Edited By Krishan Rana, Updated: 09 Mar, 2026 08:57 PM

हरियाणा और आसपास के क्षेत्रों में सामाजिक, धार्मिक और राजनीतिक गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभाने वाले अमरनाथ भगत का जीवन संघर्ष
कैथल (जयपाल रसूलपुर): हरियाणा और आसपास के क्षेत्रों में सामाजिक, धार्मिक और राजनीतिक गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभाने वाले अमरनाथ भगत का जीवन संघर्ष, सेवा और समाज के प्रति समर्पण का उदाहरण रहा है। 28 फरवरी 1928 को उनका जन्म उस समय के पाकिस्तान में हुआ था। देश के विभाजन के बाद 19 सितंबर 1947 को वे अपने परिवार सहित भारत आ गए। उस दौर में लाखों परिवारों की तरह उन्हें भी नई परिस्थितियों में जीवन की शुरुआत करनी पड़ी, लेकिन उन्होंने कठिनाइयों को अवसर में बदलते हुए समाज सेवा का मार्ग चुना।
युवावस्था से ही अमरनाथ भगत राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़ गए थे। वर्ष 1946 में उन्होंने मुल्तान में संघ के प्रशिक्षण शिविर में आईटीसी किया तथा 1947 में गुजरात में ओटीसी प्रथम वर्ष का प्रशिक्षण प्राप्त किया। संघ से जुड़ने के बाद उनके भीतर राष्ट्र और समाज के लिए कार्य करने की भावना और मजबूत हुई। यही कारण रहा कि वे आगे चलकर सामाजिक और राजनीतिक गतिविधियों में भी सक्रिय होते चले गए।
वर्ष 1952 के बाद अमरनाथ भगत भारतीय जनसंघ के साथ सक्रिय रूप से जुड़ गए और संगठन को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके नेतृत्व और जनसेवा की भावना के कारण लोगों में उनकी एक अलग पहचान बनी। वर्ष 1962 में उन्होंने पहली बार नगर पालिका का चुनाव लड़ा और राजनीति में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। इसके बाद वर्ष 1977 में वे नगर परिषद के चेयरमैन बने। उनके कार्यकाल के दौरान नगर के विकास और जनहित से जुड़े कई कार्यों को प्राथमिकता दी गई।
राजनीतिक जीवन में भी उन्होंने संगठन को मजबूत करने में अहम योगदान दिया। वे दो बार जिला कैथल में भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष भी रहे। उनके नेतृत्व में पार्टी संगठन को मजबूती मिली और कार्यकर्ताओं को एक नई दिशा प्राप्त हुई। अमरनाथ भगत का पूरा परिवार भी सामाजिक और राजनीतिक गतिविधियों में सक्रिय रहा है। उनके सुपुत्र कैलाश भगत हैफेड के चेयरमैन रहे हैं और परिवार के अन्य सदस्य भी समाज सेवा के कार्यों में निरंतर योगदान दे रहे हैं। अमरनाथ भगत के परिवार ने सामाजिक और धार्मिक कार्यों में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। पिहोवा में यात्रियों की सुविधा के लिए कैलाशधाम धर्मार्थ यात्री निवास का निर्माण भी परिवार द्वारा कराया गया, जिससे हजारों श्रद्धालुओं को लाभ मिलता है।
अमरनाथ भगत को क्षेत्र में एक दानवीर और समाजसेवी के रूप में जाना जाता है। उन्होंने कई धार्मिक और सामाजिक संस्थाओं के साथ मिलकर शिक्षा के क्षेत्र में भी योगदान दिया। गांव सेरधा में विद्यालय और महिला कॉलेज की स्थापना में भी उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा। समाज के प्रति उनकी सेवा और समर्पण की भावना आज भी लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी हुई।
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