उन्होंने बताया कि सरकार ने पूरे मोरनी क्षेत्र का पहले भी पटवारीयों से सर्वे करवाया था जिस सर्वे रिपोर्ट में वन विभाग के पास जमींदारों की लगभग 3000 बीघा जमीन जंगल में फालतू निकली है।
विजय बंसल ने बताया कि तत्कालीन बंसीलाल सरकार ने कमिश्नर टीडी जगपाल की अध्यक्षता में एक कमेटी बनाई थी जिसमें किसानों को उनकी जमीनों का मालिकाना अधिकार देने के हक में एक रिपोर्ट बनाकर वर्ष 1987 में सरकार को दी थी। जिसमें किसानों को जंगल से लकड़ी, पानी, रास्ता, पशु चारण, पूजा स्थल बनाने सहित 6 अधिकार दिए जाने की बात भी शामिल थी। विजय बंसल ने कहा कि उसी रिपोर्ट के आधार पर ही शिवालिक विकास मंच ने वर्ष 2017 में पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर कर लोगों को उनकी जमीनों का मालिकाना अधिकार देने की मांग की थी।