हरियाणा में बिजली निजीकरण पर ब्रेक, गुरुग्राम-नूंह में प्राइवेट कंपनी को दिया लाइसेंस रद्द, HERC ने पलटा अपना फैसला

Edited By Krishan Rana, Updated: 28 Oct, 2026 07:54 PM

haryana suspends electricity privatization licenses granted to private companie

हरियाणा में बिजली निजीकरण पर ब्रेक लग गया है। गुरुग्राम-नूंह में प्राइवेट कंपनी को 25 साल तक बिजली वितरण करने का

चंडीगढ़ (चन्द्र शेखर धरणी): हरियाणा में बिजली वितरण के निजीकरण को लेकर चल रहे विवाद में बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। गुरुग्राम और नूंह जिलों में निजी कंपनी इलेवन पावर प्राइवेट लिमिटेड (EPPL) को समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस दिए जाने के मामले में हरियाणा विद्युत विनियामक आयोग (HERC) ने राज्य सरकार के निर्देशों के बाद आगे की कार्रवाई रोकने का निर्णय लिया है। आयोग के इस फैसले को बिजली कर्मचारियों के हितों की रक्षा और निजीकरण को लेकर सरकार की चिंताओं के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

ऊर्जा मंत्री अनिल विज पिछले दिनों बिजली कर्मचारियों को भरोसा दिला चुके थे कि वह निजीकरण के मुद्दे पर उनके साथ खड़े हैं और उनकी चिंताओं को सरकार के स्तर पर उठाएंगे। बिजली कर्मचारियों की तीन दिवसीय हड़ताल के दौरान उन्होंने दूसरे दिन स्वयं कर्मचारी प्रतिनिधियों से बातचीत की थी। साथ ही मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से भी चर्चा कर समस्या का समाधान निकालने का भरोसा दिया था। अब सरकार के निर्देशों के बाद आयोग की कार्रवाई रुकने से इस मामले में महत्वपूर्ण बदलाव आया है।

सरकार के निर्देशों के बाद HERC का फैसला
हरियाणा विद्युत विनियामक आयोग के समक्ष इलेवन पावर प्राइवेट लिमिटेड को जारी वितरण लाइसेंस की स्वीकृति का मामला विचाराधीन था। आयोग ने 19 अक्टूबर 2026 को अपने आदेश में कंपनी को गुरुग्राम और नूंह जिलों में 25 वर्ष के लिए समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस प्रदान किया था। कंपनी ने 21 अक्टूबर को इस लाइसेंस को स्वीकार करने की सहमति भी दे दी थी।

इसके बाद हरियाणा सरकार ने विद्युत अधिनियम, 2003 की धारा 108(1) के तहत आयोग को लिखित निर्देश जारी किए। सरकार ने 26 अक्टूबर 2026 को जारी निर्देशों में कहा कि राज्य में कहीं भी समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस न बनाया जाए और न ही उसे चालू किया जाए।

इन्हीं निर्देशों को ध्यान में रखते हुए आयोग ने 28 अक्टूबर 2026 को आदेश जारी कर स्पष्ट किया कि जब तक सरकार के निर्देश प्रभावी रहेंगे, तब तक इस मामले में आगे की कार्रवाई नहीं की जाएगी। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, पंचकूला में आयोग के कार्यकारी चेयरमैन मुकेश गर्ग और सदस्य शिव कुमार की पीठ ने इस मामले में आदेश जारी किए। आयोग ने कंपनी की सुनवाई की मांग भी खारिज कर दी।

सरकार ने क्यों किया निजी लाइसेंस का विरोध?
राज्य सरकार ने समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस को लेकर कई आर्थिक और जनहित संबंधी चिंताएं उठाईं। सरकार की दलील थी कि निजी कंपनी को वितरण व्यवस्था में प्रवेश देने से सरकारी बिजली वितरण निगमों की आर्थिक स्थिति पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
सरकार के अनुसार, निजी कंपनी के आने से अधिक राजस्व देने वाले उपभोक्ताओं के उसके पास चले जाने की आशंका है। इससे सरकारी बिजली वितरण कंपनियों के पास ऐसे उपभोक्ताओं का अनुपात बढ़ सकता है, जिन्हें अपेक्षाकृत कम दरों पर बिजली उपलब्ध कराई जाती है या जिनके लिए क्रॉस-सब्सिडी की व्यवस्था महत्वपूर्ण है। ऐसी स्थिति में सरकारी बिजली निगमों पर वित्तीय दबाव बढ़ सकता है।


