Haryana में ढाबों पर होगा ये बड़ा बदलाव, इन नियमों की अनदेखी पर सख्ती तय...जानिए क्या सरकार का प्लान

Edited By Isha, Updated: 28 Jan, 2026 06:19 PM

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हरियाणा की पहचान बन चुके मुरथल के ढाबों पर अब स्वाद के साथ-साथ पर्यावरणीय जिम्मेदारी भी परोसी जाएगी। जीटी रोड पर स्थित ढाबों में जल संरक्षण और प्रदूषण नियंत्रण नियमों को लेकर सरकार ने सख्त रुख

डेस्क: हरियाणा की पहचान बन चुके मुरथल के ढाबों पर अब स्वाद के साथ-साथ पर्यावरणीय जिम्मेदारी भी परोसी जाएगी। जीटी रोड पर स्थित ढाबों में जल संरक्षण और प्रदूषण नियंत्रण नियमों को लेकर सरकार ने सख्त रुख अपना लिया है। वन एवं पर्यावरण मंत्री राव नरबीर सिंह ने साफ शब्दों में कहा है कि केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के निर्देशों का पालन हर हाल में करना होगा, चाहे वह एसटीपी-सीटीपी की स्थापना हो या वैधानिक अनुमतियों की पूर्ति।

मंत्री राव नरबीर सिंह ने यह बात बुधवार को यहां गन्नौर विधायक देवेंद्र कादियान के नेतृत्व में आए मुरथल के ढाबा संचालकों के प्रतिनिधिमंडल के साथ हुई बैठक में कही। बैठक के दौरान मंत्री ने दो-टूक कहा कि पानी का अंधाधुंध इस्तेमाल और गंदे पानी का सीधे बहाव अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

 

हर ढाबे को सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) या कॉमन ट्रीटमेंट प्लांट (सीटीपी) के जरिए पानी के पुनः उपयोग की व्यवस्था करनी होगी। मंत्री ने ढाबा संचालकों से अपील की कि वे स्वेच्छा से पर्यावरण हितैषी कदम उठाएं। सरकार और कारोबारियों के सहयोग से मुरथल को न सिर्फ स्वाद का, बल्कि स्वच्छता और पर्यावरण संतुलन का भी मॉडल बनाया जा सकता है।
 
मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि जो ढाबे बिना चेंज ऑफ लैंड यूज (सीएलयू) के चल रहे हैं, उन्हें नगर निगम से संबंधित टैक्स, शुल्क और दस्तावेज तुरंत पूरे करने होंगे। वहीं जिन ढाबों के पास सीएलयू स्वीकृत है, उन्हें भी हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सभी मानकों का पालन करना अनिवार्य होगा। नियमों की अनदेखी करने वालों पर जुर्माना और क्लोजर जैसी कार्रवाई से सरकार पीछे नहीं हटेगी।

 राव नरबीर सिंह ने कहा कि सरकार का उद्देश्य किसी भी ढाबा या व्यवसाय को नुकसान पहुंचाना नहीं है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण के साथ कानूनसम्मत संचालन सुनिश्चित करना है। उन्होंने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सचिव योगेश कुमार को निर्देश दिए कि बोर्ड अध्यक्ष से समन्वय कर व्यावहारिक समाधान निकाला जाए, जिससे नियम भी लागू हों और कारोबार भी प्रभावित न हो।

 बैठक में ढाबा संचालकों ने यह मुद्दा भी उठाया कि एनजीटी के निरीक्षण के दौरान क्लोजर आदेश जारी होने पर भारी जुर्माना लगाया जाता है। इस पर मंत्री ने कहा कि जुर्माने की गणना ढाबे के संचालन की अवधि के आधार पर होती है, इसलिए बेहतर है कि सभी संचालक समय रहते नियमों का पालन करें और कार्रवाई की

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