ब्रज 84 कोस परिक्रमा मार्ग पर कुदरत का कहर, आंधी-तूफान में उखड़ा टेंट, मलबे में दबने से महिला श्रद्धालु की मौत

Edited By Isha, Updated: 05 Jun, 2026 01:40 PM

female pilgrim dies after being buried under debris

ब्रज चौरासी कोस परिक्रमा मार्ग पर यमुना नदी के निकट हसनपुर क्षेत्र में परिक्रमार्थियों के लिए लगाए गए एक टेंट के आंधी-तूफान में उखड़कर गिर जाने से कई श्रद्धालु घायल हो गए। हादसे में गंभीर रूप से घायल

पलवल/हसनपुर(गुरदत्त):  ब्रज चौरासी कोस परिक्रमा मार्ग पर यमुना नदी के निकट हसनपुर क्षेत्र में परिक्रमार्थियों के लिए लगाए गए एक टेंट के आंधी-तूफान में उखड़कर गिर जाने से कई श्रद्धालु घायल हो गए। हादसे में गंभीर रूप से घायल हुई एक 62 वर्षीय महिला की  मौत हो गई। परिजनों ने उपचार में देरी को भी मौत का एक कारण बताया है।

जानकारी के अनुसार चार दिन पूर्व मथुरा के निकट राया से ब्रज 84 कोस परिक्रमा पर निकला महिलाओं का यह समूह(जत्था) वीरवार दोपहर के समय हसनपुर से आगे उत्तर प्रदेश सीमा शुरू होने से पहले यमुना नदी के पास लगाए गए एक टेंट में रुका हुआ था। समूह में शामिल प्रियंका ने बताया कि भीषण गर्मी और यात्रा की थकान से राहत पाने के लिए श्रद्धालु टेंट में विश्राम कर रहे थे। इसी दौरान तेज आंधी और बारिश शुरू हो गई, जिससे वहां शरण लेने वाले लोगों की संख्या और बढ़ गई।

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प्रत्यक्ष दर्शी प्रियंका के अनुसार कुछ समय बाद दोबारा तेज बारिश के साथ आए आंधी-तूफान में टेंट उखड़ गया। टेंट को सहारा देने वाले लोहे के पाइप श्रद्धालुओं के ऊपर गिर गए, जिससे कई लोग घायल हो गए। घायलों में प्रियंका की चाची सरोज तथा उनकी बुआ की सास मोहनी देवी (62) पत्नी बलबीर सिंह निवासी गांव गड़िया नरसू, थाना कासगंज, जिला एटा (उत्तर प्रदेश) भी शामिल थीं। मोहनी देवी के सिर पर लोहे का पाइप गिरने से उन्हें गंभीर चोट लगी थी।

प्रियंका ने बताया कि घटना के बाद उन्होंने एम्बुलेंस के लिए डायल-112 पर सूचना दी, लेकिन काफी देर तक एम्बुलेंस नहीं पहुंची। इसके बाद घायल मोहनी देवी को ऑटो के माध्यम से हसनपुर के सरकारी अस्पताल ले जाया गया। परिजनों का आरोप है कि वहां उन्हें पर्याप्त चिकित्सा सुविधा नहीं मिली और उन्हें पलवल रेफर कर दिया गया। बाद में एम्बुलेंस से मोहनी देवी को जिला नागरिक अस्पताल पलवल लाया गया, जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

मृतका के पौत्र मोती सिंह ने बताया कि हादसे की सूचना मिलने पर वह फरीदाबाद से पलवल जिला अस्पताल पहुंचा, लेकिन तब तक उसकी दादी की मृत्यु हो चुकी थी। उसका आरोप है कि समय पर उचित उपचार और चिकित्सा सुविधा मिल जाती तो संभवतः उनकी जान बचाई जा सकती थी। हादसे में अन्य घायल श्रद्धालुओं का उपचार कराया गया है। घटना के बाद परिक्रमार्थियों में शोक की लहर है।

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