Edited By Isha, Updated: 29 Oct, 2026 09:07 AM

बंगाल की खाड़ी से उठे चक्रवाती तूफान 'अर्नब' का असर अब हरियाणा में साफ तौर पर देखने को मिल रहा है। प्रदेश के 4 जिलों में बारिश का सिलसिला शुरू हो चुका है, जबकि भारत मौसम विज्ञान विभाग ने राज्य के 15 जिलों में गर्जना, तेज हवाओं और ओलावृष्टि
चंडीगढ़ : बंगाल की खाड़ी से उठे चक्रवाती तूफान 'अर्नब' का असर अब हरियाणा में साफ तौर पर देखने को मिल रहा है। प्रदेश के 4 जिलों में बारिश का सिलसिला शुरू हो चुका है, जबकि भारत मौसम विज्ञान विभाग ने राज्य के 15 जिलों में गर्जना, तेज हवाओं और ओलावृष्टि को लेकर ऑरेंज और येलो अलर्ट जारी किया है। मौसम विभाग के अनुसार, इस दौरान प्रदेश में 40 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज धूलभरी हवाएं चलने और आकाशीय बिजली चमकने की संभावना है।
इन 15 जिलों में मौसम विभाग का अलर्ट जारी
मौसम केंद्र चंडीगढ़ के अनुसार, चक्रवात 'अर्नब' के प्रभाव से हरियाणा के मध्य, पूर्वी और दक्षिण-पूर्वी हिस्सों में मौसम सबसे ज्यादा प्रभावित रहेगा। पंचकूला, अंबाला, कुरुक्षेत्र, करनाल, पानीपत, सोनीपत, रोहतक, झज्जर, गुरुग्राम, फरीदाबाद, पलवल, नूंह, भिवानी, चरखी दादरी और जींद में अर्लट जारी किया गया है।
मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक, प्रभावित इलाकों में 40 से लेकर 60 किमी/घंटा तक की आंधी चलने का अनुमान है। आंकड़ों पर नजर डालें तो इस साल अक्टूबर के महीने में हरियाणा में मानसूनी विदाई के बाद भी रिकॉर्ड तोड़ बारिश दर्ज की गई है। 1 से 27 अक्टूबर के दौरान हरियाणा में औसतन 25.3 मिमी बारिश हुई है, जबकि सामान्य औसत मात्र 9.0 मिमी का होता है। इस तरह बारिश 181 प्रतिशत अधिक रही है।
जिलेवार आंकड़ों में सोनीपत जिला सबसे आगे दर्ज किया गया, जहां अब तक 63.6 मिमी बारिश हो चुकी है। बावल में 13 डिग्री पहुंचा तापमान, गुलाबी ठंड की दस्तकतूफान के चलते लगातार चल रही ठंडी हवाओं और बूंदाबांदी से दिन और रात के तापमान में बड़ी गिरावट दर्ज की जा रही है। रेवाड़ी जिले का बावल 13.0 डिग्री सेल्सियस न्यूनतम तापमान के साथ राज्य में सबसे ठंडा दर्ज किया गया।
पंचकूला में 13.1°, महेंद्रगढ़ में 13.2°, नारनौल में 13.5° और करनाल में 13.8° सेल्सियस तापमान रहा। मौसम विशेषज्ञों की सलाह: कृषि वैज्ञानिकों और मौसम विभाग ने किसानों को सलाह दी है कि कटी हुई फसलों या मंडियों में खुले में पड़ी जिंसों को तिरपाल से ढककर रखें और तेज हवाओं के दौरान पेड़ों या कमजोर संरचनाओं के नीचे आश्रय न लें।