HDFC Agro को मृतक के परिजनों को ब्याज के साथ 33 लाख देने के आदेश

Edited By Pawan Kumar Sethi, Updated: 30 Jul, 2026 10:28 PM

consumer court order to insurance company to give claim

जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने फैसला सुनाते हुए बीमा कंपनी एचडीएफसी एर्गो को मृतक बीमित व्यक्ति के परिजनों को 33.40 लाख रुपये का क्लेम नौ फीसदी ब्याज समेत चुकाने का आदेश दिया है।

गुड़गांव, (ब्यूरो): जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने फैसला सुनाते हुए बीमा कंपनी एचडीएफसी एर्गो को मृतक बीमित व्यक्ति के परिजनों को 33.40 लाख रुपये का क्लेम नौ फीसदी ब्याज समेत चुकाने का आदेश दिया है। इसके अलावा पीड़िता को हुई मानसिक प्रताड़ना के लिए दो लाख रुपये का मुआवजा और कानूनी खर्च के रूप में 55 हजार रुपये अलग से देने के निर्देश दिए हैं। यह ऐतिहासिक आदेश आयोग के अध्यक्ष संजीव जिंदल की पीठ ने सुनाया।

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सेक्टर-सात एक्सटेंशन निवासी नैना यादव ने आयोग में याचिका दायर कर बताया कि उनके पति चिराग यादव ने वर्ष 2018 में सेक्टर-46 में एक प्लॉट खरीदा था, जिसे बनाने के लिए उन्होंने बैंक से लोन लिया था। लोन के साथ ही उन्होंने एचडीएफसी एर्गो से स्वास्थ्य एवं जीवन बीमा भी कराया था, जिसमें बीमित व्यक्ति की मृत्यु या दिव्यांगता की स्थिति में क्लेम मिलने का प्रावधान था। 30 अगस्त 2022 को चिराग यादव के सीने में अचानक तेज दर्द हुआ। उन्हें निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां एक सितंबर 2022 को इलाज के दौरान उनकी मृत्यु हो गई।

 

पति की मौत के बाद जब नैना यादव ने बीमा कंपनी के पास क्लेम के लिए आवेदन किया, तो कंपनी ने उसे यह कहते हुए खारिज कर दिया कि मृतक को पिछले 5 वर्षों से मधुमेह (शुगर) की बीमारी थी, जिसकी जानकारी उन्होंने लोन और बीमा लेते समय छिपाई थी। मामले की सुनवाई के बाद जिला उपभोक्ता आयोग ने बीमा कंपनी की दलील को सिरे से खारिज कर दिया। आयोग ने अपने आदेश में कहां कि भारतीय बीमा नियामक एवं विकास प्राधिकरण के दिशानिर्देशों के अनुसार, पॉलिसी जारी करने से पहले बीमित व्यक्ति की पूरी मेडिकल जांच कराने की जिम्मेदारी बीमा कंपनी की होती है। एक बार पॉलिसी जारी होने के बाद कंपनी पहले से मौजूद बीमारी का बहाना बनाकर दावे को खारिज नहीं कर सकती।

 

आयोग ने पाया कि चिराग यादव की मृत्यु का मुख्य कारण हृदय गति रुकना था, जिसका उनकी मधुमेह की बीमारी से कोई सीधा संबंध साबित नहीं होता। आयोग ने कंपनी की इस मनमानी को सेवा में गंभीर कोताही माना और निर्देश दिया कि 29 सितंबर 2022 से लेकर भुगतान की तिथि तक नौ प्रतिशत वार्षिक ब्याज के साथ पूरी 33.40 लाख रुपये की राशि पीड़िता को सौंपने के निर्देश दिए है।

 

 

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