MDU के सहायक प्रोफेसर की नौकरी पर मंडरा रहा था खतरा, सुप्रीम कोर्ट ने सुनाया बड़ा फैसला; जानें क्या है पूरा मामला

Edited By Harman, Updated: 11 Sep, 2026 04:02 PM

court refuses to cancel mdu assistant professor s appointment orders verificati

उच्चतम न्यायालय ने हरियाणा के महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय (MDU) के एक सहायक प्रोफेसर की नियुक्ति, पीएचडी की डिग्री फर्जी होने की आशंका के आधार पर रद्द करने से इनकार करते हुए कहा कि इस पद के लिए यह डिग्री अनिवार्य योग्यता नहीं थी।

रोहतक : उच्चतम न्यायालय ने हरियाणा के महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय (MDU) के एक सहायक प्रोफेसर की नियुक्ति, पीएचडी की डिग्री फर्जी होने की आशंका के आधार पर रद्द करने से इनकार करते हुए कहा कि इस पद के लिए यह डिग्री अनिवार्य योग्यता नहीं थी। 

न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता एवं न्यायमूर्ति मनमोहन की पीठ ने हालांकि रोहतक स्थित एमडीयू को पीएचडी डिग्री की प्रामाणिकता की जांच करने का निर्देश दिया। पीठ ने कहा कि यदि डिग्री फर्जी पाई जाती है तो विश्वविद्यालय सहायक प्रोफेसर के खिलाफ कार्रवाई के लिए पुलिस में शिकायत दर्ज करा सकता है। शीर्ष अदालत ने कहा कि पीएचडी इस पद के लिए आवश्यक योग्यता नहीं है और संबंधित सहायक प्रोफेसर ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग-राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा (यूजीसी-नेट) उत्तीर्ण करने की अनिवार्य शर्त पूरी की है। पीठ ने कहा, ''यह ऐसा मामला है, जिसमें संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत मिली शक्तियों का इस्तेमाल करना उचित होगा। रिकॉर्ड पर मौजूद दस्तावेजी साक्ष्य महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय द्वारा छठे प्रतिवादी (सहायक प्रोफेसर) के खिलाफ एक बार फिर से जांच किए जाने को आवश्यक बनाते हैं, ताकि बुंदेलखंड विश्वविद्यालय द्वारा किए गए खुलासों के आलोक में उनकी पीएचडी डिग्री का सत्यापन किया जा सके तथा इस बात की संतुष्टि की जा सके कि पीएचडी डिग्री असली है और छठे प्रतिवादी ने कभी भी खुद को पीएचडी डिग्री धारक के रूप में पेश करके विश्वविद्यालय के साथ कोई धोखाधड़ी नहीं की है।'' पीएचडी की यह डिग्री कथित तौर पर बुंदेलखंड विश्वविद्यालय ने जारी की थी। 

एमडीयू से संबद्ध रोहतक के सत जींदा कल्याणा कॉलेज ने 14 फरवरी 2018 को शारीरिक शिक्षा के सहायक प्रोफेसर पद के लिए रिक्ति का विज्ञापन जारी किया था। चयन प्रक्रिया पूरी होने के बाद छठा प्रतिवादी सबसे अधिक योग्य उम्मीदवार के रूप में सामने आया और अंततः उसे इस पद पर नियुक्त कर दिया गया। उच्चतम न्यायालय ने एमडीयू को मामले की सच्चाई का पता लगाने के लिए विस्तृत जांच करने का निर्देश दिया। पीठ ने कहा, ''जांच के दौरान छठे प्रतिवादी को बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के अधिकारियों की मौजूदगी में अपनी मूल पीएचडी डिग्री पेश करनी होगी। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के अधिकारियों को भी वे दस्तावेज पेश करने होंगे, जिनके आधार पर इस अदालत में हलफनामा दाखिल किया गया था।'' 

पीठ ने कहा कि सहायक प्रोफेसर को अपना पक्ष प्रभावी ढंग से रखने और गवाहों से जिरह करने का अवसर दिया जाएगा तथा प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के अनुरूप होने वाली जांच के नतीजे के आधार पर कानून के तहत आगे की कार्रवाई की जा सकती है। न्यायालय ने कहा कि यदि जांच का नतीजा सहायक प्रोफेसर के खिलाफ आता है और पीएचडी डिग्री फर्जी पाई जाती है तो एमडीयू, सत जींदा कल्याणा कॉलेज, बुंदेलखंड विश्वविद्यालय या कोई अन्य व्यक्ति प्रतिवादी के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज करा सकता है ताकि कानून के अनुसार कार्रवाई की जा सके। 

Related Story

Trending Topics

img title
img title

Be on the top of everything happening around the world.

Try Premium Service.

Subscribe Now!