सरकार ने किसानों, आम बिजली उपभोक्ताओं और बिजली निगमों के कर्मचारियों में पैदा हो रहे असंतोष को भी अपनी चिंता का विषय बताया। उसका तर्क था कि समानांतर वितरण लाइसेंस की व्यवस्था का प्रभाव केवल बिजली आपूर्ति तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सरकारी बिजली निगमों की आर्थिक स्थिरता और राज्य की व्यापक बिजली व्यवस्था पर भी पड़ सकता है। सरकार ने इन आशंकाओं को जनहित से जुड़ा मामला मानते हुए आयोग को निर्देश जारी किए।

हड़ताल के दूसरे दिन कर्मचारियों से मिले थे अनिल विज
बिजली निजीकरण के मुद्दे पर कर्मचारियों का विरोध उस समय तेज हो गया था, जब हरियाणा के बिजली कर्मचारी तीन दिवसीय हड़ताल पर चले गए। कर्मचारियों की मुख्य चिंता गुरुग्राम और नूंह में निजी कंपनी को समानांतर वितरण लाइसेंस दिए जाने को लेकर थी।

हड़ताल के दूसरे दिन ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने कर्मचारी प्रतिनिधियों के साथ स्वयं बैठक की। उन्होंने कर्मचारियों की मांगों और आशंकाओं को सुना तथा भरोसा दिलाया कि उनकी समस्याओं के समाधान के लिए प्रयास किए जाएंगे। विज ने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से भी बातचीत कर इस मुद्दे को सरकार के स्तर पर उठाया।

विज का कहना था कि बिजली कर्मचारियों की चिंताओं को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। उन्होंने कर्मचारी संगठनों को भरोसा दिया था कि वह उनके साथ खड़े हैं और उनके हितों की अनदेखी नहीं होने देंगे। कर्मचारियों के बीच उनके इस रुख को महत्वपूर्ण माना गया था।

विधानसभा में भी उठा चुके हैं निजीकरण का मुद्दा
अनिल विज बिजली वितरण व्यवस्था में निजीकरण के प्रस्ताव का विरोध पहले भी विधानसभा में कर चुके हैं। वह विभिन्न कर्मचारी संगठनों के समक्ष भी अपना पक्ष रख चुके हैं। उनका रुख रहा है कि बिजली कर्मचारियों की आशंकाओं, सरकारी निगमों की आर्थिक स्थिति और उपभोक्ताओं के हितों को ध्यान में रखकर ही निर्णय लिया जाना चाहिए।

अब राज्य सरकार द्वारा विद्युत अधिनियम की धारा 108 के तहत निर्देश जारी करने और आयोग द्वारा आगे की कार्रवाई रोकने से निजी लाइसेंस का मामला फिलहाल ठहर गया है। इससे कर्मचारियों को तत्काल राहत मिलने की उम्मीद है।

लाइसेंस स्थायी रूप से रद्द होने की स्थिति स्पष्ट करना जरूरी
हालांकि, इस घटनाक्रम को कानूनी रूप से समझना भी आवश्यक है। आयोग के उपलब्ध आदेश में कहा गया है कि सरकार के निर्देश प्रभावी रहने तक मामले में आगे की कार्रवाई नहीं होगी। केवल इस आदेश के आधार पर यह कहना कि लाइसेंस स्थायी रूप से रद्द कर दिया गया है, पूरी तरह सटीक नहीं होगा। लाइसेंस की अंतिम स्थिति और आगे की कानूनी प्रक्रिया सरकार के निर्देशों तथा आयोग के आगामी निर्णयों पर निर्भर करेगी।

कुल मिलाकर, हरियाणा में बिजली वितरण के निजीकरण को लेकर सरकार और बिजली कर्मचारियों की चिंताओं के बीच HERC का यह फैसला महत्वपूर्ण है। अनिल विज ने हड़ताल के दौरान कर्मचारियों को उनकी चिंताओं के समाधान का भरोसा दिया था।

सरकार के हस्तक्षेप और आयोग की कार्रवाई रुकने से उनके प्रयासों की चर्चा तेज हुई है। फिलहाल गुरुग्राम और नूंह में इलेवन पावर के समानांतर वितरण लाइसेंस से जुड़ी प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ेगी, जब तक राज्य सरकार के संबंधित निर्देश प्रभावी रहेंगे।

 

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