यमुनानगर बिजली निगम में हुए 49 करोड़ रुपए के फर्जीवाड़े की जांच करेगी ईडी

Edited By Vivek Rai, Updated: 30 Jun, 2022 02:51 PM

ed to investigate fraud of rs 49 crore in yamunanagar electricity board

बिजली निगम में हुए 49 करोड़ रुपये के फर्जीवाड़े में शामिल अधिकारियों और कर्मचारियों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। मामले की जांच अब ईडी (प्रवर्तन निदेशालय) को सौंपी गई है। फर्जीवाड़े में अधिकारियों और कर्मचारियों ने कितनी संपत्ति बनाई है, इसे लेकर अब...

यमुनानगर(सुरेंद्र): बिजली निगम में हुए 49 करोड़ रुपये के फर्जीवाड़े में शामिल अधिकारियों और कर्मचारियों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। मामले की जांच अब ईडी (प्रवर्तन निदेशालय) को सौंपी गई है। फर्जीवाड़े में अधिकारियों और कर्मचारियों ने कितनी संपत्ति बनाई है, इसे लेकर अब ईडी जांच करेगी। इसके लिए ईडी ने बिजली निगम के एसई कार्यालय से संबंधित रिकॉर्ड कब्जे में ले लिए हैं। 

पिछले रिकॉर्ड का ऑडिट करेगी ईडी

बिजली निगम के सुपरिटेंडेंट इंजीनियर राजेंद्र कुमार ने बताया कि ईडी की टीम उनके पास आई थी और उन्होंने इस मामले में संबंधित दस्तावेज उनसे प्राप्त किए हैं। इसमें 4 साल की ऑडिट रिपोर्ट व अन्य कागजात शामिल हैं। उन्होंने कहा कि इस मामले में पहले ही 8 अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जा चुकी है, जिनमें से 2 कार्यकारी अभियंता सहित अन्य कर्मचारियों को पानीपत पुलिस द्वारा गिरफ्तार किया जा चुका है। बिजली निगम द्वारा जगाधरी डिवीजन का वर्ष 2018 से 2022 तक का ऑडिट कराया गया है, जिसमें 49 करोड़  रुपए के फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है। 

लोगों के खाते में पैसे जमा कर हो रहा था फर्जीवाड़ा

जांच में पता चला है कि फर्जीवाड़ा करने वाले कर्मचारियों ने राशि जानकारों के खातों में जमा कराई थी, जिसका बिजली निगम से कोई संबंध नहीं था। जिन लोगों के खातों में रुपये जमा होते थे, उन्हें थोड़ा बहुत कमीशन देकर रुपये खुद हड़प लिए जाते थे। गड़बड़ी सामने आने के बाद अब बिजली निगम 2016-17 व 2017-18 का भी ऑडिट करवा रहा है। मामले की जांच कर रही पानीपत की सीआईए-टू टीम ने इस फर्जीवाड़े में 16 जून को बिजली निगम यमुनानगर के एक्सईएन कुलवंत सिंह और छछरौली सब डिवीजन के लाइनमैन सोनू को गिरफ्तार किया था। वहीं इससे पहले भी कई गिरफ्तारियां हो चुकी हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए अब यह जांच ईडी को सौंपी गई है। माना जा रहा है कि ईडी केस से जुड़े कर्मचारियों की संपत्ति भी अटैच कर सकती है। 

अधिकारियों और कर्मचारियों से हो चुकी लाखों की रिकवरी

अभी तक की जांच में बिजली निगम के एलडीसी राघव वधावन, एएलएम मनहर गोपाल, डिविजनल अकाउंटेंट योगेश लांबा, शैफाली, अकाउंटेंट पूजा गेरा, डिप्टी सुपरिटेंडेंट जगमाल सिंह, एक्सईएन बिलासपुर नीरज कुमार, एक्सईएन कुलवंत सिंह व सेवानिवृत्त जगाधरी एक्सईएन संजीव गुप्ता का नाम सामने आया है। पानीपत की सीआईए-टू ने आरोपी एक्सईएन कुलवंत सिंह से 40 लाख रुपये, एलडीसी राघव वधावन से 75 लाख रुपये, पौने दो किलोग्राम से अधिक के गहने और कार बरामद की है। आरोप है कि राघव ने अपनी पत्नी के नाम भी उसी राशि से प्लाट व दुकान खरीदी है। इसी तरह अकाउंटेंट पूजा गेरा से 35 लाख रुपये की रिकवरी हो चुकी है। योगेश लांबा और राघव वधावन को कोर्ट से जमानत मिल चुकी है। तीन अन्य कर्मचारियों से भी पुलिस ने 10 लाख रुपये रिकवर किए हैं।

गलत मैसेज जाने से सामने आया था घोटाला

पानीपत के गांव समालखा निवासी टैक्सी चालक के बैंक खाते में बिजली निगम के खाते से रुपये जमा होने का मैसेज आने के बाद मामले का खुलासा हुआ था। बिजली निगम के कर्मचारियों को जब इसका पता चला तो वह टैक्सी चालक से रुपये वापस लेने पहुंचे। चालक को कुछ शक हुआ तो उसने पानीपत थाने में शिकायत दी। 

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