प्राइवेट स्कूलों के प्लेज मनी के करोड़ो रुपए पड़े है बॉन्ड- कुलभूषण शर्मा

Edited By Gourav Chouhan, Updated: 03 Aug, 2022 08:54 PM

crores of pledge money of private schools lying in bonds kulbhushan

फेडरेशन ऑफ प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन के अध्यक्ष कुलभूषण शर्मा आज अपने प्रतिनिधिमंडल के साथ हरियाणा सचिवालय में शिक्षा मंत्री कवर पाल गुर्जर से प्लेज मनी के मुद्दे पर मिलने पहुंचे। जहां उन्होंने बताया कि पहले भी शिक्षा मंत्री हमारी मांग को जायज़ ठहरा...

चंडीगढ़(चंद्रशेखर धरणी): फेडरेशन ऑफ प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन के अध्यक्ष कुलभूषण शर्मा आज अपने प्रतिनिधिमंडल के साथ हरियाणा सचिवालय में शिक्षा मंत्री कवर पाल गुर्जर से प्लेज मनी के मुद्दे पर मिलने पहुंचे। जहां उन्होंने बताया कि पहले भी शिक्षा मंत्री हमारी मांग को जायज़ ठहरा चुके हैं, आज भी उन्होंने आश्वासन दिया कि जल्दी  इसका निपटारा किया जाएगा। पहले भी बैठक हुई थी, जिसमें इ.सी.एस. डॉ महावीर डायरेक्टर गणेशन और बाकी एडिशनल डायरेक्टर भी मौजूद रहे। तब यह सहमति बनी थी कि प्राइज मनी बहुत ज्यादा है। हरियाणा के मुकाबले सेंट्रल बोर्ड सी.बी.एस.ई. की अधिकतम प्लेज मनी 1 लाख, दिल्ली में 2 लाख, तेलंगाना में 25000 और पंजाब और हिमाचल में है ही नहीं। हमने मांग रखी हरियाणा की भी सी.बी.एस.ई. के बराबर की जाए। इस पर शिक्षा मंत्री ने सहमति जताई है और उन्होंने माना कि हरियाणा में गलत हो रहा है। यह पैसा कहीं भी काम नहीं आ रहा। यह पैसा रिटर्न कर दिया जाए, ताकि क्वालिटी शिक्षा पर काम किया जा सके, ताकि सबको शिक्षा मिल सके। 


हमारी दूसरी मांग है, प्राइवेट स्कूलों के एडमिशन का ओ.टी.पी. भी सरकारी स्कूल की तरह है, यह स्कूल हेड के फोन पर आना चाहिए। तीसरी मांग हरियाणा के प्राइवेट स्कूल के बच्चों में कोई भेदभाव नहीं होना चाहिए। सरकारी स्कूल में एडमिशन की डेट बढ़ा दी गई, लेकिन प्राइवेट स्कूल के बच्चे शिक्षा से वंचित हो रहे हैं।  चौथा मुद्दा, सोसायटी के रजिस्ट्रेशन का पोर्टल बंद पड़ा है, उसमें भी प्राइवेट स्कूलों को राहत दिलाने के बारे शिक्षा मंत्री को कहा गया है। 3 महीने की सैलरी प्लेज मनी के रूप में ली जाती है, जो छोटे स्कूलों की 5 से 6 लाख बन जाती है, जबकि बड़े स्कूलों में 1 से 2 करोड़ तक बन रही है। सी.बी.एस.सी. में चाहे कितने भी विद्यार्थी हो स्कूलों को 1 लाख देना पड़ता है। उधर जिस स्कूल की प्लेज मनी ज्यादा जमा कराई गई है, उनको भी वापिस देने की व्यवस्था की जानी चाहिए, ताकि वह गुणवत्ता शिक्षा पर ध्यान दे सकें। इसके साथ ही कोरोना पीड़ित स्कूल जो बंद हो गए, उनकी सिक्योरिटी मनी रिफंड करने को लेकर सरलीकरण किया जाना चाहिए, ताकि आसानी से वह पैसा स्कूल प्रबंधकों को मिल सके।

 

बहुत सारे मुद्दों पर सरकार ने एसोसिएशन का साथ भी दिया है, जैसे फायर सेफ्टी लाइसेंस 3 साल के लिए मान्य कराए गए। अब हम अनिल विज से मांग करते हैं कि हाइजीनिक का सर्टिफिकेट की अवधि भी बढ़ाई जानी चाहिए। कोरोना काल का बसों के टैक्स कुछ माफ किए गए हैं, लेकिन प्रोपर्टी टैक्स के मामले में कुछ दिक्कत आ रही है, उन्हे भी दूर किया जाना चाहिए।  प्रशासनिक स्तर पर अधिकारी स्कूलों को राहत नहीं देते अधिकारी इस तरह से मामले को लटकाने की कोशिश करते हैं ऐसे अधिकारियों पर कार्रवाई होनी चाहिए, जो राहत देने में रोड़ा अटका आते हैं। डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला के अधीन आने वाले महकमे में सोसायटी एक्ट में चल रहे स्कूलों के पोर्टल बंद होने की वजह से लाखों रुपए का जुर्माना पड़ा है। हम मांग कर रहे है, हमें ओर वक्त दिया जाए, ताकि जुर्माना ना लगे। प्राइवेट स्कूलों की 134ए की भी बहुत सारी राशि पेंडिंग है, जिसे हम जल्द पाना चाहते है। हम हाईकोर्ट से भी मुकदमा जीत चुके हैं। हमें नियमों के तहत राशि मिलनी चाहिए, ताकि स्कूलों का जो अरबो रुपया बकाया है, उनको जल्द मिले। 

 

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